विरुपाक्ष इन हिंदी(virupaksha) मूवीस की full स्टोरी l virupaksha movie story in hindi

   विरूपाक्ष(virupaksha) मूवीस की full स्टोरी 

विरूपाक्षा(virupaksha) मूवीस की full स्टोरी l virupaksha movice story  in hindi

दोस्तों वैसे तो साउथ सिनेमा हमे कभी निराश नहीं करता लेकिन जो movie मैं आप के सामने लेकर आया हूं। ओ तेलगु सिनेमा की बहुत ही बेहतरीन movie होने के साथ साथ अपने आप में एक different और युनिक कॉन्सेप्ट पर बेस है। इसलिए हाल ही में पड़े पर्दे पर release किया गया है। इस लिए बिना किसी लंबी introduction के शुरू करता हूं। आज की ये movie जिसका नाम है वीरपक्षा और इसका हिंदी में अर्थ होता है डरावनी आँखें । 

मूवीस का ट्रेलर 

मूवीस की शुरुवात 

विरूपाक्षा(virupaksha) मूवीस की full स्टोरी l virupaksha movice story  in hindi

दोस्तों मूवीस की शुरुवात होती है।1979 से जहां रुद्रवनम गांव की हवेली में एक आदमी उसकी पैरालाइजा बीवी एक मरी हुई बच्ची को बीच में रखकर किसी विशेष पूजा और मंत्रो का उच्चारण कर रहे होते हैं कि उसी बीच वहां पहुंच जाते हैं गांव के   लोग जो उस दृश्य को देखकर घबरा जाते हैं। काला जादू होते हुए देख उस आदमी और औरत को बेहद पीटते है। और उन दोनो को एक पेड़ से बांध देते है। इस बीच उन दोनो का बेटा सभी को ऐसा करने से रोकता है। लेकिन कोई उसकी नहीं सुनता। वही आदमी और उसकी बीवी ऐसी हालत में भी मंत्रो का उच्चारण करते रहते है। जिसके बाद गांव के लोग दोनों के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर जिंदा उनको जला देते है। मरते मरते वो औरत गांव वालों को श्राप देती है कि बहुत ही जल्दी ये गांव कब्रिस्तान में बदल जाएंगे है। अगले दिन गांव का सरपंच और लोग मिलकर लड़के को एक

अनाथालय में भर्ती करवा देते है। लेकिन हम देखते हैं कि वो लड़का भी अपने कमरे में बैठे बैठे खिड़की से बाहर देख कर कोई मंत्र पड़ता रहता है।

अब सीन सिफ्ट होता है 12 साल बाद उस गांव में जहां एक बूढ़ा आदमी अपनी खेत में रखवाली के लिए रात में पहरेदानी  देने जाता है तभी एक कौआ वहा आ जाता है। और जोर जोर से चिलाने लगता है। वह आदमी काफी देर तक इंतजार करता है।और फिर जब वह उसको भागने के लिए प्रयास करता है तभी वह कौआ उस आदमी पर हमला कर देता है। अगले दिन जब उसका लड़का उसको देखने के लिए खेत पर आता है तो वह आदमी भी वहाँ मौजूद नहीं होता है।

अब सीन सिफ्ट होता है। एक हफ्ते बाद जहां सूर्या नाम का एक लड़का अपने भाई और मां के साथ उस गांव में आते है। दरसल उसकी माँ की काफी ज़मीन उस गांव में होती है। जिस पर गांव वाले अब वहा स्कूल बनाना चाहते हैं। इसलिए वो उस ज़मीन को गांववालों को देने के लिए वहा आती है। गांव में प्रवेश करने से पहले मरा हुआ कौआ उसकी कार में आकर टकरा जाता है। इसको देखकर उसकी मां डर जाती है और उसको एक अप्सगुन बताती है। हालाकि सूर्या उसको नजर अंदाज़ करता है। और कौवे को हटाकर गांव की तरफ आगे बढ़ जाता है। उधर गांव में पुजारी कुछ ही दिनों में होने वाले एक त्योहार पर मूहर्त निकाल रहा होता है। जहा गांव में मौजूद एक प्राचीन ग्रंथ का सहारा लेता है। दरसल गांव में उनके पूर्वज द्वारा लिखा हुआ एक ग्रंथ होता है। जिसमें हर चीज़ का समाधान लिखा होता है लेकिन जब भी कोई समस्या या खुशी का समय आता है। तब ये पुजारी उसी ग्रंथ में देखकर सब कुछ पता करता है। और वही बात सभी गांव वाले भी मानते है।अब सूर्या गांव पहुंच चुका है। जहां वो अपनी दूर की बड़ी बहन पार्वती के घर आती है। हम देखते हैं कि पार्वती की एक कान में दिक्कत है जिसमें वह बार बार दवाई डालती रहती है।अब उसी दिन सूर्या अपने भाई के साथ बाहर बैठ कर ठंडी हवा खा रहा होता है। तभी देखता है कि एक लड़की अपनी मुंह मे  कपड़ा बांध कर एक मुर्गी को चुरा ले जाती है। उसी बीच एक गांव वाला उसे देख लेता है और चोर चोर करके चिल्लाने लगता है। सूर्या उसको अकेले में पकड़ लेता है और उसको चोरी नही करने के लिए कहता है। लेकिन वो लड़की उसे चकमा देकर भाग जाती है। अगले दिन सूर्या अपनी मां के साथ गांव के सरपंच हरीश के घर जाता है।क्योंकि उसकी माँ को ज़मीन बेचने के लिए सरपंच से मिलना ज़रूरी होता है। बहुत दिनो बाद मिलने की वजह से सरपंच सूर्या की फैमिली को खाना खाने के लिए कहता है। थोड़ी देर बाद हरीश की बेटी नंदिनी वहा आती है।जिसे सूर्या देखकर हैरान हो जाता है।क्योंकि कल रात जो मुर्गा चोर लड़की की मुलाकात हुई थी। ठीक वैसी ही खुशुबू नंदिनी के पास से भी आ रही होती है। मौका पाकर सूर्या नंदिनी को रात के बारे में पूछता है। जिसमे नंदिनी कहती है की उस मुर्गे ने मेरे मुर्गे को हरा दिया था। इसलिए उसका बदला लेने के लिए मैंने वो मुर्गा चोरी कर लिया। सूर्या चोरी हुए मुर्गे के बारे में उससे पूछता है।तो वह हंसकर बोलती है कि वह तो तुम खा गए अभी अंदर जो तुमने चिकन खाया है वह उसी मुर्गे का तो था। यह सब बातें दोनों को एक दूसरे के करीब ले आती है। दोनो एक दुसरे को नज़रों ही नजरो में प्यार कर बैठते है।

