14 वर्ष की उम्र से तपस्या में लीन है बाबा सत्यनारायण l Satyanarayan Baba Raigarh Chhattisgarh

 
नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।
 
हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले कोसमनार में स्थित बाबा सत्यनारायण के बारे में जानकारी देने वाला हूं।।यह जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे आइए जानते है बाबा सत्यनारायण के बारे में विस्तार से।
 
 
                     बाबा सत्यनारायण कोसमनारा, रायगढ़

पता – दोस्तों यह छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कोसमनारा से लगभग19 किलोमीटर दूर देवरी, डूमरपाली में एक स्थान में बैठ हुआ है सत्यनारायण बाबा।

हठयोगी –  दोस्तों बाबा जी भीषण गर्मी हो या कड़ी ठंडी हठयोग की ही मुद्रा में लीन रहते हैं।16 फरवरी 1998 से तपस्या में लीन बाबा सत्यनारायण को यह हठ योग करते 19 वर्ष बीत गए।

14 साल की उम्र में –    दोस्तों सत्यनारायण बाबा जी ने 14 वर्ष की उम्र से तपस्या में लीन है।

बाबा जी का जन्म – दोस्तों 12 जुलाई 1984 को सत्यनारायण बाबा जी का जन्म हुआ था।

माता और पिता का नाम – दोस्तों सत्यनारायण बाबा जी के पिता का नाम दयानिधि साहू एवं माता का नाम हँसमती साहू है।

खुले आसमान के नीचे – दोस्तों कोसमनारा के सत्यनारायण बाबा खुले आसमान के नीचे ही रहकर तपस्या में लीन रहते हैं।

बचपन का नाम – बाबा जी का बचपन का नाम हलधर साहू था। जो आगे चल कर बाबा सत्यनारायण के नाम से जाने जाते है।

उड़ता देखा गया सांप – बाबा धाम के मंदिर के ऊपर से उड़ता देखा गया सांप इस स्थल में बाबा सत्यनारायण कठोर तपस्या में लीन रहते हैं।

14 वर्ष की उम्र से तपस्या में लीन है बाबा सत्यनारायण, कोसमनारा, रायगढ़(छ.ग)

बाबा जी का आहार –बाबा सत्यनारायण कठोर तपस्या में को उठते है तब दूध लेते हैं लेकिन बाबा कब दूध ग्रहण करते हैं यह
किसी को पता नहीं है।

अखंड धूनी – एक सप्ताह बाद एक सेवक बाबा से विनती करके अग्नि धूनी प्रज्वलित कर दिया जो अखंड धूनी के रूप आज भी निरन्तर जलती ही रहती है।

आध्यात्मिक बालक –   दोस्तो बचपन से ही बाबा जी आध्यात्मिक बालक थे। वह बचपन से ही अध्यात्म की तरफ ही अकेले चल पड़े थे।

असीम शक्ति – कोसमनारा के सत्यनारायण बाबा कुछ असीम शक्तिया हैं जिनके कारण वह घोर तपस्या में ही लीन रहते है।

14 वर्ष की उम्र से तपस्या में लीन है बाबा सत्यनारायण, कोसमनारा, रायगढ़(छ.ग)

अद्भुत है कोसमनारा के सत्यनारायण बाबा –सत्यनारायण बाबा कब समाधि से उठते हैं कब क्या खाते हैं यह किसी को पता नहीं चल पाया है। बाबा बात नही करते मगर जब ध्यान तोड़ते हैं तो भक्तों को इशारे में ही संवाद कर लेते है ।आज भी सत्यनारायण बाबा घोर कठोर तपस्या में ही लीन रहते हैं।रायगढ़ की धरा को तीर्थ स्थल बनाने वाले बाबा सत्यनारायण के दर्शन करने वाले भक्तों के लिए अब कोसमनारा में लगभग हर व्यवस्था है किंतु बाबा ने खुद के सर पर छांव करने से भी मना किया हुआ है। आज भी बाबा जी का कठोर तप जारी है।

महाशिवरात्रि में – बाबा धाम में महाशिवरात्रि पर्व पर यहां मेले का भी आयोजन होता है हजारों की संख्या में लोग सत्यनारायण बाबा के दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं।

14 वर्ष की उम्र से तपस्या में लीन है बाबा सत्यनारायण, कोसमनारा, रायगढ़(छ.ग)

सत्यनारायण बाबा की कहानी – मान्यता के अनुसार कोसमनारा से 19 किलोमीटर दूर देवरी, डूमरपाली में एक साधारण किसान दयानिधि साहू एवं हँसमती साहू के परिवार में 12 जुलाई 1984 को एक बालक का जन्म हुआ, माँ और बाप मिलकर एक नाम रखा हलधर साहू ।

हलधर बचपन से ही अध्यात्म की तरफ ही चल पड़े थे। एक बार गांव के ही तालाब के पास बगल में स्थित एक शिव मंदिर है वहां
हलधर लगातार 7 दिनों तक तपस्या में लीन रहते थे। उनके माँ बाप और गांव वालों ने उन्हें बहुत है समझाया लेकिन वह घर लौटे तो जरूर, मगर एक तरह से उनके मन मस्तिष्क में स्वयं शिव उनके भीतर विराज चुके थे।

