छत्तीसगढ़ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर l

 नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।
 
हैलो दोस्तों मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के भोरमदेव मंदिर के बारे में जानकारी देने वाला हूं। ये जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे
 
 
भोरमदेव मंदिर, कवर्धा

         छत्तीसगढ़ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर, कवर्धा(छ. ग.)

पता- राजधानी रायपुर से लगभग 125 किलोमीटर दूर चौरागांव में स्थित है। भोरमदेव का प्राचीन मंदिर।

गर्भगृह में विराजमान –  भोरमदेव मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।शिवलिंग । यह एक बहुत ही पुराना हिन्दू मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है।

छत्तीसगढ़ का खजुराहो- भोरमदेव मंदिर को छत्तीसगढ़ का  खजुराहो भी कहते है।

7वीं से 11वीं सदी का मंदिर –  भोरमदेव का मंदिर 7वीं सदी से 11 वीं सदी का मंदिर माना जाता है।

छत्तीसगढ़ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर, कवर्धा(छ. ग.)
मंदिर का निर्माण- भोरमदेव मंदिर का निर्माण  सन् 1039 ई. में फणिनागवंशी शासक गोपाल देव ने कराया था। यह मंदिर तल विन्यास में सप्तरथ चतुरंग एवं उर्ध्व विन्यास सप्तभूमि शैली का है। तल विन्यास में गर्भ गृह  अंतराल,अलंकृत स्तंभों से युक्त वर्गाकार मण्डप एवं तीन ओर प्रवेश के लिये अर्ध मण्डप निर्मित है। उध्व्र विन्यास में अधिष्ठान जंघा एवं शिखर मंदिर के प्रमुख अंग है। | इस मंदिर की कला में तांत्रिक प्रभाव परिलक्षित है। विभिन्न मैथुन दृश्यों के अंकन एवं कलात्मक -सौम्य के कारण इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ की संज्ञा दी जाती हैं।

मड़वा महल का निर्माण- भोरमदेव मंदिर से 1किलोमीटर कि दूरी पर हैं मड़वा महल इसे विवाह का प्रतीक तथा दूल्हादेव भी कहते है।मड़वा महल को नागवंशी राजा और हैंहवंशी रानी के विवाह के रूप में जाना जाता हैं। सन् 1349 में फणिनागवंशी राजा रामचंद्रदेव की पत्नी अम्बिकादेवी के द्वारा 5 वीं सताब्दी ईस्वी में मड़वा महल का निर्माण किया गया था। यह महल 16 स्तंभो पर टिकी हुई है।

छत्तीसगढ़ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर, कवर्धा(छ. ग.)

भोरमदेव महोत्सव –  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा हर साल मार्च के अंतिम सप्ताह तथा अप्रैल के पहले सप्ताह में भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

कला शैली की झलक-  भोरमदेव मंदिर के जंघा की तीन पंक्तियों में विभिन्न देवी देवताओं, कृष्णलीला नायक, नयिकाओं, युद्ध एवं मैथुन दृश्यों से अलंकरण किया गया है। मंदिर के भद्ररथ पर उकेरी प्रतिमा विशेष महत्व की है। जिसमें त्रिपुरान्तक वध चामुण्डा, महिषासुरमर्दिनी एवं नृत्य गणपति की प्रतिमाएँ विशेष कलात्मक और आकर्षक हैं एवं शिखर मंजरियों से अलंकृत है।

राधा कृष्ण मंदिर का रहस्य- नगर के मध्य में स्थित राधा कृष्ण मंदिर श्रद्धालु के लिए आस्था का केंद्र है।मंदिर के नीचे लगभग 12 से 14 किलोमीटर तक एक सुरंग भी बनाया गया जो सीधे भोरमदेव मंदिर में निकलता है।

उत्कृष्ट नक्काशि की मूर्तियों –मंदिर के दीवारो पर आपको देवी देवताओं तथा मानव की अनेक प्रकार की मूर्ति दीवारों पर उकेरी गयी है। मंदिर के किनारे एक विशाल सरोवर है तथा उनके चारो तरफ फ़ैली मंदिर  कृतिमतापूर्वक पर्वत शृंखला के बीच हरी भरी घाटियों के कारण यहाँ आने वाले पर्यटको के मन को मोह लेती है।

छत्तीसगढ़ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर, कवर्धा(छ. ग.)

