रहस्यमय मंदिर हिंगलाज माता मंदिर l hinglaj mata mandir devsagar l hinglaj temple Baloda bazar l

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मै आपको छत्तीसगढ़ के हिंगलाज माता मंदिर के बारे में जानकारी देने वाला हूं यह जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे

हिंगलाज माता मंदिर,देवसागर, बलौदाबाजार

पता – दोस्तों छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिला के भटगांव के पास देवसागर नामक गांव में हिंगलाज माता का दिव्य मंदिर स्थित है।

जेवरादाई – दोस्तों हिंगलाज माता को गांव के लोग जेवरादाई के नाम से भी जानते है दोस्तों माता एक चबूतरे में विराजमान है जो भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करती है।

नवरात्रि और मेला का आयोजन – दोस्तों नवरात्रि के पावन पर्व में श्रद्धालु की लंबी कतार हिंगलाज माता के दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ती हैं और यहां हर साल हनुमान जंयती और चैत्र पूर्णिमा के दिन भव्य मेला लगता है जिसे देखने के लिए पर्यटक दूर दूर से इस मंदिर परिसर में आते है और मेला का आनंद लेते है।

अन्य मंदिर – दोस्तों मंदिर के पास शंकर भगवान की विशाल प्रतिमा, हनुमान, भैरव बाबा के अलावा और भी अन्य मंदिर है।

मंदिर का रहस्य – दोस्तों यहां के गांव वाले का मानना है की यहां पर मेला के दिन रात्रि 9 बजे के बाद कोई भी श्रद्धालु मेला परिसर में नहीं ठहरता है क्योंकि इस दिन देवी का आगमन होता है । वहीं रात में एक भी श्रद्धालु मंदिर के पास नहीं रुकते हैं। क्योंकि बताया जाता है कि माता उस रात पूरे मंदिर क्षेत्र में भ्रमण करती हैं अगर कोई व्यक्ति माता को देख लेता है तो उसकी मृत्यु हो जाती है।इस तरह हिंगलाज माता की महिमा अद्भुत है। यह मंदिर लगभग 1 किलोमीटर पूरे पठार से घिरा हुआ है। दोस्तों गर्मी के दिन में अत्यधिक तपती धूप होने के बाद भी पठार के पत्थर से पांव नहीं जलते हैं।

मंदिर का इतिहास – इस मंदिर का इतिहास बहुत ही रोचक है यहां के बुजुर्ग बताते है की प्राचीन काल से मां हिंगलाज भवानी भटगांव नगर पंचायत से 3किलोमीटर की दूरी पर ग्राम जेवराडीह गांव की पहाड़ी पर स्थित है। बताया जाता है कि सारंगढ़ के राजा देवी की मूर्ति को रात्रि में बैलगाड़ी से अपने राज्य ले रहा था ठीक उसी रात को भटगांव के जमींदार को सपना आया की मुझे सारंगढ़ के राजा जबरदस्ती यहां से उठाकर बैलगाड़ी में अपने राज्य ले जा रहा है। तब जमींदार उसी रात को ग्रामीणों को लेकर देवसागर पहुंचा l तो जाकर देखा तो राजा माता की मूर्ति को अपने बैलगाड़ी में लेकर जा रहा था। तब जमींदार के कहने पर राजा देवी की मूर्ति वापस छोड़कर वापस अपने राज्य सारंगढ़ चले गए किन्तु पुराने बुजुर्गों द्वारा बताया कि सारंगढ़ के राजा व भटगांव जमींदार के बीच देवी मूर्ति को ले जाने के चलते काफी विवाद हुआ। इस दौरान राजा देवी के नाक का कुछ हिस्सा नथनी सहित काट कर ले गया। आज भी चैत्र पूर्णिमा के दिन सारंगढ़ राजमहल में देवी की पूजा अर्चना होती है।

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give you information about Hinglaj Mata Temple of Chhattisgarh, if you like this information, then do comment and share.

Hinglaj Mata Temple, Devsagar, Balodabazar

Address – Friends, the divine temple of Hinglaj Mata is located in Devsagar village near Bhatgaon in Balodabazar district of Chhattisgarh.

Jevaradai – Friends, Hinglaj Mata is also known by the people of the village as Jevaradai, friends Mata is seated in a platform which fulfills the wishes of the devotees.

Organizing Navratri and Fair – Friends, in the holy festival of Navratri, long queues of devotees throng to see Hinglaj Mata and every year on Hanuman Jayanti and Chaitra Purnima, a grand fair is held, which tourists can see from far and wide. Come to the temple premises and enjoy the fair.

Other Temples – Friends, there is a huge statue of Lord Shankar, Hanuman, Bhairav ​​Baba and other temples near the temple.

Secret of the temple – Friends, the villagers here believe that no devotee stays in the fair premises after 9 pm on the day of the fair because the Goddess arrives on this day. At the same time, not a single devotee stays near the temple at night. Because it is said that the mother travels in the entire temple area that night.If a person sees the mother, then he dies. In this way the glory of Hinglaj Mata is amazing. This temple is surrounded by the entire plateau for about 1 kilometer. Friends, even after being very hot in the summer day, the feet of the plateau stone do not burn.

History of the temple – The history of this temple is very interesting, the elders here tell that since ancient times Mother Hinglaj Bhavani is situated on the hill of village Jewaradih, 3 km from Bhatgaon Nagar Panchayat. It is said that the king of Sarangarh was taking the idol of Devi to his kingdom by bullock cart in the night, on the same night, the landlord of Bhatgaon had a dream that the king of Sarangarh was forcibly picking me up from here and taking him to his kingdom in bullock cart.Then the zamindar reached Devsagar with the villagers on the same night, when he went and saw that the king was carrying the idol of Mata in his bullock cart. Then, at the behest of the landlord, the king left the idol of the goddess and went back to his kingdom, Sarangarh, but it was told by the old elders that there was a lot of dispute between the king of Sarangarh and the Bhatgaon landlord due to the carrying of the goddess idol. During this, the king cut off some part of the goddess’s nose along with the nostrils. Even today, on the day of Chaitra Purnima, the Goddess is worshiped in the Sarangarh palace.

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jai johar jai Chhattisgarh

Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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