महिलाएं अपने संतान की दीर्घायु के लिए रखती है यह हलषष्ठी व्रत l harchhath vrat halashti 2021

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मै आपको हलषष्ठी के बारे में जानकारी देने वाला हूं इस पर्व को (हरछठ) के नाम से जानते है आइए जानते है इस पर्व के बारे में विस्तार से ।

हरछठ व्रत (हलषष्ठी)

हलषष्ठी क्यों मनाया जाता है – दोस्तों इस पर्व में महिलाएं अपने संतान की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती है। जिसे हम हलषष्ठी के नाम से जानते है। ग्रामीण अंचलों में इस त्योहार को बड़े धूम धाम से मनाया जाता है।

यह त्यौहार कब मनाया जाता है – दोस्तों इस त्यौहार को हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल भादों के कृष्ण पक्ष की छठ को मनाया जाता है। कहा जाता है की इसी दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ (बलराम)का जन्म हुआ था।

हलषष्ठी के अनेक नाम – दोस्तों हलषष्ठी को लह्ही छठ, हर छठ, हल छठ, पीन्नी छठ या खमर छठ भी कहा जाता है। बलराम जी का मुख्य शस्त्र हल और मूसल है इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है एवं उन्हीं के नाम पर इस पावन पर्व का नाम हल षष्ठी पड़ा है।

पूजा की विधि – दोस्तों यह पूजा सभी पुत्रवती महिलाएं करती हैं। इस व्रत को पुत्रों की दीर्घ आयु और उनकी सुख वैभव के लिए किया जाता है। जिसमे प्रमुख रूप से लाई, चना, महुआ, गेहूं को चुकिया में रखकर प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है. हरछठ में बिना हल लगे अन्न और भैंस के दूध का उपयोग किया जाता है. इसके सेवन से ही व्रत का पारण किया जाता है.

हलषष्ठी व्रत की विशेषताएं

🔸महिलाएं अपने पुत्र के दीर्घायु होने और उन्हें असामयिक मौत से बचाने के लिए हरछठ या हलषष्ठी व्रत रखती हैं।

🔸हलषष्ठी के दिन माताओं को महुआ की दातुन और महुआ खाने का विधान है।

🔸महिलाएं इस दिन ऐसे खेत में पैर नहीं रखतीं, जहां फसल पैदा होनी हो ।

🔸हलषष्ठी के दिन गाय के दही या दूध का सेवन करना नही किया जाता है।

🔸हलषष्ठी के दिन हल पूजा का विशेष महत्व रहता है। इसके बिना यह पूजा अधूरा माना जाता है

🔸हलषष्ठी के दिन महिलाएं दिनभर अपने पुत्र के लिए निर्जला व्रत रखने के बाद शाम के समय पसही के चावल और महुए
का लाटा बनाकर ग्रहण करने की मान्यता है l

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give you information about Halashti, this festival is known by the name of (Harchhath), let’s know about this festival in detail.

Harchhath Vrat (Halashti)

Why Halashti is celebrated – Friends, in this festival, women keep this fast for the longevity of their children. Which we know by the name of Halashti. In rural areas, this festival is celebrated with great pomp.

When is this festival celebrated – Friends, this festival is celebrated every year on the Chhath of Krishna Paksha of Bhadon according to the Hindu calendar. It is said that on this day Lord Krishna’s elder brother Baldau (Balram) was born.

Many names of Halashti – Friends, Halashti is also called Lahi Chhath, Har Chhath, Hal Chhath, Pinni Chhath or Khamar Chhath. The main weapon of Balram ji is the plow and the pestle, hence he is also called Haldhar and this holy festival is named Hal Shashthi after him.

Method of worship – Friends, this worship is done by all the daughter-in-law women. This fast is observed for the long life and happiness of the sons. In which mainly Lai, Chana, Mahua, Wheat are kept in Chukia and offered as Prasad. Grain and buffalo milk are used in Harchhath. The fast is broken only by its consumption.

Features of Halashti Vrat

🔸Women observe Harchhath or Halashti fast for the longevity of their sons and to save them from untimely death.

🔸On the day of Halashti, there is a law for mothers to eat Mahua’s Datun and Mahua.

🔸On this day women do not set foot in a field where crops are to be grown.

🔸Cow’s curd or milk is not to be consumed on the day of Halashti.

🔸Plow worship has special significance on the day of Halashti. Without this this worship is considered incomplete.

🔸On the day of Halashti, women keep a fast for their sons throughout the day, after observing a fast for their sons, rice and mahua in the evening.It is believed to be accepted by making a latha.

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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