नाग पंचमी की कथा l naag panchami kyo manaya jata hai

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हैलो दोस्तो मेरा नाम है हितेश कुमार इस पोस्ट मे आपको नाग पंचमी के कथा के बारे में जानकारी देने वाले है है। यह पोस्ट आपको अच्छा लगे तो कॉमेंट और शेयर जरूर करे।

नाग पंचमी की कथा

श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की पंचम तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाते हैं सनातन हिंदू धर्म में नागो को बहुत ही उच्च स्थान दिया गया है शिव जी वासुकी नाग को गले में धारण करते हैं और भगवान विष्णु शेष नाग पर विराजमान है नाग देवता की मदद से ही समुद्र मंथन सफल हो पाया था यही कारण है कि हिंदू में नागो की पूजा की जाती है उन्हें प्रसाद चढ़ाया जाता है और उन्हें अत्यंत शुभ माना जाता नागो के देवता भगवान शिव को माना जाता है इसलिए शिव के साथी नागो पर फ़ूल चढ़ाया जाते हैं माना जाता है कि सर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

आज मैं आपको नाग पंचमी की कथा सुनाने जा रहे हैं जो गुरुड पुराण में बताई गई है।

एक समय की बात एक गाँव में एक औरत दूध बेचा करती थी उसकी एक ही पुत्री थी जो बहुत ही संस्कारी और सरल स्वभाव की थी उसकी माँ का नियम था कि वह रोज़ दूध को उबाल कर और उसे ठंडा करके अपने घर के आंगन में रखती थी और घंटी बजती थी और जितने भी सर्प होते थे वह दूध पी लेते थे उसने अपने बेटी से कहा था कि सर्प ही तुम्हारे भाई है अगर मैं ना रहूं तो तुम अपने भाइयों को याद कर लेना कुछ समय बाद जब उसकी बेटी बड़ी हो जाती है और इसकी शादी एक बहुत बड़े खानदान में होती है जिस गांव में उनकी शादी होती है उस गांव की मुखिया के सात बेटे थे उनके सबसे से छोटे बेटे के साथ इसका विवाह हो जाता है सातवां में छोटी बहु सबसे ज़्यादा संस्कारी थी उसे बाकी की बहु ताना मारती थी कि तेरा तो इस दुनिया में कोई नहीं एक मां थी और वह भी मर गई ऐसा सुनकर भी वो उनको कुछ भी नहीं कहती थी अब श्रावण का महीना चालू हुआ था सारी बहु बहुत ही खुश थी उनके भाई उन्हें लेने के लिए आने वाले थे वे पूरा महीने अपने मायके में आराम से व्यतीत करने वाली थी सबसे बड़ी बहु छोटी बहु के पास आती है और कहती है तुम्हारा तो कोई भाई नहीं है अब तुम क्या करोगी पूरा श्रावण यही बैठे रहना पड़ेगा यह सुनकर छोटी बहु बहुत दुख होती है वो बहुत रोती है और रोते रोते पेड़ के पास जाकर बैठ जाती है तभी पेड़ से शेषनाग बाहर आते हैं और उसे याद कराते हैं कि तुम्हारी माँ मुझे दूध पिलाया करती थी और तुम मेरी बहन की तरह हो तुम चिंता मत करो तो मेरे साथ नाग लोक चलो बहन अपने भाई के घर यह उसका अधिकार होता है शेषनाग मनुष्य का रूप धारण करके छोटी बहु को उसके ससुराल से अपने नाग लोक पर ले जाते हैंउसे नाग माता से भी उसको बहुत प्यार मिलता है वह शेषनाग के छोटे छोटे सर्प हुए थे जिन को हर रोज़ ठंडा दूध पिलाया करती थी

