सिद्धि माता का दूसरा मंदिर, बेमेतरा। Siddhi mandir bemetara Chattisgarh

(नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे )

हेलो दोस्तों मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको सिद्धि माता के दूसरे मंदिर के बारे में जानकारी देने वाला हूं।

सिद्धि मंदिर, कांतेली खार, बेमेतरा

सिद्धि माता बेमेतरा

पता – बेमेतरा के दूसरा सिद्धि माता के मंदिर तक पहुंचने के लिए सबसे पहले आप को बेमेतरा पहुंचना होगा उसके बाद घड़ी चौक फिर गस्ती चौक फिर भैरव बाबा मंदिर तक पहुंचकर आप माता सिद्धि मंदिर जाने के लिए रास्ता पूछ सकते हो।

गर्भगृह – मंदिर के गर्भगृह में सिद्धि माता के साथ उनके तीन स्वरूप के दर्शन होते है।

3 रूप में विराजमान है माता – कहा जाता है की इस स्थान में माता अकेली नहीं आई है अपितु अपने साथ अपने तीन रूप को भी लाई है कहा जाता है की माता बचपन, जवानी और बुढ़ापा तीन रूप में विराजमान हुई है ।

दूसरा मंदिर मां सिद्धि का – सिद्धि माता का पहला मंदिर बेमेतरा जिला के ग्राम संडी में है और दूसरा मंदिर बेमेतरा जिला के कांतेली खार में है और दोनो ही मंदिर बेमतरा जिला में स्थित है।

अन्य देवी देवता –यहां शंकर पार्वती गणेश भी एक पत्थर में विराजमान है, यहां माता काली भी एक सिला पे विराजमान है।
सिद्धि माता के साथ माता के रक्षक भैरव बाबा मुख्य गेट के सामने विराजमान है।

माता का विशेष दिन – इस मंदिर में माता का विशेष दिन गुरुवार को माना जाता है लेकिन यहां प्रत्येक गुरुवार को हेमू राम की पत्नी के शरीर पर माता सिद्धि विराजमान होती है और यहां आने वाले भक्तो को किसी भी प्रकार कष्ठ होता है तो माता रानी उसकी समस्या का समाधान करती है।

ज्योति कलश – माता के मंदिर में भक्तों के द्वारा दोनो नवरात्रि में ज्योति कलश जलाया जाता है।

बकरे का बलि – भक्तों के द्वारा मांगी गई मनोकमाना को माता सिद्धि पूर्ण करती है तो वह भक्त माता जी को नारियल या बकरे का बलि अर्पित करता है।

बलि प्रथा – हेमू राम साहू की पत्नी बलि प्रथा के संदर्भ में बताती है की वो नही चाहती थी की यहां बकरे का बलि दिया जाए और वो डरती थी की इस हत्या का दोष उन पर आएगा।इसलिए वो बलि के लिए मना करती थी।लेकिन देवी के कहने पे वो तैयार हो गई और यहां भी बकरे का बलि दिया जाने लगा।

महत्वपूर्ण सूचना – माता के मंदिर में आने से पहले महत्वपूर्ण सूचना

1.महिलाओं को सर ढक कर जाना शक्त माना है।
2.माता के मंदिर में शराब पीकर प्रवेश करना शक्त मना है।

सिद्ध या प्रमाणित जगह – सिद्धि माता का मंदिर एक सिद्ध या प्रमाणित जगह में से एक है।

मंदिर का इतिहास – दोस्तो देवी के आगमन के संदर्भ में यहां के मुखिया श्री हेमू राम साहू (ग्राम सिंघौरी बेमेतरा) बताते है की एक दिन(2013) वह खेत में हल चला रहे थे उस हल में फस के एक पत्थर निकला तो उसे साधारण पत्थर मान के घर ले गए और उसे एक जगह रख दिया गया।

जब देवी ने देखा कि उनका पूजा पाठ नही हो रहा है तो देवी ने हेमू राम साहू की पत्नी को शारीरिक तकलीफ देना शुरू कर दिया शारीरिक तकलीफ को लेकर बहुत ईलाज कराए पर कुछ नही हो पाया ,जब वे अपनी कुंडली लेजाकर किसी जानकार को दिखाए तो उन्होने बताया कि आप को जो पत्थर खेत से मिला है उसका पूजा पाठ करना शुरू कर दो सब ठीक हो जायेगा।

और जैसे ही उस पत्थर का पूजा पाठ हुआ हेमू राम साहू की पत्नी की सभी तकलीफ दूर हो गया,तब से उस पत्थर का पूजा होना शुरू हो गया था लेकिन अभी किसी को मालूम नही था की यह पत्थर देवी है या देवता।

वह पत्थर अपने मूल स्थान में जानें के लिए फिर से हेमू राम की पत्नी को सताने लगी और देवी उनकी पत्नी के ऊपर विराजमान होके मार्गदर्शन करने लगी।

