साल में एक बार खुलता है निराई माता का मंदिर lNirai Mata mandir gariyaband

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मै आपको छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के निराई माता मंदिर के बारे में जानकारी देने वाला हूं यह जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे आइए जानते है निराई माता के बारे में विस्तार से

निराई माता मंदिर, गरियाबंद

वैसे तो देश के कोने-कोने में कई प्रसिद्ध मंदिर स्थापित है, लेकिन निराई माता की महिमा अद्भुत है।

कहा है यह मंदिर – दोस्तों यह छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम मगरलोड की पहाड़ी पर निराई माता का दिव्य मंदिर स्थित है।

कुल देवी – दोस्तों माता निरई आदिवासियों की आराध्य व कुल देवी है। इसीलिए मां की आराधना भी आदिम संस्कृति से की जाती है।

प्रवेश निषेध – दोस्तों निरई माता के मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है यहां सिर्फ पुरुष वर्ग के लोग ही माता के दर्शन कर सकते है।

बलि प्रथा – दोस्तों निरई माता के मंदिर में नवरात्र के प्रथम रविवार को जात्रा में भक्त माता को अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर बकरे की बलि देते है।निरई की पहाड़ी के अलावा भी इस मंदिर के नीचे भी माता के दो देव स्थान है जहां बकरा काटा जाता है। एक स्थान में काला बकरा और दूसरे स्थान में खैरा बकरा कटता है।पहाड़ी की कंदरा में विराजमान माता जिसके दर्शन करने के लिये पथरिली दुर्गम रास्तों से उपर चढ़ना पड़ता है किसी भी प्रकार का कच्ची-पक्की रास्ता अथवा सीड़ी आदि का निर्माण नहीं किया गया है और न ही किसी प्रकार का छत बना है।

पैदल यात्रा – दोस्तों निरई माता मंदिर तक पहुंचने के लिए दुर्गम रास्तों से होकर पहाड़ी की चोटी में पहुंचना पड़ता है जिसके बाद बड़े माता के दर्शन होते है।इस अंचल में आदिवासी व गोड़वाना समाज के लोगों की बाहुलता है, माता निरई इस अंचल की आदिवासियों की कुल देवी है। यहां प्रत्येक नवरात्र के प्रथम रविवार को जात्रा का आयोजन किया जाता है। इस जात्रा में नजदीक ग्राम पंटोरा, मालगांव, कचना धुरवा, बारूका के अलावा मगरलोड, धमतरी, गरियाबंद और रायपुर से भी सैकड़ों भक्त दर्शन करने आते है।

ग्रामीणों के अनुसार उनके पूर्वज सैकड़ों वर्षों से इस स्थान पर माता की आराधना करते आ रहे है । पहुंच मार्ग दुर्गम होने के कारण पहले जात्रा में अधिक लोग शामिल नहीं होते थे किन्तु अब कुछ ही वर्षों में हजारों लोग एक दिन की जात्रा मे दर्शन करने आते है। भक्तों द्वारा एक दिन में ही सैकड़ों बकरा माता को भेट की जाती है।

साल में एक बार खुलता है मंदिरदोस्तों यह मंदिर एक अनोखा मंदिर है जो साल में सिर्फ 5 घण्टे के लिए ही खोले जाते हैं भक्तों की लम्बी कतारे माता के दर्शन के लिए उमड़ पड़ती है।लोगों द्वारा कहा जाता है कि माता के मंदिर में हर साल एक चमत्कार घटित होता है।यहाँ हर साल चैत नवरात्र के दौरान स्वतः ही ज्योति प्रज्जवलित होती है।इस चमत्कार की वज़ह से लोग देवी के प्रति अपार श्रध्दा रखते हैं।ग्रामीण बताते हैं कि माता निराई को लोग 200 सालों से पूजते आ रहे हैं।यह मंदिर महिलाओं के लिए प्रतिबंधित है,केवल पुरुष पुजा अर्चना करते हैं । माँ हर भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं।मनोकामना पूरी होने पर कुछ न कुछ चढावा करतें हैं।

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give you information about Nirai Mata Temple in Gariaband district of Chhattisgarh, if you like this information, then do comment and share.

Nirai Mata Temple, Gariaband (chhattisgarh)

Although many famous temples are established in every corner of the country, but the glory of Nirai Mata is amazing.

It is said that this temple – friends, this divine temple of Nirai Mata is situated on the hill of village Magarlod, at a distance of about 12 km from the district headquarters of Gariaband, Chhattisgarh.

Kul Devi – Friends, Mata Nirai is the deity or family deity of the tribals. That is why the worship of the mother is also done from the primitive culture.

Entry Prohibited – Friends, entry of women is prohibited in Nirai Mata’s temple, here only people of male class can see the mother.

Sacrificial practice – Friends, in the temple of Nirai Mata, on the first Sunday of Navratri, the devotees sacrifice a goat to the mother on the fulfillment of their wishes. Apart from the hill of Nirai, there are also two places under this temple where the goat is located. is cut. Black goat is cut in one place and Khaira goat is cut in another place. To see the mother sitting in the cave of the hill, one has to climb up the rocky inaccessible paths.No kind of kutcha-paved path or steps etc. has been constructed nor has any kind of roof been made.

Walking tour – Friends, to reach Nirai Mata Temple, one has to reach the top of the hill through inaccessible paths, which has a vision of the elder mother. In this area there is a majority of people of tribal and Godwana society, Mata Nirai is the tribals of this region. She is a total goddess. Jatra is organized here on the first Sunday of every Navratri. In this Jatra, hundreds of devotees from nearby villages like Pantora, Malgaon, Kachana Dhurwa, Baruka, apart from Magarlod, Dhamtari, Gariaband and Raipur also come to visit.

According to the villagers, their ancestors have been worshiping the mother at this place for hundreds of years. Earlier, due to the inaccessible approach road, not many people attended the Jatra, but now in a few years thousands of people come to visit the Jatra for a day. Hundreds of goats are presented by the devotees to the mother in a single day.

Temple opens once a year – Friends, this temple is a unique temple which is opened only for 5 hours in a year, long queues of devotees throng to see the mother. It is said by the people that in the temple of the mother. Every year a miracle happens. Every year during Chait Navratri, the flame is automatically lit. Due to this miracle, people have immense reverence for the goddess. Villagers say that people have been worshiping Mata Nirai for 200 years. Huh.This temple is restricted for women, only men offer prayers. Mother fulfills the wishes of every devotee. On the fulfillment of the wish, she offers something or the other.

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jai johar jai Chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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