चित्रसेन साहू भारत का प्रथम डबल अम्पुटी पर्वतारोही lChitrasen Chitrasen Sahu First Double Amputee Mountaineer

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको छत्तीसगढ़ के चित्रसेन साहू जिनके दोनो पैर नही होते हुए भी रच दिया इतिहास।

चित्रसेन साहू भारत का प्रथम डबल अम्पुटी पर्वतारोही

छत्तीसगढ़ के युवा (राज्य के ब्लेड रनर, ‘हाफ ह्यूमन रोबो’ के नाम से प्रसिद्ध )चित्रसेन साहू ने कृत्रिम पैरो की मदद से फतह किया यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस 5642 मीटर।

पर्वतारोहण की जानकारी –

कैंपेन – मिशन इंक्लुसन “अपने पैरों पर खड़े हैं”

स्थान – यूरोप महाद्वीप

देश– रूस

पर्वत – माउंट एलब्रुस

ऊंचाई – 5642 मीटर (18510 फीट

Summit 23-08-21

समय – 10:54बजे सुबह (मास्को समयानुसार)

दोनो पैर नही होते हुए भी रच दिया इतिहास – दोस्तो सात साल पहले एक ट्रेन दुर्घटना में अपना दोनों पैर खो चुके चित्रसेन साहू ने जिंदगी के आगे घुटने नहीं टेके। पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा की कहानी पढ़कर उनका हौसला बढ़ा और वे अपनी शर्तों पर जिंदगी जीते रहें।

देश के प्रथम डबल अम्पुटी पर्वतारोही – चित्रसेन साहू ने दिनांक 23 अगस्त को सुबह 10:54 बजे(मास्को के समयानुसार)(1.24pm भारतीय समयानुसार) माउंट एलब्रुस पर भारतीय तिरंगा लहराया,इसके साथ 3 महाद्वीप के उच्च शिखर पर पहुंच कर देश के प्रथम डबल अम्पुटी पर्वतारोही गौरव प्राप्त किया।

कहा पर है ये पर्वत – दोस्तो चित्रसेन साहू ने जिस पर्वत में देश का तिरंगा लहराया ओ पर्वत रुस में स्थित है यह पर्वत जिसकी ऊंचाई है 5642 मीटर(18510 feet)

संदेश – चित्रसेन साहू ने पर्वत की चोटी से दिया दुनिया को मिशन इंक्लूसन और प्लास्टिक फ्री का संदेश।

चित्रसेन साहू कहा के रहने वाले है – दोस्तो 27 साल के चित्रसेन साहू मूलरूप से अम्बिकापुर के रहने वाले हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई बालोद जिले के बेलौदी गांव में हुई। 2014 में उन्होंने बिलासपुर के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

पहले की उपलब्धि – इससे पूर्व चित्रसेन साहू ने माउंट किलिमंजारो और माउंट कोजीअस्को फतह कर नेशनल रिकॉर्ड कायम किया था । माउंट किलिमंजारो अफ्रीका महाद्वीप एवम माउंट कोजिअसको ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप की सबसे ऊंची पर्वत है।
चित्रसेन यह उपलब्धि हासिल करने वाले देश के प्रथम डबल एंप्यूटी है।

समस्याओं का सामना – चित्रसेन साहू ने बताया कि दोनों पैर कृत्रिम होने की वजह से पर्वतारोहण में बहुत कठिनाइयां आती है और यह अपने आप बहुत बड़ा चैलेंज है, जिसको उन्होंने स्वीकार किया है ।

लक्ष्य – चित्रसेन साहू का लक्ष सात महाद्वीप के साथ शिखर फतह करना है।जिसमे से एलब्रुस के साथ 3 लक्ष्य उन्होंने फतह कर लिया है। हालाकि -15 से -25 तापमान के साथ पर्वतारोहण करना और 50-70 किमी प्रति घंटा के रफ्तार से हवाई तूफान तथा स्नो फाल इस अभियान में कठिनाई से भरा होता है।

पर्वतारोहण में सहयोग – छत्तीसगढ़ की अमेरिका स्थित एन आर आई संस्था नाचा (नॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन) ने इस पर्वतारोहण अभियान को सहयोग किया। सात समुंदर पार अमेरिका के इस संस्था चित्रसेन साहू के उपलब्धि को पूरे देश के लिए गौरव बताई गई तथा आगामी अभियान के शुभकामनाएं दी।

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़़

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to tell you the history of Chitrasen Sahu of Chhattisgarh, who did not have both legs.

Chitrasen Sahu india First Double Amputee Mountaineer

mountaineering information

Campaign – Mission Inclusion “Stand on Your Feet.

Location – continent of Europe

Height – 5642 m (18510 ft)

Summit 23-08-21

Time – 10:54 am (Moscow time)

Despite not having both legs, history was created – Friends, Chitrasen Sahu, who lost both his legs in a train accident seven years ago, did not bow down before life. Reading the story of mountaineer Arunima Sinha encouraged her and she lived life on her own terms.

The country’s first double amputee climber – Chitrasen Sahu hoisted the Indian tricolor on Mount Elbrus on 23rd August at 10:54 am (Moscow time) (1.24 pm Indian time), with it reaching the highest peak of 3 continents and the country’s first Received double amputee climber distinction.

Where is this mountain? Friends, the mountain in which Chitrasen Sahu hoisted the tricolor of the country is located in Russia, this mountain whose height is 5642 meters (18510 feet)

Chitrasen Sahu is a resident of – Friends, 27 years old Chitrasen Sahu is originally from Ambikapur. He did his schooling in Belodi village of Balod district. In 2014, he studied civil engineering from Government Engineering College, Bilaspur.

Message – Chitrasen Sahu gave the message of mission inclusion and plastic free to the world from the top of the mountain.

Where is Sahu from – Friends, 27-year-old Chitrasen Sahu is originally from Ambikapur. He did his schooling in Belodi village of Balod district. In 2014, he studied civil engineering from Government Engineering College, Bilaspur.

Earlier Achievement – Earlier Chitrasen Sahu had set a national record by conquering Mount Kilimanjaro and Mount Kojiasco. Mount Kilimanjaro is the highest mountain in the continent of Africa and Mount Kosciuszko is the highest mountain in the continent of Australia.Chitrasen is the first double amputee of the country to achieve this feat.

Problems faced – Chitrasen Sahu told that due to both legs being artificial, there is a lot of difficulty in mountaineering and it is a big challenge in itself, which he has accepted.

Goal – Chitrasen Sahu’s goal is to conquer the summit with seven continents. Out of which he has conquered 3 goals with Elbrus. However, mountaineering with -15 to -25 temperatures and wind storms and snowfalls at 50-70 kmph is difficult in this expedition.

Cooperation in mountaineering – NRI organization NRI of Chhattisgarh, NACHA (North America Chhattisgarh Association) supported this mountaineering expedition. The achievement of Chitrasen Sahu, an organization of America across the seven seas, was described as a matter of pride for the whole country and best wishes for the upcoming campaign.

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jai johar Jai chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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