कामोत्तेजक मुर्तियाँ- इस मंदिर के बाहय दीवारो पर बेहद सुंदर एवम् कामोत्तेजक मुर्तियाँ बनायीं गयी है। इन दीवारों में पर चित्रित कामोक मुर्तियाँ विभिन्न 54 मुद्राओं में दर्शायी गयी है। वास्तव में यह मुर्तियां अनन्त प्रेम और सुंदरता का प्रतिक है।यह सारे चित्रण कलात्मक दृष्टी से भी महत्वपूर्ण है।

हमने यूट्यूब में भोरमदेव मंदिर का विडियो बनाया है जिसे देखे और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करे

Youtube channel –  dk808 

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends my name is Hitesh Kumar in this post I am going to give you information about Bhoramdev temple of Kawardha district of Chhattisgarh. If you like this information then do comment and share

Bhoramdev Temple, Kawardha

Address- Located in Chauragaon, about 125 km from the capital Raipur. The ancient temple of Bhoramdev.

Situated in the sanctum sanctorum – Om Bhoramdev is seated in the sanctum sanctorum of the temple. Shivling. This is a very old Hindu temple which is dedicated to Lord Shiva.

Khajuraho of Chhattisgarh- Bhoramdev Temple is also known as Khajuraho of Chhattisgarh.

Temple of 7th to 11th century – The temple of Bhoramdev is believed to be a temple of 7th to 11th century.

Construction of the temple- Bhoramdev temple was built in 1039 AD by the ruler of Phaninagvanshi, Gopal Dev. This temple is of Saptaratha Chaturanga in floor configuration and Saptabhoomi style in the upper configuration. In the floor configuration, there is a sanctum sanctorum, a square pavilion with ornate pillars and an ardha pavilion for entrance on three sides is built. In the upper configuration, the thigh and shikhar are the main parts of the temple. | Tantric influence is reflected in the art of this temple.Due to the marking and artistic softness of various sex scenes, this temple is called ‘Khajuraho of Chhattisgarh’.

Construction of Madwa Mahal- Madwa Mahal is at a distance of 1 kilometer from Bhoramdev temple. It is also called as the symbol of marriage and the bridegroom. Madwa Mahal is known as the marriage of Nagvanshi king and Haivanshi queen. The Madwa palace was built in the 5th century AD by Ambikadevi, the wife of Phaninagvanshi king Ramchandradev in 1349. This palace rests on 16 pillars.

Bhoramdev Festival – Every year the Bhoramdev Festival is organized by the Chhattisgarh government in the last week of March and first week of April.

Glimpses of Art Style- The three rows of the thigh of the Bhoramdev temple are adorned with various deities, Krishnalila Nayakas, heroines, battle and sex scenes. The idol carved on the Bhadraratha of the temple is of special importance. In which the idols of Tripurantaka slaughter Chamunda, Mahishasurmardini and dance Ganapati are special artistic and attractive and are decorated with Shikhar Manjaris.

Mystery of Radha Krishna Temple- Radha Krishna Temple located in the center of the city is the center of faith for the devotees. A tunnel was also built under the temple for about 12 to 14 kilometers which leads directly to the Bhoramdev temple.

Excellent carving sculptures – On the walls of the temple, you will find many types of idols of deities and humans carved on the walls. There is a huge lake on the side of the temple and the temple spread around them, because of the lush green valleys between the mountain ranges, attracts the mind of the tourists coming here.

Fetish Idols- Very beautiful and erotic idols have been made on the outer walls of this temple. The erotic sculptures painted on these walls are depicted in 54 different postures. In fact, these idols are a symbol of eternal love and beauty. All these depictions are also important from an artistic point of view.

We have made a video of Bhoramdev temple in YouTube, which must be seen and subscribed to the channel

Youtube channel –  dk808 

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Jai Johar Jai chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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