पूर्वामुखी शिवलिंग, शिव मंदिर घटियारी,गंडाई lShiv Mandir Ghatiyari

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हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको छत्तीसगढ़ की राजनादगांव जिले के घटियारी के प्रसिद्ध शिव मंदिर के बारे में जानकारी देने वाला हूं ये जानकारी अच्छा लगा है तो इसे शेयर जरूर करे

शिव मंदिर घटियारी,गंडाई, राजनांदगांव

दूरी – दोस्तो घटियारी का प्राचीन शिव मंदिर छत्तीसगढ़ के राजनादगांव जिले के गंडई से लगभग 7 किलोमीटर दूर बिरखा घटियारी में है।

भोरमदेव मंदिर के समकालीन – दोस्तो घटियारी का जो शिव मंदिर है।उसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो भोरमदेव का समकालीन माना जाता है। यह भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में है।

कैसे मिला यह शिव मंदिर – दोस्तो पहले कोई नही जानता था की इस स्थान में कोई शिव मंदिर है। सन 1979 में इस स्थान में जो टीला था उसका खुदाई किया गया वहां से घटियारी का प्राचीन शिव मंदिर निकला काफी समय से मूर्ति जमीन में दबे रहने से टूट चुके है।

पूर्वामुखी शिवलिंग – दोस्तो घटियारी के प्राचीन शिव मंदिर में जो शिवलिंग स्थापित है जिसका मुख पूर्व दिशा की ओर है इसलिए इसे पूर्वामुखी शिवलिंग कहा जाता है।

शिव मंदिर की बनावट – दोस्तो यह शिव मंदिर का निर्माण पत्थरों से किया गया है। इस मंदिर में मंडप और गर्भगृह दो अंग है।गर्भगृह में कृष्ण प्रसार से निर्मित विशाल जलहरी है। जिसमें शिवलिंग स्थापित है, किन्तु यह शिवलिंग वास्तविक न होकर कृत्रिम है। क्योंकि इस स्थापित शिवलिंग जलहरी के अनुपात में छोटा है।

किसने बनवाया यह शिव मंदिर – दोस्तो घटियारी के इस शिव मंदिर को कवर्धा के फणि नागवंशीय राजाओं के राज्यकाल में करीब 10वीं-12वीं ईसवी में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था।

गौरवशाली नगर की कल्पना – दोस्तों घटियारी क्षेत्र में 10वीं-12 वीं सदी का प्राचीन शिव मंदिर, लोग जिसे समझते थे मामूली टीला उसके नीचे मिला ऐतिहासिक नगर के अवशेष घटियारी का प्राचीन शिव मंदिर प्रस्तर निर्मित है। इन मदिरों व मूर्तियों के अतिरिक्त घटियारी क्षेत्र के आस-पास और भी आलंकारिक मूर्तियां व वास्तुखंड बिखरे पड़े हैं। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्राचीन काल में यहां समृद्ध और गौरवशाली नगर रहा होगा, जो प्राकृतिक आपदा के कारण नष्ट हो चुका है।

मंदिर के विशेषताएं – दोस्तो इस मंदिर के दोनों ओर पर सूक्ष्म कुंड निर्मित है। पुरातत्ववेता की माने तो यह कुंड पानी एकत्र करने के लिए बनाए गए थे, इसी पानी से स्वत: ही गर्भगृह के जलधारी में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक होता था।
शिवलिंग में चढ़े जल के लिए प्रवाहित की दिशा उत्तर की ओर है गर्भ गृह की भित्तियां अलंकार विहीन हैं। केवल पश्चिम दिशा की दीवार में एक आले में गणेश जी की भव्य मूर्ति विराजित हैं। मंडप में भगवान गणेश, भैरव, महिषासुर मर्दनी तथा अन्य खंडित प्रतिमाएं रखी हुई है। गर्भगृह के अलकृंत द्वार चौखट पर घट पल्लव और कीर्तिमुख का अंकन है। दाएं और बांए द्वार चौखट पर नीचे के भाग में त्रिभंग मुद्रा में चर्तुर्भुजी शैव प्रतिहार प्रदर्शित है। इस मंदिर परिसर में पौराणिक काल के दौरान अन्य शिव मंदिरों का भी निर्माण होता रहा है, जिनके ध्वस्त अवशेष स्थल पर बिखरे पड़े हुए है।

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give you information about the famous Shiva temple of Ghatiyari in Rajnadgaon district of Chhattisgarh, if you liked this information, then do share it.

Shiv Mandir Ghatiyari, Gandai, Rajnandgaon

Distance – Friends, the ancient Shiva temple of Ghatiyari is in Birkha Ghatiyari, about 7 kilometers from Gandai in Rajnadgaon district of Chhattisgarh.

Contemporary of Bhoramdev Temple – Friends, the Shiva temple of Ghatiyari. It is considered a contemporary of Khajuraho Bhoramdev of Chhattisgarh. This Bhoramdev temple is in Kawardha district of Chhattisgarh.

How did you get this Shiva temple – Friends, earlier no one knew that there is a Shiva temple in this place. In the year 1979, the mound which was in this place was excavated, from there the ancient Shiva temple of Ghatiyari turned out to be broken due to being buried in the ground for a long time.

Purvamukhi Shivling – Friends, the Shivling which is established in the ancient Shiva temple of Ghatiyari, whose face is towards the east, hence it is called Purvamukhi Shivling.

Structure of Shiva Temple – Friends, this Shiva temple has been constructed with stones. The mandapa and the sanctum sanctorum are two parts in this temple. In the sanctum sanctorum, there is a huge water body made of Krishna Prasar. In which Shivling is installed, but this Shivling is not real but artificial. Because this established Shivling is small in proportion to the Jalhari.

Who built this Shiva temple – Friends, this Shiva temple of Ghatiyari was built during the reign of the Phani Nagavanshi kings of Kawardha in about 10th-12th AD.

Imagination of Glorious City – Friends, ancient Shiva temple of 10th-12th century in Ghatiyari area, what people thought was a minor mound found under it, remains of the historical city, the ancient Shiva temple of Ghatiyari is built. Apart from these temples and idols, there are more figurative sculptures and architectural fragments scattered around the Ghatiyari area. From this it can be guessed that in ancient times there must have been a prosperous and glorious city, which has been destroyed due to natural calamity.

Features of the temple – Friends, a subtle pool is built on both sides of this temple. According to the archaeologist, these pools were made to collect water, with this water automatically Jalabhishek of Shivling installed in the water of the sanctum was used.The direction of flow for the water offered in the Shivling is towards the north, the walls of the sanctum are devoid of ornaments. Only in a niche in the wall of the west side, a grand idol of Ganesha is enshrined. Lord Ganesha, Bhairav, Mahishasura Mardini and other fragmentary idols are kept in the mandap.There is a marking of Ghat, Pallava and Kirtimukh on the ornate door frame of the sanctum. Chaturbhuji Shaiva Pratihara is displayed in Tribhanga posture in the lower part on the right and left door frames. Other Shiva temples have also been built in this temple complex during the Puranic period, whose ruined remains are scattered at the site.

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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