छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य chhattisgarh ke lok nritya

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।हैलो दोस्तों मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य के बारे जानकारी देने वाला हूं। जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे।

छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य

01) सुआ नृत्य – सुआ नृत्य को गौरा नृत्य भी कहते हैं।यह महिलाओं द्वारा गाया जाता है। दीपावली के कुछ दिन पूर्व शुरू होता है और समापन दीपावली के साथ में शिव पार्वती के विवाह के साथ समापन होता है।सुआ नृत्य प्रतीक स्वरूप मिट्टी के दो तोते रख के गाया जाता है व उसके चारों ओर घुमकर नृत्य किया है।

02) पंथी नृत्य – पंथी नृत्य सतनाम पंथियों द्वारा किया जाता है किसी भी उत्सव या त्यौहार में पंथी नृत्य किया जाता हैंपुरुष और महिलाएँ दोनों के द्वारा यह नृत्य किया जाता है। जैतखाम की स्थापना करके उसके चारों ओर चक्कर लगाते हुए यह नृत्य किया जाता है।

03) राऊत नृत्य – इसे गहिरा नाच भी कहा जाता है।इसका प्रदर्शन शौर्यपरक होता है। कार्तिक प्रबोधनी एकादशी से शुरू होती है।नृत्य दौरान राऊत जातियों द्वारा पशुओं में सुहई बांधा जाता है। सुहई बांधना प्रायः गोवर्धन पूजा के दिन होता है छत्तीसगढ़ में बिलासपुर में प्रसिद्ध राऊत नृत्य का आयोजन किया जाता है और गड़वा बाजा के धुन पर नाचते हैं।

छत्तीसगढ़ में बिलासपुर प्रसिद्ध राऊत नृत्य का आयोजन किया जाता है और गड़वा बाजा के धुन पर नाचते हैं।

छत्तीसगढ़ के जनजातीय नृत्य

01) करमा नृत्य – प्रारंभ विजयादशमी से कर्म के देवता को प्रसन्न करने के लिए उरांव और बैगा जनजातियों द्वारा यह करमा नृत्यकिया जाता l करमा नृत्य सपूर्ण छत्तीसगढ़ में प्रचलित है।बैगाओं में प्रचलित कर्मा को ‘बैगानी कर्मा’ कहते हैं।

02) सैला या डंडा नृत्य – गोड और बैगा जनजातियों में प्रचलित है।प्रारंभ – कार्तिक शुक्ल एकादशी से फाल्गुन पूर्णिमा तक (दशहरा व धान की कटाई आरंभ) यह नृत्य सरगुजा जिला में प्रायः प्रचलित है।

03) बिलमा नृत्य – दशहरा के अवसर पर गौड़ और बैगा जनजातियों द्वारा किया जाता है।

04) ककसार नृत्य – यह नृत्य मुड़िया और अबुझमाड़िया जनजातियों में प्रचलित है। मूलतः यह एक पूजन नृत्य है जो लिंगोपेन देव (लिंगादेव) को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।

05) सरहुल नृत्य – यह नृत्य उरांव जनजाति में प्रचलित है।चैत्र पूर्णिमा में सरना देवी (साल वृक्ष) की पूजा की जाती है।

06) गौर नृत्य (माड़िया नृत्य) – यह नृत्य दण्डामी माड़िया जनजातियों में प्रचलित है। गौर (जंगली भैंस) या बायसन के सींग लगाकर नृत्य किया जाता है।गौर नृत्य को वेरियर एल्विन ने विश्व का सुंदर नृत्य कहा है। बस्तर दशहरा के जात्रा पर्व के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है।

07) दमनच नृत्य – पहाड़ी कोरवाओं द्वारा विवाह के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है। (करमा नृत्य के समान)

08) मांदरी नृत्य –मुड़िया जनजाति के युवागृह घोटुल का सर्वप्रमुख नृत्य है।

09) डंडारी नृत्य – बस्तर अंचल में होली के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है।

10) परब नृत्य – यह नृत्य धुरवा जनजाति में प्रचलित है। परब नृत्य एक सैनिक नृत्य है।धुरवा जनजाति जगदलपुर के आस-पास रहते हैं।

