इस मंदिर में होती है कुत्ते की पूजा,कुकुरदेव मंदिर खपरी (जिला – बालोद) छ.ग

                  कुकुरदेव मंदिर खपरी (जिला – बालोद)

स्थान – यह मंदिर बालोद से डोंडीलोहारा रोड पर दुर्ग जिले में बालोद से 6 किलोमीटर दूर स्थित खपरी नामक गांव में स्थित है
कुकुरदेव का मंदिर।

प्रवेश  द्वार – गेट के सामने में आपको दोनों ओर कुत्ते की प्रतिमा दिखाई देगी।

भैरव स्मारक – खपरी का यह मंदिर एक भैरव स्मारक हैं।

गर्भ गृह – मंदिर के गर्भ गृह जलाधारी (योनिपिठ) पर शिवलिंग प्रतिष्ठपित है। और बगल में एक कुत्ते की प्रतिमाएं स्थापित है।

इस मंदिर में होती है कुत्ते की पूजा,कुकुरदेव मंदिर खपरी (जिला - बालोद) छ.ग

स्मृति स्मारक – वास्तव में यह एक स्मृति स्मारक  है जो भगवान शिव को समर्पित है।

मंदिर का निर्माण –  कुकुरदेव मंदिर का निर्माण फनि नागवंशीय
शासकों  द्वारा 14-15 वीं शती ईस्वी के मध्य मंदिर का निर्माण कराया गया।

कुत्ते की स्मृति में –कुकुरदेव मंदिर के निर्माण के संबंध में एक रोचक किंवदती प्रचलित है कि कुकुरदेव मंदिर साहू कार (कर्ज देने वाले) बंजारा के द्वारा उसके स्वामी भक्त कुत्ते की स्मृति में कुत्ते के दफन स्थल पर बनवाया गया है।

इस मंदिर में होती है कुत्ते की पूजा,कुकुरदेव मंदिर खपरी (जिला - बालोद) छ.ग

नागों का अंकन – शिखर का बाह्यय भित्तियो पर चारो दिशाओं में नागों का अंकन दृष्ठ है। यह पूर्वाभिमुखी मंदिर हैं।

मंदिर परिसर – यहां पर राम लक्ष्मण और शत्रुघ्न की एक प्रतिमा भी रखी गई है। एक ही पत्थर से बनी दो फीट ऊंची गणेश प्रतिमा भी स्थापित है।

कुत्ते के काट जाने पर – माना जाता है कि किसी को कुत्ता ने काट लिया हो तो इस कुकुर देव मंदिर में आने पर वह व्यक्ति ठीक हो जाता है।

इस मंदिर में होती है कुत्ते की पूजा,कुकुरदेव मंदिर खपरी (जिला - बालोद) छ.ग

एक ऎसा मंदिर – कुकुर देव मंदिर एक ऎसा मंदिर जहां होती हैं
कुत्ते की पूजा।

कुकुर देव मंदिर का इतिहास –
कहा जाता है कि यहां पहले कभी बंजारों की बस्ती थी।मालीघोरी नाम के बंजारे के पास एक पालतू कुत्ता था। अकाल पड़ जाने के कारण बंजारे को अपने कुत्ते को मालगुजार के पास गिरवी रखना पड़ गया। इसी दौरान मालगुजार के घर चोरी हो गई। कुत्ते ने चोरों को मालगुजार के घर से चोरी का माल तालाब के किनारे छुपाते हुए देख लिया था। जब सुबह कुत्ता मालगुजार को उस स्थान पर ले गया जिस स्थान पर चोरी का सामान छुपाए थे। मालगुजार को अपना सामान भी मिल गया।

मालगुजार ने कुत्ते की वफादारी से खुश होकर उसने सारी बात
एक कागज में लिखकर उसके गले में बांध दिया और उसे अपने पुराने असली मालिक के पास भेज दिया। उनके असली मालिक ने अपने कुत्ते को मालगुजार के घर से लौटकर आते देखकर  बंजारे ने डंडे से पीट-पीटकर अपने कुत्ते को मार डाला।

कुत्ते के मर जाने के बाद उसके गले में बंधे एक पत्र को देखकर उसे अपनी गलती का प्रश्चित हुआ और बंजारे ने अपने प्रिय मित्र कुत्ते की याद में एक मंदिर प्रांगण में ही कुकुर देव की समाधि बनवा दिया। बाद में यहां पर किसी ने कुत्ते की मूर्ति भी स्थापित कर दी। आज भी यह मंदिर  कुकुरदेव मंदिर के नाम से जाना जाता है।

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