भानेश्वरी मंदिर, सिंघोला राजनांदगांव l bhaneshwari mandir singhola

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तों मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको राजनांदगांव जिले के ग्राम सिंघोला में मां भानेश्वरी के बारे जानकारी देने वाला हूं । ये जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे।

भानेश्वरी मंदिर, सिंघोला राजनांदगांव

पता – दोस्तों यह जो मंदिर है वह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से लगभग 8 किमी की दूरी पर ग्राम सिंघोला में माँ भानेश्वरी देवी का मंदिर स्थित है ।

शक्तिपीठ – दोस्तों ग्राम सिंघोला के भानेश्वरी देवी का मंदिर एक शक्तिपीठ है।

मंदिर का गर्भ गृह – दोस्तों मंदिर के गर्भ गृह के अंदर मां भानेश्वरी देवी विराजमान है। जिनके दर्शन से भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

मां भानेश्वरी की समाधि – दोस्तों सन 1975 में ग्राम सिंघोला में मां भानेश्वरी की समाधि है।

भभूती से दूर होती है रोग – दोस्तों ग्राम सिंघोला के ग्रामवासी के लोगों की मान्यता है कि मां भानेश्वरी की भभूती से दूर हो जाते है रोग ।

तीर्थ स्थल – दोस्तों मां भानेश्वरी का मंदिर एक पवित्र तीर्थ स्थल है।

माताजी का तालाब – दोस्तों मंदिर के समीप माताजी का तालाब है जहां माताजी पहले स्नान किया करती थी l इसलिए इस तालाब का नाम माताजी के नाम पर पड़ा है।

मां दुर्गा का मंदिर – दोस्तों सन 2000 में तालाब के बीच में मां दुर्गा के मंदिर का निर्माण करवाया है।

अन्य देवी देवता की मूर्ति – दोस्तों माँ भानेश्वरी के अलावा मां शीतला, मां दुर्गा माता, हनुमान और शंकर जी के दर्शन होते है।

ज्योति कलश – दोस्तों माँ भानेश्वरी मंदिर में दोनों नवरात्रि पर्वों में भक्तों के द्वारा ज्योति कलश जलाया जाता है।

मेला का पर्व – दोस्तों माँ भानेश्वरी के मंदिर में मेला का पावन पर्व लगता है जिसे देखने और माता के दर्शन के लिए यहां भक्त दूर दूर से इस मंदिर में पहुंचते है।

मां भानेश्वरी का इतिहास – दोस्तों कहा जाता है की एक समय की बात है सोमनाथ साहू एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार से था।सोमनाथ साहू के परिवार में सन 9 मई 1911 को भानुमति का जन्म हुआ। 12 वर्ष की उम्र में एक चमत्कार हुआ, उसके शरीर में बड़े चेचक के दाने उभरे लगे , जो निरंतर कम ज्यादा और साथ बुखार भी था।

अन्ततः शीतला मंदिर में माता पहुंचानी का पर्व किया गया। भानुमति ने जैसे ही मंदिर में प्रवेश किया, उनका शरीर अत्यधिक आवेशित हुआ। वह हंसने और रोने लगी और अटल संकल्प लिया कि वे अब शीतला माता के मंदिर में ही रहेंगी।

यहीं से ही चमत्कारिक घटना आरंभ हुई भानुमति पर देवी का आदेश प्रारंभ हुआ। दुखी-संतप्त लोग, संतानहीन जन लगे भानुमति अब माता भानेश्वरी देवी की कृपा आशीष से सभी की मनोकामना को पूर्ण होने लगी।

राजनांदगांव के कई जिले से सम्पन्न नागरिक और व्यापारी, किसान सभी माता को मानने लगे। यहां जिस व्यक्ति को पागल पन भी हो गया था एवं माता की कृपा से स्वस्थ भी हो जाते थे।

इस मंदिर के पास में श्रीमद् भागवत, महाभारत, अखण्ड रामायण पाठ आदि धार्मिक कार्य हुए करते थे किन्तु कभी भी भोजन आदि की कमी नहीं हुई।