11) हुलकी पाटा – यह नृत्य मुड़िया जनजाति में प्रचलित है।

12) घोटुल पाटा – मुड़िया जनजाति के द्वारा मृत्यु के अवसर पर।

13) गेंड़ी नृत्य – बस्तर अंचल के मुड़िया आदिवासियों में प्रसिद्ध घोटुल के मुड़िया युवक, लड़की की गेड़ी पर अत्यंत तीव्र गति से नृत्य करते हैं, जिसे ‘डिटॉग कहतेे है। इसमें केवल पुरुष शामिल होते हैं।

14) दोरला नृत्य – दोरला जनजाति द्वारा विवाह में ‘पेंदुल नृत्य’ एवं पर्वों में ‘पंडुम नृत्य’ करने परम्परा है।

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।।जय जोहार जय छत्तीसगढ।।

Hello friends, my name is Hitesh Kumar. In this post, I am going to give you information about the folk dance of Chhattisgarh. If you like the information, then please comment and share.

Chhattisgarh folk dance

01) Sua dance – Sua dance is also called Gaura dance. It is sung by women. Starts a few days before Deepawali and concludes with the marriage of Shiva Parvati with the end of Deepawali. The dances are sung and danced around it with two earthen parrots in the form of a dance symbol.

02) Panthi Dance – Panthi dance is performed by Satnam Panthists Panthi dance is performed in any festival or festival. This dance is performed by both men and women. This dance is performed by setting up Jaitkham and circling around it.

03) Raut Nritya – also called Gahira Nach. Its performance is heroic. Kartik Prabodhani begins on Ekadashi. During the dance Suhai is tied in the animals by the Raut castes. Suhai tying usually happens on the day of Govardhan Puja, the famous Raut dance is organized in Bilaspur in Chhattisgarh and dances to the tune of Gadwa Baja.

Bilaspur famous Raut dance is organized in Chhattisgarh and dances to the tune of Garwa Baja.

Tribal dance of chhattisgarh

01) Karma Dance – This Karma dance is performed by the Oraon and Baiga tribes to appease the deity of Karma from the beginning Vijayadashami. The Karma dance is practiced in entire Chhattisgarh. The Karma prevalent in the Baigas is called ‘Bagani Karma’.

02) Saila or Danda dance – is practiced in the God and Baiga tribes. Commencement – from Kartik Shukla Ekadashi to Phalgun Purnima (Dussehra and paddy harvesting) This dance is often practiced in Sarguja district.

03) Bilma dance – performed by Gaur and Baiga tribes on the occasion of Dussehra.

04) Kaksar Dance – This dance is practiced among the Mudiya and Abujhmadia tribes. Originally it is a worship dance performed to please Lingopen Dev (Lingadeva).

05) Sarhul Dance – This dance is practiced in the Oraon tribe. Sarna Devi (Sal tree) is worshiped on Chaitra Purnima.

06) Gaur Dance (Madiya Dance) – This dance is practiced among the Dandami Madia tribes. Gaur (wild buffalo) or bison is danced with horns. Gore dance is called the beautiful dance of the world by Varrier Alvin. This dance is performed on the occasion of Jatra festival of Bastar Dussehra.

07) Damanach Dance – This dance is performed by the hill Korvas on the occasion of marriage. (Similar to Karma Dance)

08) Mandari dance – is the most important dance of Ghotul, the youth house of the Mudia tribe.

09) Dandari Dance – This dance is performed on the occasion of Holi in Bastar Zone.

10) Parab Dance – This dance is practiced in the Dhurva tribe. Parab dance is a military dance. Dhurwa tribes live around Jagdalpur.

11) Hulki Pata – This dance is practiced in Mudia tribe.

12) Ghotul Pata – On the occasion of death by Mudia tribe.

13) Gendi Dance – Mudia youths of Ghotul, famous among the Mudia tribals of Bastar region, dance with great speed on the girl’s girdi, which is known as the ‘ditog’. It consists of men only.

14) Dorla Dance – There is a tradition of ‘Pendul Nritya’ in marriage and ‘Pandum Nritya’ in festivals by Dorla tribe.

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Jai johar jai chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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