देऊर शिव मंदिर,गंडई,राजनादगांव lDeur Shiv Mandir Gandai Rajnandgaon

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको गंडई (राजनादगांव)में स्थित देउर शिव मंदिर के बारे में जानकारी देने वाला हूं जो तीन युगों को दर्शाता है।ये जानकारी अच्छा लगा है तो इसे शेयर जरूर करे

देऊर शिव मंदिर,गंडई,राजनादगांव,छत्तीसगढ़

दूरी – दोस्तो गंडई का देउर शिव मंदिर राजनादगांव से लगभग 70 की मी की दूरी में है।यह मंदिर गंडई में टिकरीपारा में स्थित है।

मंदिर का इतिहास – दोस्तो देउर शिव मंदिर का निर्माण 11 शताब्दी में कल्चुरी राजाओं के द्वारा कराया गया था।दोस्तो जिस प्रकार खजुराहो का मंदिर और छत्तीसगढ़ में भोरमदेव मंदिर है ठीक उसी प्रकार इस मंदिर का निर्माण भी नागर शैली में हुआ है।

मंदिर का वर्णन – दोस्तो मंदिर मे का एक ही अंग है जो गर्भ गृह है। जहां पे शिवलिंग विराजमान है।दोस्तो मंदिर में सुंदर नकाशी किया क्या है यह मंदिर पत्थरो से निर्मित है मंदिर के दीवारों में सुंदर युद्ध कला में निपूर्ण सैनिकों का चित्रण किया गया है जो घोड़े हाथी में सवार है।दोस्तो मंदिर के दीवारों में 3 युगों(सतयुग,त्रेता, द्वापर) को दर्शाया गया है।मंदिर की दीवारों में नृत्यांगना के मूर्ति भी बने हुए है।जैसा कि ये मंदिर शिव मंदिर है तो गर्भ गृह के सामने नंदी जी को विराजित किया गया है।मंदिर में अलग अलग खंडों में प्रसिद्ध देवी देवता की विराजमान किया गया है।

विशेष मूर्ति – दोस्तो देऊर शिव मंदिर में भोरमदेव मंदिर की तरह ही कुछ कामुक मूर्ति बनाए गए है जो समाज में शिक्षा प्रद है।इसके अलावा मंदिर की दीवारों में नटराज,महिसासुर मर्दन,नरसिंग,कालभैरव,3 युगों का झांकी देखने को मिलता है।गर्भ गृह के दरवाजे में कौरव पांडव के मूर्ति बने हुए है।साथ ही दरवाजे में गंगा जमुना की मूर्ति भी बने हुए है।

पुरातत्व विभाग के संरक्षण में मंदिर – दोस्तो जैसे की गंडई का देउर शिव मंदिर अति प्राचीन है इसलिए ये मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।मंदिर के बहुत सारे अवशेष को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित करके रखा है।

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends my name is Hitesh Kumar In this post I am going to give you information about Deur Shiva temple located in Gandai (Rajnandgaon) which shows three eras. If you liked this information then definitely share it.

Deur Shiv Mandir,Gandai,Rajnandgaon,Chhattisgarh

Distance – Friends, Gandai’s Deur Shiva temple is located at a distance of about 70 km from Rajnandgaon. This temple is located at Tikripara in Gandai.

History of the temple – Friends Deur Shiva temple was built by the Kalchuri kings in the 11th century. Friends, just as there is the Khajuraho temple and the Bhoramdev temple in Chhattisgarh, in the same way this temple is also constructed in the Nagara style.

Description of the temple – Friends, there is only one part of the temple which is the Garbh Griha. Where Shivling is seated. Friends, what is the beautiful carving done in the temple, this temple is built of stones. The walls of the temple depict soldiers who are perfect in beautiful martial arts, who are riding in horse elephant. Friends, there are 3 eras in the walls of the temple. Satyuga, Treta, Dwapar) are depicted. There are also idols of dancers in the walls of the temple. As this temple is a Shiva temple, the river ji has been placed in front of the sanctum The famous deity has been enshrined in different sections in the temple.

Special Idol – Friends, in Deur Shiva temple, some erotic idols have been made like Bhoramdev temple, which is instructive in the society. In the door of the sanctum sanctorum, the idols of Kauravas and Pandavas are made. Along with this, the idol of Ganga Jamuna is also made in the door.

Temple under the protection of Archaeological Department – Friends, as Deur Shiva temple of Gandai is very ancient, therefore this temple is under the protection of Archaeological Department. Many remains of the temple have been preserved by the Archaeological Department.

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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