सबसे पहले कौन कर जाता है मैहर माता की पूजा l maihar mata temple l maihar mata ka mandir

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हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट मे आपको मैहर माता के रहस्य मंदिर के बारे बताने जा रहे यह पोस्ट आपको अच्छा लगे तो कॉमेंट और शेयर जरूर करे।

दोस्तों क्या यह संभव है कि किसी मंदिर की पूजा पाठ करने के बाद जब मंदिर को बंद करके अच्छे से ताला लगाकर सभी अपने घर चले जाए तो मंदिर के अंदर से घंटी और पूजा करने की आवाज़ें आती है । वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ऐसा संभव नहीं है।

मैहर माता का अदभुत एवम रहस्यमय मंदिर

सबसे पहले कौन कर जाता है मैहर माता की पूजा l maihar mata temple l maihar mata ka mandir

दोस्तों आज आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी देंगे जहां मंदिर का दरवाजा बंद होने के बाद मंदिर के अंदर से एक घंटी और पूजा करने की आवाज साफ साफ सुनाई देती है इस मंदिर में आने वाले सभी भी लोग दरवाज़े से आश्चर्यचकित हो जाते हैं जब इस मंदिर की सबसे पहली आरती पहले से हुई मिलती है जी हां यह बिल्कुल सत्य है।जब यह बात वैज्ञानिकों के कानों तक पहुंची तो उन्होंने इस मंदिर पर शोध किया पर वे नाकामयाब रहे और वे यहां पर होने वाली चमत्कार को मैहर माता मंदिर की उन रहस्य के बारे में जिसे जितना सुलझाने की कोशिश की गई वो उतना ही उलझता चला गया ।

दोस्तों मध्य मध्यप्रदेश प्रदेश की जबलपुर जिले में मैहर की माता शारदा का प्रसिद्ध मंदिर है मान्यता है।जब मंदिर से दरवाज़े बंद करके सभी पुजारी नीचे आ जाते हैं तो यहां मंदिर के अंदर से एक घंटी और पूजा करने की आवाज़ आती है पर वो कौन है जो इस मंदिर में तब आता है जब मंदिर दरवाज़े बंद हो जाते हैं आखिर क्या रिश्ता है उसका इस मंदिर के साथ और आखिर क्यों वो इस मंदिर में घंटी बजाता है और मंदिर में स्थापित माता की आरती भी करता है चलिए जान लेते हैं कि यहां के लोग इसके बारे में क्या कहते रहे हैं ।

इस मंदिर की पौराणिक मान्यताए

दोस्तों पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां पर आज भी आल्हा और उदल माँ शारदा की पूजा करने के लिए सबसे पहले पहुंचते हैं।आल्हा और उदल कौन है आल्हा और उदल महाभारत में स्थित बुंदेलखंड के सेनापति थे और वे अपनी वीरता के लिए भी विख्यात थे हालांकि छोटे भाई का नाम उदल था जगनीर के राजा जगनित ने आल्हा खंड नामक एक काव्य रचा था उसने इन दोनों वीरो की 52 लड़ाई की गाथा को वर्णित किया है ।

उदल ने अपनी मातृ भूमि की रक्षा करते हुए पृथ्वी राज चौहान से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए आल्हा अपने छोटे भाई की वीरगति की खबर सुनकर अपना आपा खो बैठे और पृथ्वी राज चौहान की सेना पर मौत बनकर टूट पड़े आल्हा के सामने जो भी आया वो मारा गया लगभग एक घंटे के घनघोर युद्ध के बाद पृथ्वीराज चौहान और आल्हा आमने सामने थे दोनों में भीषण युद्ध हुआ पृथ्वीराज चौहान बुरी तरह घायल हो गए उसके बाद आल्हा के गुरु गोरख नाथ के कहने पर पृथ्वीराज चौहान को जीवन दान दे दिया और बुंदेलखंड खंड के महा योद्धा आल्हा ने नाथपंथ स्वीकार कर लिया और वैरागी बन गए ।

माता के परम भक्त

आल्हा और उदल मैहर माता के परम भक्त थे और यही कारण है कि वे आज भी वह इस मंदिर में आते हैं और माता की पूजा भी
करते हैं मंदिर परिषद में भी ऐतिहासिक महत्व के अवशेष आज भी आल्हा और पृथ्वीराज चौहान की जंग की गवाही देते हैं मंदिर के पंडित कहते हैं कि आल्हा की भक्ति से प्रश्न होकर मैहर माता ने आल्हा को अमर होने का वरदान दिया था।

कौन करता है सबसे पहले माता की पूजा

दोस्तों लोगों की माने तो आज भी रात को मंदिर की आरती के बाद साफ सफाई का काम होता है और फिर मंदिर के सभी दरवाज़े बंद कर दिए जाते इसकी बावजूद जब मंदिर को पुनः खोला जाता है तो मंदिर में मां की आरती और पूजा किए जाने के सबूत मिलते है आज भी यही मान्यता है कि माता शारदा के हर दिन सबसे पहले आल्हा और उदल ही करते हैं इस रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों की टीम भी इस मंदिर में जा चुके है उन्हें तमाम सारे कैमरा लगाने के बाद भी इस मंदिर का रहस्य अब भी बरकरार है कि यहां पर सुबह कौन आता है और इस मंदिर में पूजा कौन करता है।

