छत्तीसगढ़ का पारधी जनजाति Pardhi tribe Chhattisgarh

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

हैलो दोस्तों मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको छत्तीसगढ़ के पारधी जनजाति के बारे जानकारी देने वाला हूं। जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे।

पारधी जनजाति छत्तीसगढ़

पारधी जनजाति किसे कहते है – पारधी’ मराठी शब्द ‘पारध’ का तद्भव रूप है, जिसका अर्थ होता है- ‘आखेट’। इस जाति का मुख्य व्यवसाय जाल में पशु-पक्षियों एवं जानवरों को फँसाकर उनका शिकार करना है।

धनुष बाण – पारधी जनजाति के लोग पहले धनुष बाण से शिकार करते थे, पारधी जनजाति के लोग बताते है की धनुष धामन के पेड़ की लकड़ी से बनता है जिसमे धनुष फसाया जाता है ओ बॉस का बना होता है।और उसके उपर कोसे का धागा लगा होता है।

बाण जो मुख्य रूप से बॉस का बना होता है जिसके सामने लोहे के का नुकीला पट्टी लगा होता है बाण के आखिरी छोर में रैन नामक पक्षी का पंख लगा होता है इसको बांधने के लिए कोसे का प्रयोग किया जाता है।

जनजाति का मुख्य काम – पहले यह जनजाति का मुख्य काम शिकार करना था।

गुलेल से शिकार- पारधी जनजाति के लोग गुलेल से पक्षियों का शिकार किया करते थे,गुलेल लकड़ी का बना धनुष बाण जैसे ही दिखाई देता है।

पारधी जनजाति क्या खाते थे – दोस्तो पुराने समय में पारधी जनजाति जंगलों में निवास करते थे और जंगलों में मिलने वाले कंद मूल ,फल,चार,तेंदू,महुआ, खाकर जीवन यापन करते थे लेकिन उतना काफी नहीं था, इसलिए पारधी जनजाति शिकार करते थे।

कोन से जानवर का शिकार करते थे – पारधी जनजाति द्वारा हिरण,जंगली ,सुवर, खरगोस आदि बहुत से जानवरो का शिकार करते थे।

पारधी जनजाति आज क्या करती है – दोस्तो पारधी जनजाति आज के समय में खेती और व्यवसाय करते है, व्यवसाय में बॉस का टुकनी,सुपा,गप्पा,चागोरा,ढोलकी आदि चीजे बनाते थे।

उपजातियाँ के नाम इस प्रकार हैै

गोसाई पारधी – गोसाई पारधी गैरिक वस्त्र धारण करते हैं तथा भगवा वस्त्रधारी साधुओं जैसे दिखाई देते हैं। ये हिरणों का शिकार करते हैं।

चीता पारधी – ये लोग कुछ सौ वर्ष पूर्व तक चीता पालते थे, किंतु अब भारत की सीमा रेखा से चीता विलुप्त हो गया है। अत: अब चीता पारधी नाम का पारधियों का एक वर्ग ही शेष बचा है। चीता पारधियों की ख्याति समूची दुनिया में थी। मुग़ल बादशाह अकबर और अन्य बादशाहों के यहाँ चीता पारधी नियमित सेवक हुआ करते थे। जब भारत में चीता पाया जाता था, तब चीता पारधी उसे पालतू बनाने का कार्य करते और शिकार करने की ट्रनिंग देते थे।

भील पारधी – ये बंदूकों से शिकार किया करते थे।

लंगोटी पारधी – इस उपजाति में वस्त्र के नाम पर केवल लंगोटी ही पहनी जाती है।

टाकनकार और टाकिया पारधी – सामान्यत: शिकारी और हांका लगाने वाले पारधी।

बंदर वाला पारधी – बंदर नचाने वाले पारधी।शीशी का तेल वाले पारधी – पुराने समय में मगरमच्छ आदि का तेल निकालने वाले पारधी।

फाँस पारधी – शिकार को जाल में पकड़ने वाले।

हमने यूट्यूब में छत्तीसगढ़ के पारधी जनजाति का वीडियो बनाया है जिसे देखे और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करे Youtube channel – dk808

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।।जय जोहार जय छत्तीसगढ।।

Hello friends my name is Hitesh Kumar In this post, I am going to give you information about the Pardhi tribe of Chhattisgarh. If you like the information, then please comment and share.

Pardhi tribe Chhattisgarh

Which is called Pardhi tribe – Pardhi is a form of the Marathi word ‘Pardha’, which means – ‘Akhet’. The main occupation of this caste is to trap animals and birds and hunt them.

Dhanush Baan – People of Pardhi tribe used to hunt with Dhanush arrow earlier, people of Pardhi tribe say that Dhanush is made from wood of Dhaman tree in which Dhanush is made of o boss and it has a thread on it. it happens.

The arrow, which is mainly made of boss, with a sharp iron band in front of it, is used to tie the rain salt bird’s feather at the end of the arrow.

Main job of the tribe – Previously, the main job of the tribe was to hunt.

Hunting with slingshot – The people of Pardhi tribe used to hunt birds with slingshot, the catapult appears as a bow made of wood.What the Pardhi tribes used to eat – Friends, Pardhi tribes in the past lived in the jungles and lived in the forests by eating tuber origin, fruits, char, tendu, mahua, but that was not enough, so Pardhi tribes started hunting. done.

Cones used to hunt animals – the Pardhi tribe used to hunt many animals like deer, wild, gold, khargos etc.

What the Pardhi tribe does today – Friends, Pardhi tribes do farming and business in today’s time, in business as Boss Katukani, Supa, Gappa, Chagora, Dholki.

The names of the tribes are as follows

Gosai Pardhi – Gosai Pardhi wears Garic clothes and saffron robes look like Sadhus. They hunt deer.

Cheetah Pardhi – These people used to raise cheetah till a few hundred years ago, but now the cheetah has become extinct from the boundary line of India. Therefore, there is only one class of crosses named Cheetah Pardhi left. Cheetah Pardhis were famous all over the world. Cheetah Pardhi used to be a regular servant of Mughal Emperor Akbar and other emperors. When a cheetah was found in India, the cheetah pardhi used to domesticate it and give it hunting to hunt.

Bhil Pardhi – They used to hunt with guns.

Langoti Pardhi – In this sub-caste, only the loincloth is worn in the name of clothes.

Takanakar and Takia Pardhi – Pardhi, generally hunters and hawkers.

Pardhi with monkey – Pardhi with monkey dancing.

Pardhi with vial oil – Pardhi extracting oil of crocodile etc. in olden times.Phans Pardhi – The one who catches the prey in the trap.

Phans Pardhi – The one who catches the prey in the trap.

We have made a video of Pardhi tribe of Chhattisgarh in YouTube, watch it and subscribe to the channel

Youtube channel – dk808

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Jai johar jai chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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