विरूपाक्षा(virupaksha) मूवीस की full स्टोरी l virupaksha movice story  in hindi

अगले सीन में एक डॉक्टर को दिखाया जाता है जो नंदिनी को एक इंजेक्शन देने आता है। क्योंकि उसको बचपन से ही मिर्गी की बीमारी थी। इसलिए हर हफ्ते उसको इंजेक्शन लगाना ज़रूरी होता है।

अब सीन शिफ्ट होता है उसी बूढ़े आदमी पर जो कौवे के हमले के बाद से गायब था। देखने में ऐसा लगता है जैसे कि आदमी किसी अजीब सी बीमारी से ग्रस्त है।वही दूसरी तरफ हम देखते हैं कुमार नाम के लड़के को जो की किसी दूसरे गांव से इस गांव में अपनी प्रेमिका सुधा से मिलने आता है। दरसल सुधा नंदिनी के घर में काम करने वाले नौकर की बेटी होती है। इसलिए नंदिनी कुमार से मिलने सुधा की हर बार मदद करती है। अब हम देखते हैं सूर्या की माँ को जो पार्वती को अपना पुराना मकान आइसे ही दे देती है। वो कहती है इस गांव में मेरे बच्चे रहेंगे नहीं इसलिए मैं इस घर का क्या करूंगी तुम यहाँ हो इसलिए मैंने भी मकान तुम्हारे नाम पर कर दिया है। इस मौके पर नंदिनी भी पार्वती के घरपर मौजूद होती है। इसलिए सूर्या की मां की दरिया दिली को देखकर इमोसनल हों जाती है। इसके बाद सूर्या की मां नंदनी को उसके घर छोड़कर आने के लिए कहती है। रास्ते में सूर्या अपने प्यार का इजहार नंदनी से कर देता है। लेकिन नंदनी उसके इस प्यार को ठुकरा देती है।ऐसा नहीं था की वो सूर्या से प्यार नहीं करती थी,

