पशुपति मंदिर के इतिहास एवं अदभुत रहस्य l pashupatinath mandir ka etihas

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हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट मे आपको पशुपति मंदिर के रहस्य को बताने जा रहे यह पोस्ट आपको अच्छा लगे तो कॉमेंट और शेयर जरूर करे।

पशुपतिनाथ मंदिर के अदभुत रहस्य

पशुपति मंदिर के इतिहास एवं अदभुत रहस्य l pashupatinath mandir ka etihas

दोस्तों आज हम आपको संसार के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जिसकी स्थापना वेदों के निर्माण के पहले की गई थी आपको जानकर यह हैरानी होगी कि इस मंदिर का शिवलिंग पारस पत्थर के समान है जो लोहे को भी सोना बना सकता है ये मंदिर यहां स्थापित शिवलिंग इतना रहस्यमय है जिसके बारे में सुनकर आप आश्चर्य चकित हो जायेंगे।

आज आप जानेंगे दुनिया की सबसे रहस्यमय पशुपति मंदिर के अनुसूचित रहस्य के बारे में जिस आज तक विज्ञान जगत भी नहीं समझ पाया।

केदारनाथ का आधा भाग

नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर जिसके विषय में यह माना जाता है कि आज भी इसमें भगवान शिव की मौजूदगी है। पशुपति मंदिर को भगवान शिव के बारह ज्योति में से एक केदारनाथ मंदिर का आधा भाग माना जाता है।

स्थान

पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से करीबन तीन दशमलव एक किलोमीटर उत्तर पश्चिम देव पाटन गांव में बागमति नदी के तट पर स्थित है।

पशु योनि से मुक्ति

पशुपति नाथ मंदिर के विषय में यह मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस स्थान के दर्शन करता है उसको किसी भी जन्म में पशु योनी प्राप्त नहीं होती है लेकिन साथ ही यह भी माना जाता है कि पशुपति नाथ के दर्शन करने वाले व्यक्ति को सबसे पहले नंदी की दर्शन नहीं करनी चाहिए अगर ऐसा होता है तो उस व्यक्ति को पशु योनि मिलना तय होता है।

एक ही घाट का पानी मन्दिर में ले जाया जाता है।

पशुपति नाथ मंदिर के बाहर एक घाट स्थित है जिसे आर्य घाट के नाम से जाना जाता है पौराणिक काल से ही केवल इसी घाट के पानी को मंदिर के भीतर ले जाने का प्रावधान है। किसी भी स्थान का जल अंदर आप नहीं ले जा सकते हैं ।

दोस्तों आपको जानकर यह हैरानी होगी कि पशुपति नाथ मंदिर का ज्योर्तिलिंग चतुर मुखी है। ऐसा माना जाता है कि यह पारस पत्थर के समान है जो लोहे को भी सोना बना सकता है इस मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति तक पहुंचने के कुल चार दरवाज़े है वे चार दरवाज़े चांदी के है। पश्चिमी द्वार के ठीक सामने भगवान शिव के बैल नंदी की विशाल प्रतिमा है जिसका निर्माण पीतल से किया गया है इस परिसर में वैष्णव और शैव परंपरा के कई मंदिर और प्रतिमा है।

शिवलिंग के 4 मुखों का वर्णन

नेपाल की पशुपति नाथ मंदिर को कुछ मायने में तमाम मंदिरों में सबसे प्रमुख माना जाता है। पशुपति नाथ दरअसल चार चेहरे वाला लिंग है पूर्व की ओर वाले मुख को तत्व पुरुष, पश्चिम ओर वाले को सत्य ज्योति, उत्तर दिशा की ओर देख रहा मुख वाम देव,और दक्षिण दिशा वाले मुख को अघोरा कहते है।
ये चारों चेहरे तंत्र विद्या के चार बुनियादी सिद्धांत है कुछ लोग यह भी मानते हैं कि चारों वेदों की बुनियादी सिद्धांत भी यहीं से निकले थे। माना जाता है कि यह लिंग वेद लिखे जाने के पहले ही स्थापित हो गया था।

पौराणिक मान्यताएं

दोस्तों पशुपति नाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता ये भी है जिसके अनुसार कुरुक्षेत्र की लड़ाई के बाद अपने ही बंधुओं की हत्या करने की वजह से पांडव बेहद दुखी थे। उन्होंने अपने भाइयों और सगे संबंधी को मारा था इसे गोत्र वध भी कहते हैं उनको अपनी करनी का पछतावा था और वे खुद को बहुत अपराधी महसूस भी कर रहे थे। खुद को इस दोष से मुक्त कराने के लिए वे भगवान शिव की खोज में निकल पड़े लेकिन भगवान शिव नहीं चाहते थे कि जो जघन्य कांड उन्होंने ने किया है उनसे उनको इतनी आसानी मुक्ति दे दी जाय।लेकिन पांडवो को अपने पास देखकर उन्होंने एक बैल का रूप धारण कर लिया और वहां से भागने की कोशिश करने लगे लेकिन पांडवों को उनके भेद का पता चल गया और वे उनका पीछा करके उनको पकड़ने की कोशिश में लगे इस भागा दौरी के दौरान शिव ज़मीन में लुप्त हो गए। और जब वह पुनः अवतरित हुए तो उनके शरीर के टुकड़े अलग अलग जगहों पर बिखर गए। नेपाल के पशुपति नाथ में उनका मस्त गिरा था और तभी से इस मंदिर को तमाम मंदिरों में सबसे खास माना जाने लगा। केदारनाथ में बैल का कूबर गिरा था। बैल के की दो टांगे तुंगनाथ में गिरी ये जगह केदारनाथ के रास्ते में ही पड़ता है। बैल का नाभी वाला हिस्सा हिमालय के भारतीय इलाके में गिरा इस जगह को मध्य महेश कहा जाता है l यह एक बहुत ही शक्तिशाली मनीपूरक लिंग है। बैल के सींग जहां गिरे उस जगह को कल्प नाद कहते हैं। इस तरह शरीर के अलग अलग टुकड़े अलग अलग जगहों पर मिले उनकी शरीर के इस तरह बिखरने का वर्णन कहीं ना कहीं सात चक्र से जुड़ा हुआ है। पशुपति नाथ दो शरीर का सिर है एक शरीर दक्षिणी दिशा हिमालय के भारतीय हिस्से की ओर है दूसरा हिस्सा पश्चिमी दिशा की ओर है।

