तालाब से प्रकट होने के कारण माता का नाम पड़ा गंगा मैया, झलमला, बालोद (छ.ग)

                   गंगा मैया झलमला (बालोद)

पता – बालोद जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी पर ग्राम झलमला में स्थित है गंगा मैया का भव्य एवं प्रसिद्ध मंदिर ।

गर्भ गृह – झलमला के प्रसिद्ध गंगा मैया मंदिर के गर्भ गृह में मां गंगा मैया की सुन्दर प्रतिमा विराजमान हैं।

मां गंगा मैया की बड़ी बहन – मां गंगा मैया गर्भ गृह के सामने में ही मां गंगा मैया की बड़ी बहन का एक छोटा सा मंदिर है। जिसमे उनकी बड़ी बहन उस मंदिर में विराजमान हैं।

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नवरात्रि पर्व में –  गंगा मैया मंदिर में नवरात्रि के पावन पर्व में भक्तो की भारी भीड़ गंगा मैया के दर्शन करने के लिए दूर दूर से आते है।
मंदिर प्रांगण में ही अन्य देवी देवताओं की झांकी बनाया गया है जो केवल नवरात्रि पर्व के नौ दिन ही खुले रहते हैं।

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मनोकामना ज्योति – हर साल चैत्र व क्वांर नवरात्रि में नौ दिनों तक गंगा मैया मंदिर परिसर में भक्तो के द्वारा मनोकामना ज्योति प्रज्जवलित कि जाती है। जिसे देखने के लिए श्रद्धालु यहां कोने – कोने से आते है।

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मन्नतों के नारियल –  श्रद्धालु अपने मन्नत के श्री फल को मनोकामापूर्ति के लिए गंगा मईया के मंदिर प्रांगण में ही बांधते हैं।

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गंगा मैया धर्म मंच – गंगा मईया मंदिर  परिसर में ही सुंदर सा गंगा मैया धर्म मंच बनाया गया है जो लोगों की समस्या और किसी भी बात के विषय में  चर्चा एवं बैठक कि बात को इस धर्म मंच में अपनी अपनी बात को रखते हैं।

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सुन्दर उद्यान का निर्माण – श्रद्धालु गंगा मैया के दर्शन करने के बाद इस सुन्दर उद्यान का आनंद लेने के लिए जाते हैं।

पर्यटक स्थल – गंगा मैया का मंदिर एक सुन्दर पर्यटक स्थल जो पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करता है।

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हवन कुंड – मंदिर के पास में ही एक हवन कुंड का निर्माण किया गया है। विशेष अवसर में यहां हवन व यज्ञ करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

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झलमला के गंगा मैया की कहानी –किवंदती के अनुसार एक दिन ग्राम सिवनी का एक केवट मछली पकडऩे के लिए तालाब में गया।और वह मछली पकड़ने में लग गया फिर एक बार अपना जाल तालाब में फेका तो मछली कि जगह जाल में एक पत्थर की प्रतिमा फंस गई। केंवट ने उसे साधारण पत्थर समझ कर फिर से तालाब में डाल दिया। यह प्रक्रिया के कई बार होती रही वह केवट परेशान होकर जाल लेकर अपने घर की ओर चल पड़ा।

गोंड़ जाति के बैगा को माता जी ने स्वप्न में आकर कहा कि मैं जल के अंदर पड़ी हूं। मुझे जल से निकालकर मेरी प्राण-प्रतिष्ठा करवाओ। तभी बैगा ने अपनी बात मालगुजार के सामने अपनी बात रख दिया। तभी मालगुजार ने बैगा केंवट और गांव के अन्य प्रमुख लोगों को साथ लेकर तालाब में गया। तब केंवट ने फिर से जाल को तालाब में फेंके जाने पर वही पत्थर की प्रतिमा फिर जाल में फंस गई। फिर उस प्रतिमा को बाहर निकाला गया, उसके बाद देवी के आदेशानुसार प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई। तब इस जल से प्रतिमा निकली होने के कारण इस प्रतिमा को गंगा मैया के नाम से प्रसिद्ध हुई।

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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