दान देने का पर्व हैं छेरछेरा त्यौहार (छ. ग.)

                              छेरछेरा पर्व

छेरछेरा पर्व- यह पर्व पौष माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं।

पूष -पुन्नी के नाम से-  छेरछेरा पर्व को पूष -पुन्नी के नाम से भी जाना जाता हैं।

नई फसल के आंरभ में – छेरछेरा पर्व के अवसर पर बच्चे नई फसल के धान मांगने के लिए घर-घर जाकर अपनी दस्तक देते हैं।

उत्साह पूर्वक हैं यह त्यौहार- छेरछेरा पर्व में बच्चे उत्साह पूर्वक  लोगों के घर जाकर ”छेरछेरा कोठी के धान ला हेरत हेरा ”कहकर धान मांगते हैं, जिसका अर्थ हैं – अपने भण्डार से धान निकालकर हमें दो होता हैं।

दान देने का पर्व हैं छेरछेरा त्यौहार (छ. ग.)

वर्तमान परिस्थिति में – छेरछेरा पर्व पहले काफी महत्वपूर्ण माना जाता था परन्तु समय के साथ-साथ यह पर्व वर्तमान में अपना महत्व खोता जा रहा हैं।

प्रसिद्ध सुआ नृत्य – छेरछेरा पर्व के दिन लड़कियां छत्तीसगढ़ अंचल का प्रसिद्ध सुआ नृत्य करती हैं।

दान देने का पर्व हैं छेरछेरा त्यौहार (छ. ग.)

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