भक्तपुर अदभुत नगर

दोस्तों पशुपतिनाथ मंदिर से करीबन 13 की मी. दूर भक्तपुर है। यहां अवशेष से आपको जानने को मिलेगा कि कभी पूर्वी संस्कृति कैसी होती थी। भक्तपुर एक ऐसा शहर है जिसे इस तरह से तैयार किया गया था कि यहां आने वाले को हर कदम पर ईश्वरी शक्ति का आभास हो भक्तपुर का मतलब ही यही है तभी तो यहां पर हर पड़ाव पर वास्तव में मंदिर है यहां पानी पीने की जगह एक मंदिर है। साफ सफाई के जगह भी मंदिर है। और यहां तक कि बातें करने की जगह भी एक मंदिर ही है।

दोस्तों अगर आपने भी कभी पशुपति नाथ मंदिर के दर्शन किया हैं। तो अपना अनुभव हमसे ज़रूर शेयर करे।

धन्यवाद।।

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Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post you are going to tell the secret of Pashupati temple, if you like this post, then do comment and share.

Amazing Secrets of Pashupatinath Temple

Friends, today we will tell you about a temple in the world which was established before the creation of Vedas. Shivling is so mysterious that you will be surprised to hear about it.

Today you will know about the scheduled mystery of the world’s most mysterious Pashupati temple, which till date even the world of science has not understood.

half of Kedarnath

Nepal’s Pashupati Temple, about which it is believed that even today, Lord Shiva is present in it. The Pashupati temple is considered to be half of the Kedarnath temple, one of the twelve flames of Lord Shiva.

place

Pashupati Temple is located on the banks of the Bagmati River in Dev Patan village, about three decimal one kilometer northwest of Kathmandu, the capital of Nepal.

release from animal vagina

Regarding Pashupati Nath Temple, it is believed that whoever visits this place does not get animal yoni in any birth, but at the same time it is also believed that the person who visits Pashupati Nath first gets Nandi. If this happens, then that person is sure to get an animal vagina.

The water from the same ghat is taken to the temple.

There is a ghat outside the Pashupati Nath temple, which is known as Arya Ghat, since mythological times, there is a provision to carry only the water of this ghat inside the temple. You cannot take water from any place inside.

Friends, you will be surprised to know that the Jyotirlinga of Pashupati Nath temple is a clever face. It is believed that this Paras is similar to stone, which can turn iron into gold. This temple has a total of four doors to reach the idol of Lord Shiva, those four doors are of silver. Just in front of the western gate is a huge statue of Lord Shiva’s bull Nandi, which is made of brass. The complex has many temples and statues of Vaishnava and Shaiva tradition.

Description of 4 faces of Shivling

Nepal’s Pashupati Nath temple is considered to be the most prominent of all the temples in some sense. Pashupati Nath is actually a four-faced linga. These four faces are the four basic principles of Tantra Vidya, some people also believe that the basic principles of the four Vedas also originated from here. It is believed that this linga was established even before the Vedas were written.

mythological beliefs

Friends, there is also a mythological belief related to the Pashupati Nath temple, according to which the Pandavas were very sad due to killing their own brothers after the battle of Kurukshetra. They had killed their brothers and relatives, it is also called gotra slaughter, they were remorseful for their actions and they were also feeling very guilty.To free himself from this defect, he set out in search of Lord Shiva, but Lord Shiva did not want him to be freed so easily from the heinous scandal he had committed. But seeing the Pandavas near him, he killed a bull. assumed the form and tried to run away from there but the Pandavas came to know of their secret and they chased them and tried to catch them. During this run, Shiva disappeared into the ground.And when he reappeared, the pieces of his body were scattered in different places. His head had fallen in Pashupati Nath of Nepal and since then this temple was considered to be the most special among all the temples. The hump of a bull had fallen in Kedarnath. Two legs of the bull fell in Tungnath, this place falls on the way to Kedarnath. The navel part of the bull fell in the Indian region of the Himalayas, this place is called Madhya Mahesh.It is a very powerful manipulkar linga. The place where the horns of the bull fell is called Kalpa Naad. In this way, different pieces of the body found at different places, the description of their disintegration of the body is somehow connected with the seven chakras. Pashupati Nath is the head of two bodies, one body is towards the southern direction of the Indian side of the Himalayas, the other part is towards the western direction.

Bhaktapur wonderful city

Friends, about 13 km from Pashupati temple. far away Bhaktapur. From the remains here, you will get to know how the Eastern culture was once. Bhaktapur is such a city that was prepared in such a way that the person who comes here can feel the power of God at every step, this is the meaning of Bhaktapur, that is why there is actually a temple at every stop here, there is a temple instead of drinking water. Is. There is also a temple in place of cleanliness. And even the place to talk is also a temple.

Friends, if you have ever visited Pashupati Nath Temple. So do share your experience with us.

Thanks you

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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