पंचकोशी धाम,पांच शिवलिंग की यात्रा l Panchkoshi Dham chhattisgarh

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको छत्तीसगढ़ के पंचकोशी धाम जिसे पांच शिवलिंग की यात्रा भी कहते जिसके बारे में जानकारी देने वाला हूं ये जानकारी अच्छा लगा है तो इसे शेयर जरूर करे

पंचकोशी धाम,पांच शिवलिंग की यात्रा

पंचकोशी धाम क्या है – दोस्तो पंचकोशी धाम पांच शिव मंदिर की यात्रा है।दोस्तो इस यात्रा में लोग पांच शिवलिंग के दर्शन का भगवान से मनोकमाना मागते है।

पंचकोशी धाम कहा है – दोस्तो पंचकोशी धाम छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में है।

पंचकोशी यात्रा कब किया जाता है – दोस्तो पंचकोशी यात्रा जनवरी माह में मकरस्क्रांति के समय पांच दिन में की जाती है।लेकिन भक्त कभी भी यह पंचकोशी धाम दर्शन करने पहुंच सकते है।

पांचकोशी धाम का शुरुवात कहा से होता है – दोस्तो पंचकोशी यात्रा का शुरुवात छत्तीसगढ़ के प्रयाग नगरी राजिम से सुरु होता है।

पंचकोशी यात्रा में किन किन शिव मंदिर के दर्शन होते है।
1)कुलेश्वर महादेव,राजिम।।
2)पटेश्वर नाथ महादेव ।
3)चंपेश्वर महादेव चंपारण।
4)बम्हनेश्वर महादेव,बम्हनी।
5)फणिकेश्वर महादेव फिंगेश्वर।

विस्तार से जाने।
1)कुलेश्वर महादेव – दोस्तो पंचकोशी यात्रा की शुरुवात छत्तीसगढ़ के प्रगराज राजिम से सुरु होता है जहां कुलेश्वर महादेव का मंदिर है। महानदी,पैरी, सोढूर नदी के संगम में विराजमान है।कुलेश्वर महादेव प्राचीन काल में बताते है की यहां भगवान राम लक्ष्मण सीता जी आए थे।माता सीता अपनी आराध्य कुल देव भगवान शिव के पूजा करने के लिए रेत से शिवलिंग का निर्माण की जिसका नाम कुलेश्वर महादेव पड़ा। मंदिर का निर्माण 8-9 वी सदी के मध्य हुआ था।

2)पटेश्वर नाथ महादेव – दोस्तो पंचकोशी यात्रा का दूसरा पड़ाव राजिम से 10 की. मी पश्चिम दिशा की ओर रायपुर जिले के ग्राम पटेवा में है। पटेश्वर नाथ महादेव का मंदिर है।दोस्तो इस गांव का प्राचीन नाम पटनापुरी था जो अब पटेवा के नाम से जाना जाता है।दोस्तो यहां पे जो शिवलिंग विराजमान है ओ सज्योजात वाली है।इसकी अर्धग्नि माता अनपूर्णा को माना जाता है इसे अन्नामय कोष का प्रतीक माना जाता है। पंचकोशी यात्रा में पूजा के समय जो मंत्र का उच्चारण होता है उस मंत्र में अन्ना की महिमा बताया जाता है।इस प्रकार अन्ना के रूप में ब्रह्म की उपासना करने को कहा जाता है जो इंसान अन्ना को ब्रह्म के रूप में उपासना करते है।उन्हे शिव और अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त होता है। पटेश्वर नाथ महादेवको अन्ना ब्रम्ह के रूप में पूजा जाता है।

3)चंपेश्वर महादेव चंपारण – दोस्तो चम्पेश्वर महादेव राजिम से लगभग 12 की मि दूर उत्तर दिशा की ओर इसका।प्राचीन नाम चंपारण्य था।इस स्थान में 18 अकड़ में चम्पा के पेड़ का जंगल है। इसलिए इसे चंपारण्य यह स्थान सैव और वैष्णव संप्रदाय के मिलन का अदभुत स्थान है।महाप्रभु वल्लभाचार्य जी का नाम स्थान चंपारण्य को माना जाता है। पंचकोशी यात्रा के समय भक्त यहां चम्पेश्वर महादेव के दर्शन करते है।चम्पेश्वर महादेव यहां ततपुरुष महादेव के रूप में दर्शन करते है यहां इसकी अर्धग्नी माता काली को माना जाता है। चम्पेश्वर महादेव की उपासना प्राण रूप में किया जाता है इसे पवन का प्रतीक माना जाता है।

