सोनादाई पहाड़ी में छिपे है सोने के पेड़ l Gold trees are hidden in Sondai hill

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हैलो दोस्तो मेरा नाम हैं हितेश कुमार इस पोस्ट मे आपको सोनादाई पहाड़ी में छिपे है सोने के पेड़ के बारे मे जानकारी देने वाला हूं। यह जानकारी अच्छा लगे तो कॉमेंट और शेयर जरूर करे

सोनादाई पहाड़ी में छिपे है सोने के पेड़

दूरी – दोस्तो सोनादाई पहाड़ी जिला मुख्यालय उत्तर बस्तर कांकेर के से 80 किमी दूर दुर्गूकोंदल ब्लाक के ग्राम लोहत्तर में स्थित है।

सोने का पेड़ – दोस्तो सोनादाई की मान्यता है कि आज से लगभग 500 साल पहले एक बकरी चरवाहा सोनादाई पहाड़ में बकरी चराने गया जहां चरवाहे को एक चमकता हुआ पेड़ मिला था, जिसमें से फूल तोड़ कर चरवाहे ने अपनी बकरी को पहना दिया था जिसे कंडरा के राजा धर्मराज ने देखने के बाद चरवाहे से इस फूल की जानकारी ली, इसके बाद जब राजा ने पहाड़ी की चोटी में अद्भुत पेड़ को देखकर हैरान रह गया, क्योंकि यह पेड़ सोने का था।

पेड़ को पाने की लालसा – दोस्तो कंडरा के राजा ने इसके बाद इस पेड़ को उखाड़कर अपने घर ले जाने के लिए लोगों से खोदाई कराई। कहा जाता है कि खुदाई के लिए ओडिशा से 2 लाख मजदूर लाया गया था और सोने के पेड़ को निकालने के लिए लगभग नौ लाख मजदूरों ने कार्य किया है। ऐसा कहा जाता है कि कंडरा के राजा इस पेड़ की जड़ को छोटा सा भी टूटने नहीं देना चाहते थे, इसलिए पहाड़ के बहुत गहराई तक खुदवाया गया था। यहीं सोने के पेड़ को जब-जब इसकी जड़ की अंत तक पहुंचे की कोशिश करते थे तब सोने का पेड़ जमीन के अंदर धस्ते जाता था। एक समय ऐसा भी आया जब पूरे मजदूर जमीन के अंदर धंस गए। इसके बाद से राजा सोने की पेड़ को घर लाने कि लालसा छोड़ दी।

आज भी मिलते है सबूत – दोस्तो वही आज भी लोहत्तर की सोनादाई पहाड़ी में इसकी गुफा और उडिया मजदूरों द्वारा बनाई गई पत्थर के दीवारे टूटी फूटी अवस्था में आज भी देखा जा सकता है। कहा जाता है कि अंग्रेजों ने भी इस जगह सोने के पेड़ को खोजने का बहुत प्रयास किया था और इस तरह 90 को दशक में भारत सरकार द्वारा सोनादाई पहाड़ से सोना खोज करने की कोशिश की गई थी पर वहां से सोना नहीं मिला। हालांकि सोनादाई गुफा की जल कुंड के पानी का स्रोत खंडी नदी में जाकर मिलता है। उस पानी से सोने के छोटे छोटे टुकड़े मिलते है जिसे क्षेत्र के सोनाक्षारिया छंद कर निकलते है। आज भी सोनादाई पहाड़ी में ऐसे कई चीजें हैं जो ऐतिहासिक धरोहरों है।

360 गांवो की आराध्य – दोस्तो आज भी सोनादाई पहाड़ी में स्थित देवी देवताओं को 360 से भी ज्यादा गांव के लोग पूजते हैं।

कुंड मे नहाने से पूर्ण होती है मनोकामना – सोनादाई गुफा की गहराई को आज तक कोई भी नहीं माप सका है गुफा के अंदर जलकुंड भी हैं। लोगों की यह मान्यता है कि जलकुंड में नहाने से मनोकामना पूर्ण होती है।

मेले का आयोजन – दोस्तो सोनादाई मंदिर में हर साल माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि में बहुत बड़ा मेला भी लगता है, जिसमें बहुत दूर दूर से लोग अपनी मनोकामना लेकर पहुँचते है।

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Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post I am going to give you information about the gold tree hidden in the Sondai hill. If you like this information then please comment and share

Gold trees are hidden in Sondai hill

Distance – Friends Sondai hill is located in village Lohtar of Durgukondal block, 80 km away from district headquarter North Bastar Kanker.

Gold tree – Friends Sondai, it is believed that about 500 years ago, a goat shepherd went to the Sondai mountain to graze the goat, where the shepherd had found a shining tree, from which the shepherd had plucked the flower and wore his goat, which was called the tendon. King Dharmaraja, after seeing this, inquired about this flower from the shepherd, after this, when the king was surprised to see the wonderful tree in the top of the hill, because this tree was of gold

Longing to get the tree – Friends, after this the king of Kandra got this tree uprooted and excavated by people to take it to his house. It is said that 2 lakh laborers were brought from Odisha for the excavation and about nine lakh laborers worked to remove the gold tree. It is said that the king of Kandra did not want to let the root of this tree break even a little, so it was dug very deep into the mountain. Here, whenever we tried to reach the end of the root of the gold tree, then the gold tree used to fall inside the ground. There came a time when all the workers got buried inside the ground. Since then the king gave up the longing to bring home the gold tree.

Even today the evidence is found – friends, the same cave in Sondai hill of Lohtar and the stone walls made by Oriya laborers can be seen even today in broken condition. It is said that the British had also made a lot of effort to find the gold tree at this place and thus in the decade of 90, an attempt was made by the Government of India to find gold from the Sondai mountain, but gold was not found from there.However, the source of water of the water tank of Sondai cave is found in the Khandi river. Small pieces of gold are found from that water, which the Sonakshariyas of the area come out with verses. Even today, there are many such things in Sondai hill which are historical heritage

Adoration of 360 Villages – Friends, even today people of more than 360 villages worship the deities located in Sondai hill.

Bathing in the pool fulfills the wish – till date no one has been able to measure the depth of the Sondai cave, there are also water bodies inside the cave. People have a belief that taking a bath in the water tank fulfills their wishes.

Organizing the Fair – Friends, a huge fair is also organized every year in the Sondai temple on Magh Purnima and Mahashivratri, in which people from far and wide reach with their wishes.

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हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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