छत्तीसगढ़ का धरोहर पुरखौती मुक्तांगन purkhouti muktangan naya raipur chhattisgarh

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

हैलो दोस्तों मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको नया रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन के बारे जानकारी देने वाले हूं। जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे।

पुरखौती मुक्तांगन, रायपुर छत्तीसगढ़

पता – रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग25 किलोमीटर की दूरी  पर स्थित है पुरखौती मुक्तांगन।

छत्तीसगढ़ का धरोहर -पुरखौती मुक्तांगन एक ऎसा स्थान है जहां आपको छत्तीसगढ़ के लगभग सभी धार्मिक, ऎतिहासिक,और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का कृत्रिम बनावट देखने को मिल जाएगा और साथ ही आप छत्तीसगढ़ कला और संस्कृति का भी दर्शन कर सकते हैं।

प्रवेश गेट – पुरखौती मुक्तांगन के प्रवेश गेट के सामने सुंदर सुन्दर चित्रकारी दीवारों पर किये गए हैं जो इस पुरखौती मुक्तांगन को और भी चार चांद लगा देता है।

200 एकड़ – पुरखौती मुक्तांगन 200 एकड़ भूमि में फैला हुआ है।

कला संस्कृति- पुरखौती मुक्तांगन छत्तीसगढ़ कि कला- संस्कृति कि एक अलग पहचान बनाती है।

छत्तीसगढ़ का धरोहर पुरखौती मुक्तांगन purkhouti muktangan naya raipur

उद्घाटन- भारत के राष्टपति डॉ ए.पी.जे.अब्दुल कलाम द्वारा 7 नवम्बर 2006 को पुरखौती मुक्तांगन का उद्घाटन किया था।

जीवंत संग्रहालय – कला संस्कृति का जीवंत संग्रहालय पुरखौती मुक्तांगन’ को कहा जाता है।

पर्यटन केंद्र – पुरखौती मुक्तांगन एक सुंदर पर्यटन केंद्र है।

आकर्षण का केंद्र – पुरखौती मुक्तांगन पर्यटको के लिए भी आकर्षण का केंद्र बिंदु है जो पर्यटको को अपनी ओर आने के लिए आकर्षित करती है।

परंपरागत चित्रकारी- पुरखौती मुक्तांगन के दीवारों पर छत्तीसगढ़ की परंपरागत चित्रकारी से लोक-कथाओं को और भी प्रदर्शित करती हैं।

कला तीर्थ – पुरखौती मुक्तांगन में एक ही जगह में कला तीर्थ के रूप में प्रदर्शित किया गया है।

प्रथम चरण – पुरखौती मुक्तांगन के प्रथम चरण में वनवासी आदिवासी के आखेट दृश्य एवं लोक –नृत्य और लोक संगीत के साथ मूर्ति शिल्प का सुंदर दृश्य बनाया गया है।

आदिवासी चित्रकलाएं – बस्तर के पारम्परिक जीवन रीतियों और सुंदर त्योहार, बस्तर की कला को भी पुरखौती मुक्तांगन में प्रदर्शित किया गया है।

ढोलक गणेश की एक झलक – बस्तर के प्रसिद्ध ढोलक गणेश की प्रतिमा को रायपुर के इस पुरखौती मुक्तांगन में देख सकते हैं देखने से ऎसा लगता है कि मानों हम बस्तर में ही पहुंच कर इस दृश्य को देख रहे हैं।

छत्तीसगढ़ का धरोहर पुरखौती मुक्तांगन purkhouti muktangan naya raipur

प्राचीन मंदिरों का सुंदर दुश्य – छत्तीसगढ़ के प्राचीन मंदिर को भी इस पुरखौती मुक्तांगन में निर्माण किया गया है। जैसे बस्तर के गणेश प्रतिमा, भोरमदेव मंदिर, ताला गांव के रुद्रशिव की प्रतिमा है,।

स्वतंत्रता सेनानियों के प्रतिमाएं- पुरखौती मुक्तांगन में स्वतंत्रता सेनानियों के भी प्रतिमाएँ देखने को मिलती है ।

