छत्तीसगढ़ के फेफड़ा” कहे जाने वाले हसदेव अरण्य को बचाओ। save tree in hasdev aranya

नोट – हिंदी और इंग्लिश में जानकारी प्राप्त करे।

हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार आज की पोस्ट मे आप को हसदेव अरण्य के बारे मे जानकारी देने वाला हुँ। यह पोस्ट अच्छा लगे तो कॉमेंट और शेयर जरूर करे।

हसदेव अरण्य एक बहुत ही संघर्ष का विषय

दोस्तों छत्तीसगढ़ के फेफड़ा” कहे जाने वाले हसदेव अरण्य (सरगुजा, सूरजपुर, कोरबा) का लगभग 841 हेक्टेयर जंगल जल्द ही साफ़ कर दिया जाएगा। क्योंकि सरकार और कोयले के बीच कमबख्त जंगल बीच में आ गया है उसको तो कटना ही है ना। क्या हुआ? सिर्फ 2 लाख पेड़ ही तो हैं फिर से लगा लेंगे।

तो क्या ये जंगल सरकार और पूंजीपतियों के बाप की है? उनके पूर्वजों ने ये सारे पेड़ लगाए थे? क्या कभी वो खुद हसदेव आए हैं कभी देखा है किसी एक पेड़ को ध्यान से? कागज़ों पर पेड़ काटने से पहले बेहतर होता, हसदेव आकर एक बार देख जाते। अच्छा क्या जंगल के कटने से सिर्फ़ पेड़ मरते हैं? वृक्षों और पशुओं की कितनी सारी प्रजातियां विलुप्त हो जाएँगी। हाथियों का घर है हसदेव आप उनके घर बर्बाद कर दोगे तो वो आपके घर आ जाएँगे और ये आप बर्दाश्त नहीं कर पाओगे।

हसदेव अरण्य क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी उनका क्या? उनका तो घर, जीविका, माँ-बाप, बच्चें, भगवान सब कुछ हसदेव ही है वो कहाँ जाएँगे? अपने पशु वो कहाँ चराएंगे? अपने पर्वों में कहाँ से लाएँगे वो वन देव और वन देवी? कैसे सिखाएँगे अपने आने वाले बच्चों को अपनी संस्कृति, जंगल के बिना आदिवासी का क्या अस्तित्व बाकी रह जाएगा? उनके बच्चें जिन्होंने ज़िंदगी भर अपने माँ बाप को जंगल के बीच देखा अब उन्हें जंगल के लिए संघर्ष करते देख रहे हैं। उनके मन में आपके लिए घृणा बढ़ती जा रही और आप उसी के लायक है।

एक बात बताइए हसदेव क्या सिर्फ़ आदिवासियों का है? आपका कुछ नहीं ? आज से ठीक एक साल पहले लोग घर बेच कर ऑक्सीजन सिलेंडर ले रहे थे याद है या भूल गए? मध्य भारत का एक सघन वन कटने जा रहा और आपको लगता है कि आपको इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा?

छत्तीसगढ़ राज्य एक ऐसा राज्य है जो बहुत ही जल्द मरुस्थल बनने जा रहा है क्योंकि जिस तरह से छत्तीसगढ़ के वनों को जिस तरह से काटा जा रहा है वे दिन दूर नहीं जब यहां गिनती मात्र के पेड़ रहेंगे और इन सब का कारण पैसे कमाने की हवस और अपने आप को दुनिया के नजरो में सबसे अमीर रसूखदार दिखाने की चाह और ये कुछ चंद लोग है जो अपने आप को उद्योगपति बोलते हैं और इनके इस पैसे कमाने की चाह में जिनका सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है ओ है आदिवासी

क्योंकि आदिवासी ही है जो इस जल जंगल जमीन को अपने बच्चे की तरह रखते हैं जब तक आदिवासी है तब तक जल जंगल जमीन सुरक्षित रहेंगे लेकिन आदिवासियों की सुनता कोन है कोई भी नहीं क्योंकि आज के समय में जिस तरह आदिवासियों के ऊपर अत्याचार उनका शोषण हो रहा है उनको उनके ही घर से जबरदस्ती विकास के नाम में उनको बेदखल किया जा रहा है और ये सब कर कौन रहा है यहां की शासन की बागडोर सम्हालने वाले लोग कुछ चंद लोगो को लाभ पहुंचाने के लिए कर रहे हैं छत्तीसगढ़ की सरकार एक तरफ तो अपने आप को आदिवासी हितैषी है बोलके आदिवासी जनजातीय कला महोत्सव कराके वाहवाही लूट रहे हैं और दूसरी तरफ आदिवासियों के घर को उजाड़ के आदिवासियों को खून के आंसू रोने पे विवश कर रहे हैं

