रेत से बना शिवलिंग, kuleshwar mahadev temple rajim

                    कुलेश्वर मंदिर,राजिम

 रेत से बना शिवलिंग, kuleshwar mahadev temple rajim
कुलेश्वर मंदिर

पता – यह  रायपुर से लगभग 45 किलोंमीटर की दूरी पर धार्मिक तीर्थस्थल राजिम स्थित है जहां त्रिवेणी संगम के बीच में कुलेश्वर नाथ महादेव का भी मंदिर स्थित है।

तीन नदियों के संगम पर – राजिम जहां पैरी एवं सोंढुर और महानदी के बीच में बसा है यह कुलेश्वर महादेव का मंदिर।

गर्भगृह – इस मंदिर के गर्भगृह में मुख्य आराध्य देव पंचमुखी शंकर जी का शिवलिंग स्थापित है।

 रेत से बना शिवलिंग, kuleshwar mahadev temple rajim
रेत से बना शिवलिंग कुलेश्वर महादेव

सैकड़ों वर्ष पुराना बरगद – कुलेश्वर नाथ मंदिर प्रांगण में सैकड़ों वर्ष पुराना बरगद आज भी देखा जा सकता है।

पवित्र नगरी – राजिम एक ऎसा पवित्र धार्मिक नगरी है जो छत्तीसगढ में नहीं अपितु पूरे भारत में प्रसिद्ध है।

आकर्षण का केंद्र – राजिम में विधमान राजिम लोचन मंदिर, भगवान कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर और लोमस ऋषी का आश्रम
यहां के मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

महत्त्वपूर्ण मन्दिर – राजिम में राजीव लोचन देवालय में विष्णु भगवान् कि पूजा होती हैं, राजेश्वर रामचंद्र एवं दानेश्चर मंदिर इस समूह के अन्य महत्त्वपूर्ण मंदिर हैं।

प्राचीन नाम – इस जगह का प्राचीन नाम कमलक्षेत्र एवं पदमपुर था।

छत्तीसगढ का प्रयाग – राजिम को छत्तीसगढ का प्रयाग भी कहा जाता हैं।

पूर्वाभिमुख मन्दिर – कुलेश्वर मंदिर का जो मुख है वह पूर्व दिशा की ओर स्थित हैं इस कारण इस मंदिर को पूर्वाभिमुख मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है।

इस मन्दिर के तीन भाग – कुलेश्वर मन्दिर के तल विन्यास में गर्भगृह ,अंतराल एवं मण्डप है।

सुन्दर नमुना – यह मंदिर कला एवं स्थापत्य का एक सुन्दर नमुना  प्रस्तुत करता है।

महाशिवरत्रि पर्व – महाशिवरत्रि उत्सव पर भक्त कुलेश्वर नाथ महादेव शिवलिंग के दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ती हैं और यहां भव्य मेले का आयोजन भी होता है और सावन के पर्व में भी कावड़ यात्री मन्दिर में पहुंचकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और यह मन्दिर बम बम के जयकारों के साथ यह मंदिर परिसर ही गूंज उठता है ।

रेत से बना शिवलिंग – कहा जाता हैं कि वनवास के दौरान इस स्थान में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता आए थे सीता ने यहां
पूजा करने के लिए रेत से एक शिवलिंग का निर्माण किया।
जिसे आज कुलेश्वर नाथ शिवलिंग के नाम से भी जाना जाता है।

8वीं सदी से निर्मित मन्दिर – आज जो मंदिर यहां मौजूद है उसका निर्मांण कल्चुरी शासनकाल में 8वीं सदी से निर्मित माना जाता है।

एक गुप्त गुफा – कहा जाता हैं कि इस मंदिर के अंदर एक गुप्त गुफा है जो लोमस ऋषि के आश्रम तक पहुंचती है।

स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना – यह कुलेश्वर नाथ महादेव मन्दिर स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है इस मंदिर की मजबूत नींव के साथ यह मंदिर सदियों से टिका हुआ है ।तीन नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण यहां बारिश के दिनों में नदियां पूरी तरह आवेग में होती हैं। जिससे यह मंदिर तीन नदियो के बीच में होने के कारण जल से घिरा रहता हैं और भक्त इस मंदिर के दर्शन करने के लिए नाव में बैठकर उस मंदिर तक पहुंचते हैं।

कुम्भ मेला –  राजिम में माघी पुन्नी के दिन भव्य मेले का आयोजन होता है और इस कुम्भ मेला में देशभर से साधु-संत इकठ्ठा होते हैं। इस मेले को देखने के लिए देश विदेश से लोग इस पर्यटन स्थल राजिम में आते हैं।

जनश्रुति कथा के अनुसार – जब नदी में बाढ़ की स्थिति निर्मित होती हैं तब कुलेश्वर मंदिर से राजिम लोचन मंदिर की ओर से एक आवाज आती हैं कि मामा बचाओ मामा बचाओ तब राजिम लोचन मंदिर को ओर से आवाज़ आती हैं कि भांजा कुछ नहीं होगा और फिर धीरे धीरे पानी कम होने लगता है यहां के पुजारी बताते हैं की दरअसल में यह दोनों मंदिर शिव मंदिर हैं जिससे एक शिव मंदिर में मामा पक्ष के पुजारी अपनी सेवा प्रदान करता है तो दूसरा भांजा पक्ष के पुजारी अपनी सेवा प्रदान करता है उसी कारण यह मान्यता बनी हुई हैं।
भोले बाबा आपकी मनोकामना को पूर्ण करे
                          !! ओम नमः शिवाय !!

हमने यूट्यूब में राजिम का वीडियो बनाया है जिसे देखे और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर दे-
Youtube channel – hitesh kumar hk

माघी पुन्नी का मेला देखने के लिए नीचे क्लिक करे

Youtube channel – dk 808

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!! जय जोहार जय छत्तीसगढ़ !!

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