बलिदानी राजा बालक दास l biography of balakdas

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट में मैं आपको बालक दास जी के बारे मे जानकारी देने वाला हूं यह जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट और शेयर जरूर करे ।

बालक दास ( राज गुरु सतनामी धर्म के महानायक और सेनापति)

‌बालक दास कौन थे – दोस्तो गुरु बालक दास जी सतनाम धर्म के संस्थापक गुरु घासीदास जी के दितीय पुत्र है। जो भूमि संपत्ति और सम्मान की रक्षा के लिए कार्य करते थे। जो सतनामी आंदोलन के महानायक थे।

जन्म – दोस्तो गुरु बालक दास जी का जन्म 18 अगस्त 1805 मे गिरौदपुरी छत्तीसगढ़ मे हुआ था।

माता पिता – दोस्तो गुरु बालक दास जी के पिता का नाम गुरु घासीदास और माता का नाम सफुरा है।

विवाह – दोस्तो गुरु बालक दास जी का विवाह ढारा नवलपुर, बेमेतरा के निवासी सुनहरदास चतुर्वेदी की पुत्री निरा माता के साथ हुआ। दूसरा विवाह चितेर सिलवट की बेटी राधा के साथ भी विवाह किये।

संतान – दोस्तो गुरु बालक दास जी ने दो विवाह किये थे दोनो माताओ से उन्हे संतान प्राप्त हुआ। राधा माता से पुत्र सहेबदास जी का प्राप्ति हुआ। और माता निरा से गंगा और गलारा नामक दो पुत्री का प्राप्ति हुआ था।

निधन – दोस्तो गुरु बालक दास जी सन16 मार्च 1860 को औराबाँधा, मुंगेली मे मीटिंग मे गए थे।रात मे जब विश्राम कर रहे थे तो शत्रुओ ने प्राण घात हमला कर दिया जिसमे गुरु बालक दास गंभीर घायल हो गए थे। लोग उन्हें सतनामीयो के तत्कालिक राजधानी भंडारपुर(बलौदा बाजार) ले जाना चाहते थे। लेकिन आचानक रास्ता बदलकर नवलपुर(बेमेतरा) ले जाने लगे रास्ते मे कोसा नामक गॉव मे 17 मार्च 1860 को अंतिम सास लिया। जिसके बाद उनके पार्थिव देह को नवलपुर ,बेमेतरा मे दफनाया गया।

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जय जोहार जय छत्तीसगढ़

Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give you information about Balak Das ji, if you like this information, then do comment and share.

Balak Das (Mahanyak and commander of Raj Guru Satnami religion)

Who was Balak Das – Friends, Guru Balak Das ji is the second son of Guru Ghasidas ji, the founder of Satnam Dharma. Those who used to work for the protection of land, property and honor. Who was the great hero of the Satnami movement.

Birth – Friends, Guru Balak Das ji was born on 18 August 1805 in Giroudpuri, Chhattisgarh.

Parents – Friends, Guru Balak Das’s father’s name is Guru Ghasidas and mother’s name is Safoora.

Marriage – Friends, Guru Balak Das ji was married to Nira Mata, daughter of Sunhardas Chaturvedi, a resident of Dhara Nawalpur, Bemetara. Second marriage Chiter also married with Silvat’s daughter Radha.

Children – Friends, Guru Balak Das ji had done two marriages, he got children from both the mothers. Son Shebdas ji was received from Radha Mata. And two daughters named Ganga and Galara were born from Mother Nira.

Died – Friends, Guru Balak Das ji had gone to a meeting in Aurabandha, Mungeli on March 16, 1860. When he was resting at night, the enemies attacked his life in which Guru Balak Das was seriously injured. People wanted to take him to Bhandarpur (Baloda Bazar), the then capital of Satnamyo. But suddenly changed the way to Nawalpur (Bemetara) and took his last breath on March 17, 1860 in a village named Kosa. After which his body was buried in Nawalpur, Bemetara.

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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