हसदेव अरण्य के लिए पंक्ति

•”हवा भी मजारों मे निकने लगा है,
इतना अधिक पेंडो को काटने लगा है।”

• अजीब पागल लोग है ना? शहर बसा के गाँव ढुंढते हैं,
हाथ में कुम्हाडी लिए छाँव ढुंढते हैं। “

• तुम परिंदों का दुख नहीं समझे,
पेड़ पर घोसला नहीं, उनका घर था। “

• ये चुप्पी साधे लोग हमारे कैसा तेरा न्याय है,
बच जाए प्रकृति कि मार से, ये बडा भयंकर हाथ है। “

• सोच रही तो विरह-वेदना मे ये कैसा बच्चा मैने पाता है
कट रही थी शीश हमारी पर हर कोई मौन रहने वाला है.

• छत्तीसगढ़ महतारी के लाज रखो, सोचो, विचारों अउ हसदेव बर अपन बात रखव ”

youtube Channel – Dk 808

जय छत्तीसगढ़

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Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in today’s post I am going to inform you about Hasdev Aranya. If you like this post then do comment and share.

Hasdev Aranya the subject of much conflict

Friends, about 841 hectare forest of Hasdeo Aranya (Surguja, Surajpur, Korba), which is called “lung of Chhattisgarh”, will be cleared soon. Because the fucking forest has come in the middle between the government and the coal, it has to be cut, right? What happened?

So does this forest belong to the government and the father of the capitalists? Their ancestors planted all these trees? Has he ever come to Hasdev himself, ever seen any one tree carefully? It would have been better if Hasdev would come and have a look before cutting trees on paper. Well, do only trees die due to the cutting of the forest? How many species of trees and animals will become extinct. Elephant’s home is Hasdev, if you destroy their house, then they will come to your house and you will not be able to tolerate this.

What about the tribals living in the Hasdeo forest area? Their home, livelihood, parents, children, God, everything is only Hasdev, where will they go? Where will they graze their cattle? From where will they bring Van Dev and Van Devi in ​​their festivals? How will you teach your coming children, what will be the existence of tribals without their culture, forest? His children, who had seen their parents in the middle of the forest throughout their lives, are now watching them fight for the forest. Their hatred for you is increasing in their mind and you deserve that.

Tell me one thing, is Hasdev only for tribals? your nothing? Just one year ago today, people were selling their homes and taking oxygen cylinders, remember or forgot? A dense forest of central India is going to be cut down and you think it won’t matter to you?

The state of Chhattisgarh is a state which is going to become a desert very soon, because the way the forests of Chhattisgarh are being cut, the days are not far when there will be only number of trees here and the reason for all this is the desire to earn money. And the desire to show themselves as the richest person in the eyes of the world and these are few people who call themselves industrialists and in their desire to earn this money, who are suffering the most, are tribals.

Because it is the tribals who keep this water forest land like their child, as long as there is a tribal, the water forest land will be safe, but no one listens to the tribals, because in today’s time, the way tribals are being exploited. It has been that they are being evicted from their own house forcibly in the name of development and who is doing all this, the people who are taking the reins of the government here are doing it to benefit a few people.

The government of Chhattisgarh, on the one hand, is adivasi-friendly and is looting the accolades by organizing the tribal art festival, and on the other hand, is forcing the tribals to cry tears of blood by destroying their homes.

Row for Hasdev Aranya

• The wind has also started coming out in the tombs,It’s starting to bite the pando so much.”

• Weird crazy people isn’t it? Searching for the villages of the city,They look for shade with an ax in their hand. ,

• You do not understand the misery of birds,There was no nest on the tree, it was his house. ,

• These silent people, how is your justice to us,To be saved from the wrath of nature, this is a terrible hand. ,

• Thinking, what kind of child do I find in the pain of separation?The head was being cut, but everyone is going to remain silent.

• Keep the shame of Chhattisgarh Mahtari, think, have thoughts and keep your words.

jai johar jai Chhattisgarh

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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