ढोकरा आर्ट क्या है । Dhokra art chhattisgarh lDhokra artl danteshwari temple Dantewada l tirathgarh jalprapat chhattisgarh l

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मै आपको ढोकरा कला के बारे में जानकारी देने वाला हूं यह जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे

ढोकरा कला dhokra Art

ढोकरा आर्ट – दोस्तो पीतल व कांसा को मिट्टी के सांचे में डाल आग पर तपाकर अद्वितीय आकृतियां तैयार करने की यह बेजोड़ कला ही ढोकरा आर्ट है।

ढोकरा कला कितना पुराना हैं – दोस्तो ढोकरा आर्ट सबसे प्रचलित आर्ट मे से एक हैं इसकी शूरुवात 4000 साल पहले हुआ था। इतिहासकार बताते हैं कि ढोकरा आर्ट हड़प्पा व मोहनजोदड़ो सभ्यता में भी पाये गये हैं।

ढोकरा कला बस्तर – दोस्तो ढोकरा आर्ट का काम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र मे गढ़वा और झारा जनजाति प्रमुख रूप से इस कार्य को करते है।इस क्षेत्र मे आदिवासी जनजाति निवास करते है जो मुख्य रूप से इस तरह के कला के ऊपर निर्भर होते हैl उनकी आय का एक साधन भी है और इस काम को सहेज के रखे हुए भी है!

ढोकरा आर्ट मे क्या क्या बनाया जाता है – दोस्तो ढोकरा आर्ट के अंतर्गत बहुत सारे मूर्तियों का निर्माण किया जाता हैवे मूर्ति किसी भी क्षेत्र मे हो सकता है जैसे घोड़े,हाथी,देवी देवताओं के मूर्ति, आदिवासी लोगो की मूर्ति जिसमे उनके संस्कृति की झलक हो, साथ ही घर की सजावट के समान भी बनाये जाते हैं!

ढोकरा आर्ट कैसे बनाया जाता हैं – दोस्तो ढोकरा आर्ट जितना देखने मे खूबसूरत होता हैं उतना ही इसको बनाना काफी कठिन होता हैं!इस आर्ट की अनोखी बात ये है की हर एक पीस बिना कोई जोड़ के एक ही पीस में बनाया जाता है।

आइये जानते हैं ढोकरा आर्ट बनाने के तरीके को दोस्तो इस आर्ट को बनाने के दो तरीके है पहला है मेटल कास्टिंग दूसरा है लॉस्ट वैक्स कास्टिंग और यह मेटल बनता है पीतल ,निकिल और जस्ता। इसको बनाने के लिए उस आकृति की सबसे पहले मिट्टी का ढांचा तैयार किया जाता है उसके ऊपर बी वैक्स का डिज़ाइन बनाया जाता है उसके ऊपर फिर से मिट्टी का परत चढ़ाया जाता है इसके बाद इस आकृति को धुप में सूखा दिया जाता है सूखने के बाद आग में इसे तपाया जाता है। आग में तपने से बी वैक्स पिघल जाता है तथा निश्चित आकृति प्राप्त हो जाती है! ढोकरा आर्ट बनाने मे 6 से 8 महीने तक का समय लग जाता हैं! फिर बनकर तैयार होता हैं ढोकरा आर्ट!

ढोकरा आर्ट बनाने का आईडिया कैसे आया – दोस्तो जैसा कि ढोकरा आर्ट 4000 साल पुराना बताया जाता हैं कुछ जानकर इसके संबंध मे एक कहानी साझा करते है जो इस प्रकार हैं!
हमारे पूर्वज पेड़ के निचे बैठे हुए थे तभी पेड़ से मधुमखी का वैक्स यानि मोम दीमक के भिंभोरा पर गिरा और धीरे धीरे पिघल कर एक आकृति में बदल गया इस घटना से वे बहोत प्रभावित हुए और यही से मोल्डिंग यानि ढलाई का तरीका सिखा और ढोकरा आर्ट की शुरूवात हुई.

दोस्तो अगर आप को यह जानकारी अच्छा लगा तो कॉमेंट और शेयर जरूर करे।

जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give you information about Dhokra art, if you like this information then do comment and share.

Dhokra Art

Dhokra Art – Friends, this unique art of preparing unique figures by putting brass and bronze in a clay mold and heating it on fire is Dhokra Art.

How old is Dhokra art – Friends Dhokra art is one of the most popular art, it started 4000 years ago. Historians tell that Dhokra art has also been found in Harappa and Mohenjodaro civilization.

Dhokra Art Bastar – Friends Dhokra Art work In the Bastar region of Chhattisgarh, Garhwa and Jhara tribes mainly do this work. Tribal tribes live in this area who mainly depend on this type of art. Their income There is also a tool for this and it is also keeping this work saved!

What is made in Dhokra Art – Friends, many idols are made under Dhokra Art, they can be in any area, such as horses, elephants, idols of deities, idols of tribal people in which there is a glimpse of their culture. , as well as made as home decorations!

How Dhokra Art is made – Friends, Dhokra art is as beautiful to look at as it is very difficult to make it! The unique thing about this art is that each piece is made in a single piece without any joints.

Let us know how to make Dhokra Art, friends, there are two ways to make this art, the first is metal casting, the second is lost wax casting and this metal is made of brass, nickel and zinc. To make it, first of all the clay structure of that shape is prepared, a design of Bee Wax is made on top of it, a layer of clay is put on it again, after this the shape is dried in the sun, after drying, the fire In it it is heated. Bee wax melts when heated in a fire And the definite shape is obtained! It takes 6 to 8 months to make Dhokra art! Then Dhokra Art is ready!

How did the idea of ​​making Dhokra Art come about – Friends, as Dhokra Art is said to be 4000 years old, knowing something about it, share a story which is as follows!Our ancestors were sitting under the tree, when the wax of the bee fell from the tree on the beehive of the termite and slowly melted and turned into a shape, they were very impressed by this incident and from this they learned the method of molding and dhokra art. commenced.

Friends, if you like this information, then do comment and share.

jai Johar Jai Chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!