14 साल की उम्र में एक दिन वे स्कूल जाने के लिए बस्ता को ले कर निकले मगर वह स्कूल नही गया। सफेद शर्ट और खाकी हाफ पैंट के स्कूल ड्रेस में ही वह रायगढ़ की ओर जाने लगे। अपने गांव से लगभग 19 किलोमीटर दूर और रायगढ़ से सट कर स्थित कोसमनारा वो पैदल ही पहुचे गए। कोसमनारा गांव से कुछ दूर पर एक बंजर जमीन था।उस जमीन में उन्होंने कुछ पत्थरो को इकट्ठा कर वह पत्थर को वह एक शिवलिंग का रूप दिया और अपनी जीभ काट कर उस शिवलिंग को समर्पित कर दिया। कुछ दिन तक वह किसी को पता नही चला लेकिन धीरे से पता चलने जंगल मे आग की तरह खबर फैली तो इस जगह पर लोगों का भीड़ उमड़ पड़ा।

हमने यूट्यूब सत्यनारायण बाबा का का वीडियो बनाया है जिसे देखे और चैनल को जरूर सब्सक्राइब करे।

Youtube channel – dk808 

बाबाधाम के ऊपर से उड़ते देखा गया है सांप। वीडियो को जरूर देखे

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give information about Baba Satyanarayan located in Kosamnar, Raigad district of Chhattisgarh.

Baba Satyanarayan Kosamnara, Raigarh

Address – Friends, this Satyanarayan Baba is sitting in a place in Deori, Dumarpali, about 19 kms from Kosmanara in Raigad district of Chhattisgarh.

Hathayogi – Friends, whether it is hot or cold, Baba Ji remains absorbed in the same posture of Hatha Yoga. Since February 16, 1998, 19 years have passed since Baba Satyanarayana, who was absorbed in penance, did this hatha yoga.

At the age of 14 – friends Satyanarayan Baba ji has been absorbed in penance since the age of 14.

Birth of Baba Ji – Friends, Satyanarayan Baba Ji was born on 12 July 1984.

Mother and Father’s Name – Friends Satyanarayan Baba’s father’s name is Dayanidhi Sahu and mother’s name is Hansmati Sahu.

Under the open sky – Friends, Satyanarayan Baba of Kosmanara remains absorbed in penance by staying under the open sky.

Childhood Name – Baba Ji’s childhood name was Haldhar Sahu. Who later came to be known as Baba Satyanarayan.

Snake seen flying – Snake seen flying from above the temple of Baba Dham In this place Baba Satyanarayana is absorbed in rigorous penance.

Baba’s diet – Baba Satyanarayana wakes up in severe penance, then takes milk, but when does Baba take milk?No one knows.

Akhand Dhuni – After a week a servant requested Baba to ignite the fire Dhuni, which continues to burn in the form of Akhand Dhuni even today.

Spiritual Child – Friends, since childhood, Baba ji was a spiritual child. Since childhood, he had walked alone towards spirituality.

Infinite Power – Satyanarayan Baba of Kosmanara has some infinite powers, due to which he remains absorbed in severe penance.

It is wonderful that Satyanarayan Baba of Kosmanara – when Satyanarayan Baba rises from the samadhi, no one has been able to know what he eats and when. Baba does not talk, but when he breaks meditation, he communicates to the devotees only in gestures. Even today, Satyanarayan Baba remains absorbed in severe penance.There is almost every arrangement in Kosmanara for the devotees who have darshan of Baba Satyanarayan, who made the land of Raigad a pilgrimage site, but Baba has also forbidden to shade his own head. Even today Baba ji’s harsh penance continues.

In Mahashivratri – A fair is also organized here on Mahashivratri festival in Baba Dham, thousands of people throng to see Satyanarayan Baba.

Story of Satyanarayan Baba – According to the belief, a child was born on 12 July 1984 in the family of a simple farmer Dayanidhi Sahu and Hansmati Sahu in Deori, Dumarpali, 19 km from Kosamnara, the mother and father together named Haldhar Sahu.Haldhar had started towards spirituality since childhood. Once there is a Shiva temple situated next to the pond of the village itself Haldhar used to be absorbed in penance for 7 consecutive days. His parents and villagers explained to him a lot, but he must have returned home, but in a way, Shiva himself had resided within him in his mind.One day at the age of 14, he went to school with Basta, but he did not go to school. Dressed in a white shirt and khaki half pants, he started going towards Raigad. He reached Kosamnara, about 19 km from his village and adjacent to Raigad, on foot. Some distance from the village of Kosmanara was a barren land In that land, he collected some stones and gave that stone the form of a Shivling and cut his tongue and dedicated it to that Shivling. No one came to know about it for a few days, but when the news spread like a fire in the forest to know slowly, there was a crowd of people at this place.

We have made a video of youtube satyanarayan baba, watch it and subscribe to the channel.

Youtube channel – dk808 

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jai johar jai Chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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