4)बम्हनेश्वर महादेव,बम्हनी – दोस्तो इस स्थान को पंचकोशी यात्रा का तीसरा पड़ाव माना जाता है यह स्थान राजिम से 15 की.मी दूर उत्तर पूर्व दिशा में जिला महासमुंद में स्थित है।इस स्थान को श्वेत गंगा के नाम से जाना जाता है।इस स्थान में शिवलिंग को।अघोर मूर्ति के रूप में उपासना किया जाता है। यहां माता ऊमा को शिव की शक्ति माना जाता है।इस शिवलिंग के पूजा से आनंद की प्राप्ति होती है।इस स्थान में एक कुंड है जिसमे बारह महीने पानी निकलता रहता है इसे मां गंगा माना जाता है इसलिए इसे स्वेत गंगा माना बोला जाता है।

5)फणिकेश्वर महादेव फिंगेश्वर – दोस्तो फणिकेश्वर महादेव राजिम से 16 की.मी पूर्व दिशा में है फिगेश्वर। फिंगेश्वर को छत्तीसगढ़ के 36 किलो में से एक माना जाता है।दोस्तो फणिकेश्वर महादेव को इसान वाली मूर्ति बोला जाता है।भगवान शिव के इस स्वरूप को विज्ञानमय कोष का स्वरूप माना जाता है।इसकी अर्धग्नि माता अम्बिका को माना जाता है।इस शिवलिंग की आराधना से भक्तो को शुभ गति प्राप्त होता है।इस मंदिर का निर्माण कुलेश्वर महादेव के समकालीन माना जाता है।यह मंदिर स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। यहां पर आप को बहुत सारे मंदिरों के दर्शन होते है। जैसे पंच मंदिर ,बालाजी मंदिर,राज महल,मावली माता मंदिर के दर्शन होते है।

6)कोपेश्वर महादेव कोपर –दोस्तो अभी आप को लेकर जाने वाले है पंचकोशी यात्रा का आखिरी पड़ाव में राजिम से 16की मी दूर दक्षिण दिशा में है ग्राम कोपरा जहां विराज मान है कोपेश्वर महादेव। दोस्तो इस शिवलिंग को करपुरेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है।दोस्तो ग्राम कोपरा में विराजमान होने के कारण इस शिवलिंग को कोपेश्वर महादेव बोला जाता है।दोस्तो यह मंदिर तलाब में स्थित है इस तालाब को दलदली या शंख सरोवर भी कहा जाता है। यहां पे विराजमान शिवलिंग को वामदेव कहा जाता है। इसकी अर्धग्नि माता भवानी है।

पंचकोशी धाम के दर्शन करने के बाद भक्त पुनः राजिम लौट कर भगवान कुलेश्वर महादेव और राजिम लोचन जी को धन्यवाद करते है की आप ने हमारा ये पंचकोशी धाम का यात्रा मंगलमय बनाया।

हमने यूट्यूब में पंचकोशी धाम का विडियो बनाया है जिसे देखे और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करे

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give you information about Panchkoshi Dham of Chhattisgarh, which is also called the journey of five Shivling, if you liked this information, then definitely share it.

Panchkoshi Dham, the journey of five Shivlings

What is Panchkoshi Dham – Friends, Panchkoshi Dham is a visit to five Shiva temples. Friends, in this journey, people ask God for the vision of five Shivlings.

Panchkoshi Dham is said – Friends, Panchkoshi Dham is in Gariaband district of Chhattisgarh.

When Panchkoshi Yatra is done – Friends, Panchkoshi Yatra is done in five days in the month of January at the time of Makarkranti. But devotees can reach this Panchkoshi Dham at any time.

Where does Panchkoshi Dham begin – Friends, Panchkoshi Yatra starts from Prayag city Rajim of Chhattisgarh.

