कौशल्या माता का एक मात्र मंदिर, चंदखुरी, रायपुर (छ.ग) kaushalya mata mandir chandkhuri

        ( नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे )

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको कौशल्या माता मंदिर के बारे जानकारी देने वाला हूं। ये जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट जरूर करे।

  कौशल्या माता मंदिर, चंदखुरी

पता – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर चंदखुरी गांव स्थित है ।

 

मुख्य प्रवेश द्वार- कौशल्या माता मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर भगवान श्री हनुमान जी की विशाल प्रतिमा दिखाई देती है।

गर्भ गृह – मंदिर के गर्भ गृह में भगवान श्रीराम माता कौशल्या की गोद में बैठे हुए है।

कौशल्या माता का एक मात्र मंदिर, चंदखुरी, रायपुर (छ.ग) chandkhuri kaushalya temple
 

मंदिर का निर्माण –कौशल्या माता मंदिर को 8वीं शताब्दी में सोमवंशी राजाओं के काल में बनाया था।

 

मंदिर का जीर्णोद्धार – कौशल्या माता मंदिर का जीर्णोद्धार सन् 1973 में करवाया था।

 

एक मात्र मंदिर – कौशल्या माता का एक मात्र मंदिर है जो छत्तीसगढ़ के चंदखुरी ग्राम में स्थित है।

जन्म स्थान – भगवान श्री राम की माता कौशल्या का जन्म स्थान चंदखुरी ग्राम में हुआ माना जाता है।

प्राचीन मंदिर – भारत वर्ष की दुर्लभ प्राचीन मंदिर वात्सल्यमयी माता कौशिल्या का मंदिर चन्दखुरी है।

 

आकर्षण का केंद्र – कौशल्या माता का मंदिर श्रद्धालु के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

 

शंकर की प्रतिमा – कौशल्या मंदिर के प्रांगण से मंदिर के ऊपर जाने पर शंकर जी की विशाल प्रतिमा बनाई गई है और उनके सामने में नंदी देव विराजमान हैं।

पौराणिक काल की मूर्तियां – तालाब के बीच में बहुत ही सुंदर मूर्तियां बनाई गई है जैसे- तालाब के बीच में समुद्र मंथन का सुंदर दृश्य दिखलाई देती है, जिसमें देवता और दानव दोनों मिलकर समुद्र मंथन कर रहे हैं। और एक मूर्ति में शेष शैय्या में भगवान विष्णु सोए हुए हैं और उनके पास में मां लक्ष्मी बैठी हुई है।

सुंदर मूर्तियां – कौशल्या माता के मंदिर प्रांगण में ही सुंदर मूर्तियां बनाई गई है जिसमें राजा दशरथ के दरबार को मूर्त रूप दिया गया है, जिसमें राजा अपनी रानियों व प्रमुख मंत्रियों के साथ विराजमान हैं और बीच में भगवान राम की बाल रूप में अपने भाइयों के साथ खेल रहे हैं।

 

टापू पर स्थित है यह मंदिर  –  तालाब के बीचों बीच एक टापू में स्थित है माता कौशल्या का सुंदर मंदिर है।

 

मंदिर की कहानी – किवदंती के अनुसार माना जाता है कि राजा को मां कौशल्या ने सपने में दर्शन दिए थे और सपने में उन्होंने कहा कि मै इस स्थान पर हूं। उसके बाद राजा ने अपने सैनिकों के साथ उस जगह पर पहुंचे उसके बाद राजा ने उस जगह में खुदाई का आदेश दिया। खुदाई के दौरान उस जगह से सुंदर प्रतिमा दिखाई दी जिसमे भगवान श्रीराम माता कौशल्या की गोद में बैठे हुए है।उसके बाद भव्य मंदिर बनवाकर उसमें इस प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कराया गया। 1973 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।

दीपावली के पावन पर्व में –  गांव के ग्रामीण दीपावली के पावन पर्व में सबसे पहले कौशल्या माता के मंदिर में दीप जलाते हैं उनके बाद में अपने घरों व आस – पास में दीप रखते हैं।

वाल्मीकि रामायण में चंदखुरी का जिक्र –रामायण में छत्तीसगढ़ को दक्षिण कौशल कहा गया है। कौशल देश के राजा महाकौशल की पुत्री होने के कारण राजमाता को कौशल्या के नाम से संबोधित किया।कौशल राजा भानुतम समुद्रघृतम राजा दशरथ जब युवराज थे । उनके अभिषेक के समय कौशल राजा भानुमनत को भी आमंत्रित किया गया। भानुमती अपने पिता के साथ अयोध्या गई थी। उनकी सुंदरता से मोहित होकर युवराज दशरथ ने विवाह का प्रस्ताव रखा ।

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़़

Hello friends my name is Hitesh Kumar In this post, I am going to give you information about Kaushalya Mata temple. If you like this information, then please comment.

Kaushalya Mata Temple, Chandkuri

Address – Chandkuri village is located about 27 kilometers from Raipur, the capital of Chhattisgarh.

Main Entrance Gate- A huge statue of Lord Shree Hanuman is seen at the main entrance of Kaushalya Mata Temple.

Garbha Griha – Lord Shri Ram is sitting in the lap of Mother Kaushalya in the sanctum sanctorum of the temple.

Construction of the temple – Kaushalya Mata temple was built in the 8th century during the reign of Somvanshi kings.

Renovation of the temple – Kaushalya Mata temple was renovated in 1973.

One only temple – Kaushalya Mata is the only temple which is located in Chandkuri village of Chhattisgarh.

Place of Birth – Kaushalya, the mother of Lord Rama, is believed to have been born in Chandkuri village.

Ancient Temple – The temple of Vatsalyamayi Mata Kaushalya, a rare ancient temple of India, is Chandkuri.Chandkuri.

Center of Attraction – The temple of Kaushalya Mata is the main center of attraction for the devotee.

Statue of Shankar – On going over the temple from the courtyard of the Kaushalya temple, a huge statue of Shankar is built and Nandi Dev sits in front of him.

Mythological sculptures – Very beautiful sculptures have been made in the middle of the pond like – the middle of the pond gives a beautiful view of the sea churning, in which both the gods and demons are churning the sea together. And Lord Vishnu is sleeping in the rest of the bed in an idol and mother Lakshmi is sitting next to him.

Sculptures – Beautiful sculptures have been made in the temple courtyard of Kaushalya Mata, in which the court of King Dasharatha has been embodied, in which the king sits with his queens and chief ministers and in the midst of Lord Rama with his brothers in the form of Baal. Are playing.

This temple is situated on the island – There is a beautiful temple of Mata Kaushalya located in an island in the middle of the pond.

The story of the temple – According to legend, the mother is believed to have appeared in the dream by the mother Kaushalya and in the dream she said that I am at this place. After that the king reached the place with his soldiers, after that the king ordered an excavation in that place. During the excavation, a beautiful statue is seen from the place in which Lord Shri Ram is sitting in the lap of Mata Kaushalya. This temple was renovated in 1973.

In the holy festival of Deepawali – The villagers of the village first light the lamp in the temple of Kaushalya Mata in the holy festival of Deepawali and then keep the lamp in their homes and surroundings.

The mention of Chandkuri in Valmiki Ramayana – Chhattisgarh has been called Dakshin Kaushal in Ramayana. Kaushal being the daughter of King Mahakaushal of the country, addressed Rajmata by the name of Kaushalya. Kaushal Raja Bhanumantha was also invited at the time of his consecration. Pandora went to Ayodhya with her father. Fascinated by her beauty, Yuvraj Dasaratha proposed marriage.

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