पारम्परिक नृत्य – छत्तीसगढ़ के पारम्परिक नृत्य में सुआ नृत्य, राऊत नाचा,पंथी नृत्य, और आदिवासी लोगो करमा नृत्य और शैला नृत्य भी पुरखौती मुक्तांगन में इन सभी की एक झलक दिखाई देती हैं।

शिकार खेलते हुए – आदिवासी लोग अपने तीर कमान से जंगली जानवरों का शिकार किया करते थे इनका दृश्य भी पुरखौती मुक्तांगन में देखने को मिलेगा।

बस्तर का दशहरा उत्सव – बस्तर के पारम्परिक दशहरा पर्व में पहले दिन के रथ को बनाया जाता है ठीक उसी प्रकार से इस रथ के दृश्य को पुरखौती मुक्तांगन में भी बनाया गया हैं।

घोटूल – बस्तर के माडिया जनजाति का पारंपरिक संस्कृतिक केंद्र है।

नारायण पाल मंदिर – नाग राजाओं के द्वारा 12 वी सदी ईसवी में निर्मित मंदिर।

माता गुडी – ग्राम देवी देवताओं का पारंपरिक पूजा स्थल।

सींग देउढी – जगदलपुर के राजमहल का सिंग देउढी सियासती स्थापत्य कला का सुंदर नमूना है।

बुद्ध विहार – मैनपाट में बुद्ध विहार की सुंदर मंदिर है जिसे पुरखौती मुक्तांगन में हूबहू वैसा ही बुद्ध विहार का भी मंदिर बनाया गया है।

आमचो बस्तर- आमचो बस्तर’ नाम से  प्रसिद्ध है बस्तर की जीवन शैली और संस्कृति के पुरखौती मुक्तांगन में जीवंत दर्शन होते हैं।

गार्डन का निर्माण – पुरखौती मुक्तांगन में एक सुंदर सा गार्डन और पेड़ पौधे निर्माण किया गया है जिससे कुछ देर तक पर्यटक यहां बैठा कर इस गार्डन का आनंद लेते हैं ।

भित्ति चित्र – पुरखौती मुक्तांगन में श्रीमति सोना बाई रजवार को इस पैतृक संग्रहालय के लिए छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन पर आधारित भित्ति चित्र बनाने हेतु खास तौर से आमंत्रित किया गया था। इन भित्ति चित्रों में घरों को बड़ी बारीकी से दर्शाया गया है। सभी घर के मुख्य द्वार पर चौखट सुंदर रंगों और सुंदर चित्रकारी  से सजायी गयी है। जिसे देखने से पूराने घरों की याद आ जाती हैं।

पुरातात्विक स्थल – छत्तीसगढ़ के धरोहरों में शामिल हैं खजुराहों का प्राचीन भोरमदेव मंदिर जिसे इस पुरखौती मुक्तांगन में उसी तरह का मंदिर बनाया गया है ऎसा लगता है कि हम इस भोरमदेव मंदिर का दर्शन कर रहे हैं।

धरोहर – छत्तीसगढ़ के पुरानी परम्परा एवं रहन सहन के तरीके एवं वेश भूषा और सांस्कृतिक त्यौहार का सुंदर दृश्य इस
पुरखौती मुक्तांगन में संजोकर रखा गया है।

आवश्यक सूचना -पुरखौती मुक्तांगन पर्यटको के लिए सोमवार को अवकाश रहता है उस दिन यह पुरखौती मुक्तांगन बंद रहता है। और बाकी दिन यह पुरखौती मुक्तांगन पर्यटनों के लिए खुला रहता है।

हमने यूट्यूब में पुरखौती मुक्तांगन  का वीडियो बनाया है जिसे देखे और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर दे-

Youtube channel – hitesh kumar hk

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!! जय जोहार जय छत्तीसगढ़ !!

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post, I am going to give you information about Pukhuti Muktangan of Naya Raipur. If you like the information, then please comment and share.

Purakhoti Muktangan, Raipur Chhattisgarh

Address – Purakhoti Muktangan is located at a distance of about 25 km from Raipur railway station.