Which Shiva temples are seen in Panchkoshi Yatra.

1) Kuleshwar Mahadev, Rajim.

2) Pateshwar Nath Mahadev

3) Champeshwar Mahadev Champaran.

4) Bamhaneshwar Mahadev, Bahni

6) Phanikeshwar Mahadev Fingeshwar

Go in detail.

1)Kuleshwar Mahadev – Friends Panchkoshi Yatra starts from Pragraj Rajim of Chhattisgarh where there is a temple of Kuleshwar Mahadev. Mahanadi is situated in the confluence of Parri, Sodhur river. Kuleshwar Mahadev tells in ancient times that Lord Rama, Lakshman Sita ji had come here. Mata Sita built a Shivling from sand to worship her adorable family deity, Lord Shiva, whose name is Kuleshwar Mahadev fell. The temple was built between 8-9th century.

2) Pateshwar Nath Mahadev – Friends, the second stop of Panchkoshi Yatra is 10 kms from Rajim. I am in the west direction in the village Patewa of Raipur district. Pateshwar Nath is the temple of Mahadev. Friends, the ancient name of this village was Patnapuri, which is now known as Pateva. Friends, the Shivling, which is situated here, is worshiped. is considered. The mantra which is chanted at the time of worship in Panchkoshi Yatra In that mantra the glory of Anna is told. Thus it is said to worship Brahm in the form of Anna. The person who worships Anna as Brahm. He gets the blessings of Shiva and Annapurna. Pateshwar Nath Mahadev is worshiped as Anna Brahma.

3)Champeshwar Mahadev Champaran – Friends Champeshwar Mahadev is about 12 miles away from Rajim towards its north direction. The ancient name was Champaranya. This place has a forest of Champa tree in 18 acres. Therefore it is called Champaranya, this place is a wonderful place of meeting of the Saiv and Vaishnava sects. Devotees visit Champeshwar Mahadev at the time of Panchkoshi Yatra. Champeshwar Mahadev appears here in the form of Tatpurush Mahadev.Champeshwar Mahadev is worshiped in the form of life, it is considered a symbol of wind.

4) Bamhaneshwar Mahadev, Bamhani – Friends, this place is considered to be the third stop of Panchkoshi Yatra. This place is located 15 km from Rajim in the north-east direction in the district Mahasamund. This place is known as Shwet Ganga. In this place, Shivling is worshiped in the form of Aghor idol. Here Mata Uma is considered to be the power of Shiva. Worship of this Shivling brings joy. There is a pool in this place in which water keeps coming out for twelve months, it is considered as Maa Ganga.That is why it is called as Swet Ganga.

5) Phanikeshwar Mahadev Fingeshwar – Friends Phanikeshwar Mahadev is 16 km east of Rajim, Figeshwar. Fingeshwar is considered to be one of the 36 kilos of Chhattisgarh. Friends, Phanikeshwar Mahadev is called the idol of Isan. This form of Lord Shiva is considered to be the form of Vigyanmay Kosh. Its half fire is believed to mother Ambika. Worship brings auspicious speed to the devotees. The construction of this temple is believed to be the equivalent of Kuleshwar Mahadev.This temple is considered an excellent example of architecture. Here you can see many temples. Like Panch Mandir, Balaji Mandir, Raj Mahal, Mavli Mata Mandir are visited.

6) Kopeshwar Mahadev Kopar – Friends are going to take you now, in the last stop of Panchkoshi Yatra, 16 km away from Rajim is in the south direction, village Kopra where Viraj Man is Kopeshwar Mahadev. Friends, this Shivling is also known as Karpureshwar Mahadev. Friends, this Shivling is called Kopeshwar Mahadev because of being seated in village Kopra. Friends, this temple is located in the pond, this pond is also called marshy or conch sarovar. The Shivling sitting here is called Vamdev. Its half fire is Mata Bhavani.

After visiting Panchkoshi Dham, the devotees again return to Rajim and thank Lord Kuleshwar Mahadev and Rajim Lochan ji for making our journey to Panchkoshi Dham auspicious.

We have made a video of Panchkoshi Dham in YouTube, which must be seen and subscribed to the channel.

youtube channel – hamar gariyaband

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Jai Johar jai chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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