हरतालिका तीज कब मनाया जाता है। हरतालिका तीज की कथा lhartalika vrat katha l hartalika vrat 2022

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हरतालिका तीज कब मनाया जाता है

हरतालिका तीज कब मनाया जाता है। हरतालिका तीज की कथा lhartalika vrat katha l hartalika vrat 2022

दोस्तों भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया पक्ष को हरतालिका तीज का त्योहार मनाया जाता है इस दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं इस साल हरतालिका त्योहार 30 अगस्त 2022 को मनाया जाएगा ।

हरतालिका तीज की कथा

दोस्तों सबसे पहले इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था तो सुनते हैं हरतालिका तीज की व्रत कथा दोस्तों हरतालिका तीज कथा के अनुसार शिव जी ने माता पार्वती को इस व्रत के बारे में विस्तार पूर्वक समझाया था मां गौरा ने माता पार्वती के रूप में हिमालय राज के घर जन्म लिया था बचपन से ही माता पार्वती भगवान शिव को वर के रूप में पाना चाहती थी और उसके लिए उन्होंने कठोर तप किया बारह सालों तक निराहार रहकर उन्होंने कठोर तप किया

ये सब देखकर उनके पिता बहुत दुखी थे एक दिन नारद जी ने उनके पिता से आकर कहा कि पार्वती के कठोर तब से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु आपके पुत्री से विवाह करना चाहते हैं नारद मुनि की बात सुनकर महाराज हिमालय बहुत प्रसन्न हुए उधर भगवान विष्णु के सामने जाकर नारद मुनि बोले महाराज हिमालय अपनी पुत्री पार्वती का विवाह आपसे करवाना चाहते हैं भगवान विष्णु ने भी इसके अनुमति दे दी फिर माता पार्वती के पास जाकर नारद जी इसके सूचना दी कि आपके पिता ने आपका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया है यह सुनकर माता पार्वती बहुत निराश हुई उन्होंने अपनी सखी को बताया की वह भगवान शिव को पाने के लिए ये व्रत कर रहे हैं

माता पार्वती के इच्छा अनुसार उनके पिता महाराज हिमालय की नजरों से बचाकर उनकी सखी माता पार्वती को घने सुनसान जंगल में स्थित एक गुफा में छोड़ दिया यही रहकर उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप शुरू किया जिसके लिए उन्होंने रेत से एक शिवलिंग की स्थापना की संयोग से हस्त नक्षत्र में भाद्रप्रद की शुक्ल पक्ष की तृतीया का दिन था जब माता पार्वती ने शिवलिंग की स्थापना की थी ।

इस दिन नीरजला उपवास रखते हुए उन्होंने रात्रि में जागरण भी किया था उनके कठोर तप से भगवान शिव प्रसन्न हुए और माता पार्वती को उनकी मनोकामना पूर्ण होने का वरदान दिया अगले दिन अपनी सखी के साथ माता पार्वती ने व्रत का पालन किया और समस्त पूजा सामग्री को गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया उधर मातापार्वती के पिता भगवान विष्णु को अपनी बेटी से विवाह करने का वचन दिए जाने के बाद पुत्री के घर छोड़ देने से बहुत ही व्याकुल थे।

वह माता पार्वती को ढूंढते हुए उस स्थान तक जा पहुंचे जहां माता पार्वती थी इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें अपना घर छोड़ देने का कारण बताया और भगवान शिव से विवाह करने का अपना संकल्प और भगवान द्वारा मिले वरदान के बारे में भी बताया इसके बाद माता पार्वती के पिता हिमालय ने भगवान विष्णु से माफी मांगी और वे भगवान शिव और माता पार्वती का के विवाह के लिए राजी हो गए कुछ समय बाद उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह पूरे विधि विधान से किया था।

मान्यता है इस दिन जो महिलाएं विधि विधान और पूर्ण निष्ठा से इस व्रत को करती दी हैं वे मन चाहे वर को प्राप्त करती है साथ ही यह पर्व दंपत्य जीवन में खुशी बरकरार रखने के उद्देश्य से भी मनाया चाहता है ।

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धन्यवाद

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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