देवी कहने लगी की मैं ग्राम संडी में विराजमान वही सिद्धि माता हूं जो बेमेतरा की कांतेली खार में विराजमान होने आई हूं मुझे घर में न रख के जहा मैं प्रगट हुई हुं उस स्थान में मुझे पहुंचा दो क्योंकि मैं एक की मां नही पूरे संसार की मां हूं।

चुकी हेमू राम साहू कबीर साहब को मानने वाले थे तो इन सब को मानने में उन्हे काफी परेशानी होता था लेकिन अपनी पत्नी की स्थिति को देखते हुए देवी को उनके मूल स्थान में विराजमान किया गया बताते है की कुछ साल तक खेत के बीच में एक कुटिया बनाकर ज्योति कलश जलाए जाते थे,अब 2021 में 9 साल बाद देवी का मंदिर बनकर तैयार है। जिनको भी देवी की महिमा में विश्वास है वो खींचा चला आता है।

हमने यूट्यूब में इस मंदिर का वीडियो बनाया है जिसे देखे और चैनल को लाईक और सब्सक्राइब जरूर करे.
Youtube channel – Hitesh kumar hk

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जय जोहार जय छत्तीसगढ

Siddhi Temple, Kanteli Khar, Bemetra

Address – To reach the second Siddhi Mata temple of Bemetra, first of all you have to reach Bemetra, after that you can ask the way to reach Mata Siddhi temple by reaching the clock square, then the Gasti Chowk and then the Bhairav ​​Baba temple.

Garbha Griha – In the sanctum sanctorum of the temple, there are three forms of darshan of Siddhi Mata.

Mata is sitting in 3 form – It is said that the mother has not come alone in this place, but she has also brought her three forms with her, it is said that the mother has been enthroned as a child, youth and old age.

Second temple of Maa Siddhi – The first temple of Siddhi Mata is in village Sandi in Bemetara district and the second temple is in Kanteli Khar in Bemetara district and both of the temples are located in Bemtara district.

Other Gods and Goddesses – here Shankar Parvati Ganesh is also enshrined in a stone, Mata Kali is also sitting on a sila. Bhairav ​​Baba, the protector of the mother along with Siddhi Mata, sits in front of the main gate.

Mother’s special day – In this temple, Mother’s special day is considered on Thursday, but here every Thursday, Mama Siddhi sits on Hemu Ram’s wife’s body and the devotees who come here somehow have a puja, then Mother Rani Solves the problem.

Jyoti Kalash – The Jyoti Kalash is lit in both the Navratri by the devotees in the temple of Mother.

Goat sacrifice – Mata siddhi fulfills the wish sought by the devotees, then he offers a sacrifice of coconut or goat to the devotee mother.

Sacrifice – Hemu Ram Sahu’s wife tells in the context of sacrificial practice that she did not want the goat to be sacrificed here and she was afraid that the blame for this murder would come on her, so she refused to sacrifice. At the behest of the goddess, she agreed and goat was sacrificed here as well.

Important notice – Important information before the arrival of Mother’s templeIt is considered powerful to cover women with their heads.

1.The person is forbidden to enter the temple of mother by drinking liquor.

2.Siddha or Certified Place – The temple of Siddhi Mata is one of the proven or certified place.

History of the temple – In the context of the arrival of Friends, the head of the temple here, Mr. Hemu Ram Sahu (Village Singhori Bemetra), tells that one day (2013) he was running a plow in the field, when a stone came out of the plow in the plow, then he got a simple stone. He was taken to Maan’s house and he was kept in a place

When Devi noticed that she was not being worshiped, Devi started giving physical discomfort to Hemu Ram Sahu’s wife. He told that start worshiping the stone you got from the field, everything will be fine.

And as soon as the worship of that stone was done, Hemu Ram Sahu’s wife’s pain was removed, since then the stone began to be worshiped, but no one knew whether this stone is a goddess or a deity.

In order to know the stone in its original place, he again started harassing Hemu Ram’s wife and the goddess was seated on his wife and started guiding him.

The goddess started saying that I am the same Siddhi mother sitting in the village Sandi who has come to sit in the Kanteli Khar of Bemetra, do not keep me in the house where I am revealed, reach me in the place because I am not the mother of one, the mother of the whole world. I am.

Chikki Hemu Ram Sahu was supposed to obey Kabir Sahib, then he had a lot of difficulty in obeying all these, but seeing the position of his wife, the goddess was seated in her original place, it is said that a hut in the middle of the field for a few years. Jyoti kalash used to be lit, now after 9 years in 2021, the temple of Goddess is ready. Anyone who believes in the glory of the Goddess is drawn.

We have made a video of this temple in YouTube, watch it and like and subscribe to the channel.
Youtube channel – Hitesh kumar hk

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Jai johar jai Chattisgarh

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