प्राचीन पश्चिमाभिमुखी मंदिर,सिद्धेश्वर शिव मंदिर, पलारी(छ.ग)

हेलो दोस्तों मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको सिद्धेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी देने वाला हूं।

   सिद्धेश्वर मंदिर, पलारी (जिला – बलौदा बाजार – भाटापारा)

पता – यह राजधानी रायपुर से बलौदा बाजार रोड पर लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित पलारी ग्राम में बालसमुंद तालाब के तट बंध पर यह सिद्धेश्वर शिव मंदिर स्थित है।

गर्भ गृह – मंदिर के गर्भगृह मे सिद्धेश्वर नामक शिवलिंग विराजमान है। जिनके दर्शन मात्र से भक्तो की मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

मंदिर का निर्माण –सिद्धेश्वर मंदिर का निर्माण लगभग 7-8 वीं श ती ईस्वी में हुआ था।माना जाता है कि मंदिर का निर्माण छैमासी रात में किया गया है तथा तालाब की खुदाई भी इसी दौरान की गई थी।

पश्चिमाभिमुखी मंदिर –सिद्धेश्वर मंदिर प्राचीन पश्चिमाभिमुखी मंदिर है।

प्राचीन पश्चिमाभिमुखी मंदिर,सिद्धेश्वर शिव मंदिर, पलारी(छ.ग)

ईटो से निर्मित मंदिर – पलारी का यह मंदिर ईटो से निर्मित प्राचीन शिव मंदिर हैं ।

द्वारशाखा – इस मंदिर की द्वारशाखा पर नदी देवी गंगा एवं यमुना
त्रिभंग मुद्रा में खड़ी हुई है।

द्वार के सिरदल पर – सिद्धेश्वर मंदिर के द्वार के सिरदल पर त्रिदेवो का अंकन है।

सुंदर दृश्य – मंदिर पर शिव विवाह दृश्य का सुंदर ढ़ंग से मंदिर की दीवारों पर उकेरा गया है।

प्राचीन पश्चिमाभिमुखी मंदिर,सिद्धेश्वर शिव मंदिर, पलारी(छ.ग)

मंदिर का शिखर भाग – सिद्धेश्वर मंदिर के शिखर का भाग कीर्तिमुख, गजमुख एवं व्याल की आकृतियों से अलंकृत है।

उत्तम नमूना – छत्तीसगढ़  के ईट निर्मित मंदिरों का यह उत्तम नमूना है।

पंचस्थ शैली  –  सिद्धेश्वर मंदिर का गर्भगृह पंचस्थ शैली का है ।

पुरातात्विक विभाग की देख रेख में यह मंदिर – पलारी का सिद्धेश्वर मंदिर प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक दृष्टि से अधिनियम 1964 तथा 65 के अधीन राज्य द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया हैं।

प्राचीन पश्चिमाभिमुखी मंदिर,सिद्धेश्वर शिव मंदिर, पलारी(छ.ग)

मेले का आयोजन – इस मंदिर में प्रति वर्ष माघ पूर्णिमा के दिन भव्य मेले की आयोजन किया जाता है।

नागर शैली में निर्मित मंदिर – पलारी का यह शिव मंदिर नागर शैली में निर्मित है।

मूर्तिकला के प्रमुख केंद्र –गुप्तकाल में मथुरा, सारनाथ, नालंदा, अमरावती आदि मूर्तिकला के प्रमुख केंद्र थे।

कलाशैली की दृष्टि से –पलारी का यह सिद्धेश्वर मंदिर कलाशैली की दृष्टि से 900 ई. का माना जाता  है।

बालसमुंद तालाब – सिद्धेश्वर मंदिर के पास में एक तालाब है जिसे बालसमुंद तालाब कहा जाता है । इस तालाब में हमेशा पानी रहता है। यह भी कहा जाता है कि भमनीदहा का स्रोत बालसमुंद तक आया है इसलिए इस तालाब का पानी कभी नहीं सूखता है।

मंदिर का जीर्णोद्धार- सिद्धेश्वर मंदिर को बृजलाल वर्मा(भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री) ने सन् 1960-61 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। 

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                                                             !! जय जोहार जय छत्तीसगढ़ !!

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