इस मंदिर की खोज किसने की

दोस्तों दोनो भाइयों ने ही सबसे पहले जंगलों के बीच मां शारदा देवी के इस मंदिर की खोज की थी आल्हा ने यहां पर बारह वर्षों तक तपस्या की थी दोस्तों इस मंदिर को मैहर शक्ति पीठ भी कहा जाता है मैहर का मतलब है मां का हार । माना जाता है कि यहां माता सती का हार गिरा था इसलिए इस मंदिर को शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है।

आश्चर्य से भरा है यह मंदिर

मैहर केवल शारदा मंदिर के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है बल्कि यह चारों ओर प्राचीन धरोहर बिखरी पड़ी है मंदिर के ठीक पीछे है आल्हा और उदल के आखडे हैं तथा यहां पर एक तालाब और भव्य मंदिर स्थित हैं जिसमें अमृत का वरदान प्राप्त आल्हा की तलवार उसी के विशाल प्रतिमा के हाथ में थमाई गई है दोस्तों आपको जानकारी आश्चर्य होगा कि माता के कहने पर आल्हा अपनी तलवार की नोक को टेड़ी करके माता को समर्पित कर दिया था और इस तलवार की नोक आज तक कोई भी ठीक नहीं कर पाया।

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Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post you are going to tell about the secret temple of Maihar Mata, if you like this post, then do comment and share.

Friends, is it possible that after reciting the worship of a temple, when everyone goes to their house after closing the temple and locking it properly, then the bells and the sounds of worship come from inside the temple. This is not possible from a scientific point of view.

The wonderful and mysterious temple of Maihar Mata

Friends, today we will inform you about a temple where after the door of the temple is closed, the sound of a bell and worship is clearly heard from inside the temple. The first aarti of this temple is found already, yes it is absolutely true.When this matter reached the ears of the scientists, they did research on this temple but they were unsuccessful and they got confused about the miracle happening here about the mystery of Maihar Mata temple, the more they tried to solve it.

Friends, there is a famous temple of Maihar’s mother Sharda in Jabalpur district of Madhya Pradesh Pradesh. When all the priests come down after closing the doors of the temple, then there is a bell from inside the temple and the sound of worship, but who is she? who comes to this temple When the temple doors are closed, what is his relation with this temple and after all, why does he ring the bell in this temple and also perform the aarti of the mother established in the temple, let’s know what the people here keep saying about it.

Mythological beliefs of this temple

Friends, according to mythological beliefs, even today, Alha and Udal reach here first to worship Mother Sharda. Who are Alha and Udal Alha and Udal were the commanders of Bundelkhand located in the Mahabharata and they were also famous for their valor, although small. The brother’s name was Udal, Jagnit, the king of Jagnir, composed a poem called Alha Khand, he narrated the saga of 52 battles of these two heroes.

Udal attained Veergati while fighting with Prithvi Raj Chauhan while protecting his mother land.Whoever came was killed, after a fierce battle of about an hour, Prithviraj Chauhan and Alha were face to face, both of them had a fierce battle, Prithviraj Chauhan was badly injured, after that, at the behest of Alha’s guru Gorakh Nath, donated life to Prithviraj Chauhan. And Alha, the great warrior of Bundelkhand division, accepted the Nathpanth and became a recluse.

Mother’s devotee

Alha and Udal were great devotees of Maihar Mata and this is the reason why they still come to this temple and worship the mother.Even today in the temple council, the remains of historical importance testify to the battle of Alha and Prithviraj Chauhan.

Who worships the mother first

If friends are to be believed, even today the cleaning work is done after the aarti of the temple and then all the doors of the temple are closed, despite this, when the temple is reopened, then there is a ritual of worshiping the mother in the temple. Evidence is found even today It is believed that Aalha and Udal are the first to do every day of Mata Sharda, to solve this mystery, the team of scientists has also gone to this temple, even after installing all the cameras, the mystery of this temple is still intact that here But who comes in the morning and who does the worship in this temple.

who discovered this temple

Friends, both the brothers were the first to discover this temple of Mother Sharda Devi amidst the forests, Alha did penance here for twelve years. Friends, this temple is also called Maihar Shakti Peeth, Maihar means mother’s necklace. It is believed that the necklace of Mata Sati fell here, hence this temple is known as Shaktipeeth.

This temple is full of wonder

Maihar is not only famous for the Sharda temple, but the ancient heritage is scattered all around it, right behind the temple are the doors of Alha and Udal, and a pond and a grand temple are located here, in which the sword of Alha, who received the boon of nectar, belongs to him. Friends, you will be surprised to know that at the behest of the mother, Alha had crooked the tip of his sword and dedicated it to the mother and till date no one has been able to fix the tip of this sword.

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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