सोलह खंभो पर आधारित है यह ओंकारेश्वर शिव मंदिर,पलारी, बालोद, (छ.ग)

                        ओंकारेश्वर शिव मंदिर,पलारी

स्थान –छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरूर तहसील के अन्तर्गत ग्राम पालरी में स्थित है ओंकारेश्वर शिव मंदिर।

गर्भगृह – पलारी के इस मंदिर के गर्भ गृह में एक शिवलिंग विराजमान है। जिनके दर्शन मात्र से भक्तो की मनोकामना पूरी होती है।

ओंकारेश्वर शिव मंदिर – पलारी के शिव मंदिर को ओंकारेश्वर शिव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

सोलह खंभो पर आधारित है यह ओंकारेश्वर शिव मंदिर,पलारी, बालोद, (छ.ग)

मंदिर का निर्माण – 13 वीं शताब्दी में पलारी के शिव मंदिर का निर्माण नागवंशी राजाओं के द्वारा किया गया था। छत्तीसगढ़ के ग्राम पलारी में नागवंशी राजाओं के कार्यकाल में बना है यह ओंकारेश्वर शिव मंदिर।

दीवारों पर सुंदर नक्काशी – शिव मंदिर के चारों ओर दीवारों में सुंदर कलाकृति उकेरी गई जो काफी सुंदर लगती है ऐसा लगता है कि यह कलाकृति आज भी जीवंत रूप में मौजूद हैं। जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

सोलह खंभो पर आधारित है यह ओंकारेश्वर शिव मंदिर,पलारी, बालोद, (छ.ग)

महाशिरात्रि पर्व पर – पलारी के शिव मंदिर में महाशिरात्रि पर्व एवं सावन मास में भक्तो की भारी भीड़ भोले बाबा के दर्शन के लिए उमड़ पड़ती है।

पर्यटक स्थल – पलारी का शिव मंदिर एक सुंदर पर्यटक स्थल है यहां दूर – दूर लोग इस मंदिर को देखने के लिए आते है।

पुष्पक विमान –  इस मंदिर के द्वार में पुष्पक जैसे विमान पत्थरों पर चित्रित दिखाई देते हैं। इस दृष्टि से पलारी के इस शिव मंदिर का महत्व काफी बढ़ जाता है ।

सोलह खंभो पर आधारित है यह ओंकारेश्वर शिव मंदिर,पलारी, बालोद, (छ.ग)

धार्मिक आयोजन – इस मंदिर में वर्ष भर में अनेक धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।

सोलह खंभो पर आधारित मंदिर- पलारी का यह शिव मंदिर सोलह खंभो के मंडप स्तम्भ से यह शिव मंदिर आज भी सुरक्षित खड़ा हुआ है।

पुरातत्व विभाग की देख रेख में यह मंदिर – सन 1993 से पलारी का शिव मंदिर पुरातत्व विभाग की देख रेख में आज भी यह मंदिर सुरक्षित हैं।

इस जगह का नाम कावरगढ़ क्यों पड़ा – कहा जाता है की कावरव पांचों पांडव को खोजते हुए कावरगढ़ में रुके थे तभी उस इस जगह का नाम कावरगढ़ पड़ा है।

बालोद जिला के गौरव – शिव मंदिर में पुरातत्वविक स्थलों में चिन्हित तालाब के किनारे शिव मंदिर गुरुर व बालोद जिला के गौरव है।

नवग्रह – ओंकारेश्वर शिव मंदिर के पीछे नवग्रह की प्रतिमा स्थापित है व बीच में शनि देव वहीं मां दुर्गा का दरबार भी है।

प्राचीन धरोहर – यह शिव मंदिर प्राचीन स्मारकों और धरोहर के रूप में अपना अलग पहचान बनाता है।

पांडवों के काल का – माना जाता है कि वनवास काल के समय पांचों पांडवो पलारी के शिव मंदिर  में एक झोपड़ी बनाकर यहां पर रुके हुए थे।

मंदिर का इतिहास – किवंदती के अनुसार जब इस मंदिर का निर्माण हो रहा था तो एक विचित्र जनक घटना हुई जब पांच सदस्य परिवार इस मंदिर का निर्माण कर रहे थे तभी युवक निर्वस्त्र हो कर मंदिर में कलश चढ़ा रहा था तभी अनजाने में उसकी बहन आ गई बहन शर्मसार हो कर बावली में कूद कर आत्महत्या कर ली युवक और उसका परिवार भी सदमे में उस बावली में कूद कर आत्महत्या कर ली। तभी उस बावली से एक शिवलिंग की उत्पत्ति हुई। तब इस शिवलिंग को मंदिर में के जाकर स्थापित किया गया।

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा और अन्य रहस्यमय जगह के बारे इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे।

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