Heritage of Chhattisgarh – Pukhuti Muktangan is one such place where you will get to see the artificial design of almost all the religious, historical, and natural tourist places of Chhattisgarh and you can also see the art and culture of Chhattisgarh.

200 acres – Purakhoti Muktangan is spread over 200 acres of land.

Art Culture – Purakauti Muktangan creates a distinct identity of art culture in Chhattisg

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Inauguration- Purakhoti Muktangan was inaugurated on 7 November 2006 by Dr. APJ Abdul Kalam, President of India.

Lively Museum – Lively Museum of Art Culture is called Purakhoti Muktangan.

Tourist Center – Purakhoti Muktangan is a beautiful tourist center.

Traditional Painting – The Purakhoti displays folk tales more than the traditional painting of Chhattisgarh on the walls of Muktangan.

Kala Tirtha – Purakhoti is displayed in the same place in Muktangan as Kala Tirtha.

First Phase – In the first phase of Purakhoti Muktangan, a beautiful scene of the idol craft has been made with the last scene and folk dance and folk music of Vanvasi tribal.

Tribal paintings – The traditional life rituals and beautiful festivals of Bastar, the art of Bastar have also been displayed in Purakhoti Muktangan.

A glimpse of Dholak Ganesh – One can see the statue of the famous Dholak Ganesh of Bastar at this Pukhuti Muktangan in Raipur. It seems as if we are reaching this place in Bastar and seeing this scene.

Beautiful view of ancient temples – The ancient temple of Chhattisgarh has also been constructed in this ancestor Muktangan. Such as the Ganesh idol of Bastar, the Bhoramdev temple, the idol of Rudrasiva of Tala village.

Statues of freedom fighters- Statues of freedom fighters are also seen in Pukhuti Muktangan.

Traditional dance – The traditional dance of Chhattisgarh includes Sua dance, Raut Nacha, Panthi dance, and tribal logos Karama dance and Shaila dance are also a glimpse of all these in Purakhoti Muktangan.

While playing hunting – tribal people used to hunt wild animals with their arrows, their scene will also be seen in Pukhuti Muktangan.

Bastar Dussehra Festival – In the traditional Dussehra festival of BastarThe chariot of the first day is made in exactly the same way, the scene of this chariot is also made in Purakhoti Muktangan.

Ghotool – is the traditional cultural center of the Madia tribe of Bastar.

Narayan Pal Temple – Temple built by Naga Kings in the 12th century AD.

Mata Gudi – The traditional place of worship of village deities.

Horn Deudi – Sing Deudi of Rajmahal in Jagdalpur is a beautiful specimen of Siyasati architecture.

Buddha Vihar – There is a beautiful temple of Buddha Vihar in Mainpat, which is exactly the same as the temple of Buddha Vihar in Purakhoti Muktangan.

Amcho Bastar – Amcho Bastar is famous by the name of Bastar’s lifestyle and culture, Muktangan lively philosophy.

Construction of Garden – A beautiful garden and tree plant have been constructed in Purakhoti Muktangan so that tourists sit here and enjoy this garden for some time.

Mural paintings – Mrs. Sona Bai Rajwar in Purakhoti Muktangan was specially invited to make murals based on rural life of Chhattisgarh for this ancestral museum. These murals depict houses very closely. The door frame at the main entrance of all the houses is decorated with beautiful colors and beautiful painting. Which reminds us of old homes.

Archaeological sites – The heritage of Chhattisgarh includes the ancient Bhoramdev temple of Khajuraho which has been built in the same kind of temple in this ancestor Muktangan, it seems that we are visiting this Bhoramdeo temple.

Heritage – A beautiful view of Chhattisgarh’s old tradition and way of living and dress and the cultural festival is kept in this Pukhouti Muktangan.

Important information – Monday is a holiday for the tourist Muktangan Tours, on that day this Purkotti Muktangan is closed. And the rest of the day is open for Pukhuti Muktangan tours.

You have made a video of Pukhuti Muktangan in YouTube, watch it and subscribe to the channel –

Youtube channel – hitesh kumar hk

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Jai Johar Jai Chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा और अन्य रहस्यमय जगह के बारे इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे।

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