एक दिन की बात है छोटी बहु को कोई पता नहीं था कि दूध ठंडा नहीं हुआ था और उसने गलती से सर्पों को दूध पीने के लिए बुला लिया जैसे सर्पों ने दूध पीना शुरू किया उनका मुंह जल गया और वह बहुत ही क्रोधित हो गए हैं वो छोटी बहु डसना चाहते थे पर नाग माता के समझाने पर उन्होंने छोटे बहु को छोड़ दिया और शेषनाग उन्हें अपने ससुराल छोड़ने आए इस वादे के साथ ही अगले श्रावण वह फिर आऐंगे इधर छोटे सर्प भी बड़े हो गए थे पर वह छोटी बहु से बदला लेना चाहते थे उन्होंने सोचा कि इस बार श्रावण में उसके घर जाएंगे और वही उसे डस लेंगे श्रावण का महीना शुरू हो गया छोटी बहु को पता था कि उसके भाई आने वाले हैं इसलिए उसने एक दिनपहले ही अपने भाइयों के लिए ठंडा दूध मीठी रोटी फ़ल सब बनाकर कर रख दिया उसने अपने भाइयों के स्वागत के लिए घर के बाहर सर्प रंगोली बनाई और जैसे वह आए उन पर पुष्प की वर्षा की उन्हें कुंभ का तिलक किया फिर उन्हें ठंडा दूध मीठी रोटी और फ़ल खाया है और अपनी गलती के लिए माफी मांगी उसके बाद सर्प भाइयों को विश्वास हो गया कि उनका मुंह छोटी बहुत गलती से जल गया था इसलिए सभी ने खुश होकर छोटी को को बहुत ही सुंदर मोतियों का हार दिया और वचन भी दिया कि जो भी तुम्हारी तरफ प्रेम से ठंडा दूध पिला दोष मुक्त करेंगे तब से सावन महीने की शुक्ल पक्ष नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है जिससे नाग को भाई मानकर उनके लिए ठंडा दूध मीठी रोटी फ़ल आदि से उनकी पूजा करती है ।

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Hello friends, my name is Hitesh Kumar, in this post you are going to give information about the story of Nag Panchami. If you like this post then do comment and share.

story of nag panchami

Celebrates the festival of Nag Panchami on the fifth date of Shukla Paksha of Shravan month. Nagas have been given a very high position in Sanatan Hinduism. Shiva holds Vasuki Nag around his neck and Lord Vishnu is seated on Shesh Nag, helping the serpent god. From the very beginning, the churning of the ocean was successful, this is the reason why in Hindus, serpents are worshiped, they are offered prasad and they are given utmost importance.Lord Shiva, the god of serpents is considered auspicious, so flowers are offered to Shiva’s companions, it is believed that one gets freedom from snake defects.

Today I am going to tell you the story of Nag Panchami which is told in Gurud Purana.

Once upon a time a woman used to sell milk in a village, she had only one daughter, who was very cultured and simple in nature, her mother’s rule was that she used to boil milk and cool it and keep it in the courtyard of her house. And the bell used to ring and all the snakes there used to drink milk, he told his daughter that the snake is your brother if I don’t live You remember your brothers after some time when her daughter grows up and she is married in a very big family The younger daughter-in-law was the most cultured in the seventh, she used to taunt the rest of the daughter-in-law that you had no one mother in this world and she too died after hearing this. She did not tell them anything, now the month of Shravan had started, all the daughter-in-law was very happy, her brother was about to come to take her, she was going to spend the whole month comfortably in her maternal house, the eldest daughter-in-law comes to the younger daughter-in-law. and says your So there is no brother, what will you do now the whole Shravan will have to sit here, the little daughter-in-law is very sad to hear that she cries a lot and goes and sits near the tree crying, only then Sheshnag comes out of the tree and reminds her that Your mother used to give me milk and you are like my sister, don’t you worry, then come with me to Nag Lok, sister, to your brother’s house, it is her right to take Sheshnag in the form of a human and take the younger daughter-in-law from her in-laws’ house to her Nag Lok. carry away.He also gets a lot of love from Nag Mata, she was a small snake of Sheshnag, who used to give cold milk every day.

It is a matter of one day that the little daughter-in-law had no idea that the milk had not cooled down and she mistakenly called the snakes to drink milk. The younger daughter-in-law wanted to bite, but on the persuasion of Nag Mata, she left the younger daughter-in-law and with the promise that Sheshnag came to leave her in-laws’ house in the next Shravan.He will come again, here the small snakes had also grown up, but they wanted to take revenge on the younger daughter-in-law, they thought that this time they would go to her house in Shravan and they would bite her. So, a day before, he made cold milk, sweet bread, fruits and vegetables for his brothers, he made a snake rangoli outside the house to welcome his brothers.And as he came, showered flowers on them, gave them the tilak of Kumbh, then ate them cold milk, sweet bread and fruits and apologized for their mistake, after that the snake brothers were convinced that their mouth was burnt by a small mistake.That’s why everyone was happy and gave a very beautiful pearl necklace to the little one and also promised that whoever will free the blame by drinking cold milk with love on your side, since then the festival of Nag Panchami is celebrated in the month of Sawan, so that the snake gets brother. Assuming cold milk for them, sweet bread, fruits etc. worships them.

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Hitesh

हितेश कुमार इस साइट के एडिटर है।इस वेबसाईट में आप छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति, मंदिर, जलप्रपात, पर्यटक स्थल, स्मारक, गुफा , जीवनी और अन्य रहस्यमय जगह के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से सुंदर और सहज जानकारी प्राप्त करे। जिससे इस जगह का विकास हो पायेगा।

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