मान्यता यह है कि वह विशेष पर्व पर मां भानेश्वरी कील के काटो से युक्त पाटा में बैठती थी। वह आज भी विद्यमान है।जिसके कृपा मात्र से श्रद्धालु सुख प्राप्त करते थे।

माता भानेश्वरी का महाप्रयाण की एक वर्ष पूर्व ही भविष्यवाणी । कर दी थी । अतः आदेशानुसार देवी की समाधि स्थल का निर्माण किया गया। माता भानेश्वरी देवी का सूक्ष्म शरीर अभी भी यहां पर विद्यमान हैं। यहां प्रतिवर्ष मेला भरता है। संत माता भानेश्वरी देवी ने 3 नवम्बर 1975 को समाधि ली।

यह पोस्ट आपको अच्छा लगे या इसके बारे में जरूरी जानकारी है तो हमे कमेंट कर जरूर बताएं।

जय जोहार जय छत्तीसगढ

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give you information about Maa Bhaneshwari in village Singhola of Rajnandgaon district. If you like this information, then do comment and share.

Bhaneshwari Temple, Singhola Rajnandgaon

Address – Friends, this temple is situated at a distance of about 8 km from Rajnandgaon district of Chhattisgarh, in village Singhola, the temple of Mother Bhaneshwari Devi.

Shaktipeeth – Friends, the temple of Bhaneshwari Devi of village Singhola is a Shaktipeeth.

Garbha Griha of the temple – Friends, Mother Bhaneshwari Devi is seated inside the sanctum sanctorum of the temple. Whose darshan fulfills the wishes of the devotees.

Maa Bhaneshwari’s Samadhi – Friends, in the year 1975, there is a tomb of Maa Bhaneshwari in village Singhola.

Diseases are removed from Bhabhuti – Friends, the people of village Singhola believe that diseases are cured by Bhabhuti of Maa Bhaneshwari.

Pilgrimage site – Friends, the temple of Maa Bhaneshwari is a holy pilgrimage site.

Mataji’s pond – Friends, there is Mataji’s pond near the temple where Mataji used to take bath earlier, hence the name of this pond is named after Mataji.

Temple of Maa Durga – Friends, in the year 2000, a temple of Maa Durga has been built in the middle of the pond.

Idols of other deities – Apart from friends Maa Bhaneshwari, Maa Sheetla, Maa Durga Mata, Hanuman and Shankar ji are seen.

Jyoti Kalash – Friends, in both the Navratri festivals, Jyoti Kalash is lit by the devotees in Maa Bhaneshwari temple.

Festival of Fair – Friends, a holy festival of fair is held in the temple of Maa Bhaneshwari, for which devotees reach this temple from far and wide to see and see the mother.

History of Maa Bhaneshwari – Friends, it is said that once upon a time Somnath Sahu was from a middle class farmer family. Bhanumati was born on 9 May 1911 in Somnath Sahu’s family. At the age of 12, a miracle happened, large chickenpox rash began to appear in his body, which was constant, more and more accompanied by fever.

Finally, the festival of reaching the mother was done in the Sheetla temple. As soon as Bhanumati entered the temple, her body became very charged. She started laughing and crying and took a firm resolve that she would now stay in Sheetla Mata’s temple.

It was from here that the miraculous event started, the order of the goddess started on Pandora. Sad-stricken people, childless people, Bhanumati, now with the blessings of Mata Bhaneshwari Devi, everyone’s wishes started getting fulfilled.

The rich citizens and traders, farmers from many districts of Rajnandgaon all started obeying the mother. Here the person who had become mad and also became healthy by the grace of his mother.

Religious works like Shrimad Bhagwat, Mahabharata, Akhand Ramayana text used to be done near this temple, but there was never any shortage of food etc.

It is believed that on this special festival, Mother Bhaneshwari used to sit in a pata containing the bites of a nail. It exists even today. By whose grace the devotees used to get happiness.

Mata Bhaneshwari’s prediction of Mahaprayana a year ago. had done Therefore, according to the order, the shrine of the goddess was constructed. The subtle body of Mata Bhaneshwari Devi is still present here. A fair is held here every year. Sant Mata Bhaneshwari Devi took samadhi on 3 November 1975.

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Jai Johar jai chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा और अन्य रहस्यमय जगह के बारे इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे।

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