लेकिन वह उस गांव को छोड़ना नहीं चाहती थी। उसे उस गांव से बहुत प्यार था। खैर अगले दिन गांव तक त्योहार आता है। जिसके लिए उस गांव के साथ साथ दूसरे गांव वाले भी वहां इकट्ठा होता है। इसी बीच अचानक से ओ बूढ़ा आदमी आ जाता है। उसे देखकर लगता है जैसे वो किसी और के काबू में हो गांव वाले उसको देखकर हैरान रह जाते हैं। क्योंकि सभी उसको पिछले एक हफ्ते से ढूंढ रहे थे। इसके बाद खून की उल्टियां करते हुए सीधा मंदिर में जाता है जहां उसकी मौत हो जाती है। सभी लोग यह देखकर बेहद डर जाते हैं क्योंकि पूजा के दिन ये सब होना अनर्थ होता है। पूजारी तुरन्त वो ग्रंथ मगाता है और इस समस्या का हल निकालता है। वो कहता है कि इस के मरने से मंदिर अपवित्र हो गया है। और गांव में मनहूस छाया छा गया है। इसलिए इस गांव में एकहफ्ते तक हर आदमी का आना जाना बंद करना होगा। पूजा के बाद गांव की सीमा में एक घेरा किया जाएगा और कोई भी आदमी ना तो उस घेरे के बाहर जायेगा और ना उसके अंदर आएगा। इसलिए जो लोग सभी गांव से बाहर जाना चाहते हो चले जाए। हम इस विधि को कल से शुरू करेंगे। पूजारी के ऐलान के बाद सरपंच हरीश गांव वालों को एकहफ्ते भर का अनाज देने लगता है ताकि इस हफ्ते के दौरान किसी को खाने की कोई समस्या न हो।इसी वजह से सूर्या की मां वहां से जाने का फ़ैसला करती है।लेकिन जाने से पहले सूर्या में नंदिनी से मिलना चाहता था। पर इतना वक्त नहीं था वही नंदिनी भी सूर्या से दूर होने के बारे में सोचकर परेशान हो रही होती है कि तभी उसे मिर्गी का दौरा पड़ जाता है। हरीश अपनी बेटी को ऐसी हालत में देखकर डॉक्टर को वहा बुलाता है। लेकिन उसके पास इंजेक्शन खत्म हो गया था इसलिए वह अपने क्लिनिक पर उस दवाई को लाने के लिए फोन करता है। उधर सूर्या अपनी मां और भाई के साथ गांव से निकल चुका होता है।तभी उसे रास्ते में एक आदमी मिलता है जिसका एक्सिडेंट हुआ होता है। उससे पूछने में पता चलता है कि यह वही clinic वाला बंदा था जो नंदिनी का injection लेकर जा रहा था। इसलिए सूर्या फौरन injection लेकर वापस गांव की तरफ निकल जाता है। जब वो वापस कदम गांव में रखता है। तब पुजारी गांव की सीमा को उस घेरे से cover कर रहे होता है।लेकिन जब तक doctor नंदिनी को इंजेक्शन लगा रहा होता है उतने समय में पुजारी पूरे गांव को cover कर देता है। जिसकी वजह से अब सूर्या वहां से वापस नहीं जा पता और पूरे एक हफ्ते के लिए गांव में रुक जाता है। उसी रात सुधा गांव से भागने का प्लान बनाती है क्योंकि वो और कुमार शहर जाकर अपनी नई ज़िंदगी शुरू करना चाहते थे। रात को गांव की सीमा को तोड़कर सुधा रेलवे स्टेशन चली जाती है। जहां कुमार उसका इंतज़ार कर रहा था। ट्रेन आने से पहले दोनो अपने फ्यूचर का प्लान करने लगते हैं। जिस बीच कुमार बात करते करते रेलवे ट्रेक पर चला जाता है। जहां एक  train उसको कुचल देती है। सुधा यह सब देखकर कर अपना होश खो बैठती है। वो बेसुध हालत में अपने गांव आती है। अब देखते हैं जैसे ही सुधा गांव में वापस होती है वैसे ही पूरे गांव की मसाले एक साथ बुझ जाती है जैसे किसी साए ने पुरे गांव को घेर लिया है उधर सुधा गांव में पहुंचती है।और खुद के फेस को मधुमक्खी के छत्ते में डाल देती है।

वही दुसरे दिन नंदिनी सूर्या को उसकी जान बचाने के लिए thank बोलती है और कहती है कि हम कभी भी मिल नहीं पाएंगे क्योंकि मैं इस गांव को कभी नहीं छोड़ सकती क्योंकि ये गांव ही मेरा घर है।इसके बाद वह अपने गले से एक लॉकेट निकाल कर सूर्या के गले में डालती है और कहती है यह मेरी निशानी है। जो हमेशा तुम्हारे दिल के पास रहेगी। इस तरह समझ लेना की मैं तुम्हारे पास हूं। उसी रात पार्वती अपने बेटे को कुछ पढ़ा रही होती कि तभी उसे गांव के एक कोने से किसी आदमी के रोने की आवाज़ आती है। वह जाकर देखती है तो उसे गांव का ही एक आदमी दिखता है जिसका नाम सूरी होता है। जिसे पूछती हैं की सूरी भाई क्यू रो रहे हो जिसपे सूरी कुछ नही बोलता और चाकू से अपनी गर्दन काट लेता है। यह देखकर पार्वती की चीखने लगती है जिस के बाद गांव के लोग इकट्ठा हो जाते है। सभी को लगता है कि सूरी के ऊपर कर्ज था इस वजह से उसने आत्महत्या कर ली होगी। क्योंकि 8 दिनो से काम पर जाकर वो पैसे नहीं कमा सकता था।

अगली सुबह पार्वती बहुत अजीब सा बिहेव करने लगती है जैसे वह अपने होश में ना हो और इसी बीच वो अपने कान में सुई डालकर suicide कर लेती है और उसकी मौत को देखकर बेहद दुखी होता है क्योंकि एक दिन में लोगों ने दो मौत देखी थीं। इसी बीच सभी लोग गांव में हो रहे अजीबो गरीब घटनाओं से भी डर रहे थे। सभी चीज़ों को देखते हुए पूजा को कुछ शक होने लगता है। और वह सभी से कहता है कि घर घर जाकर पता करो की हर आदमी भी अपने घर पर है या नहीं किसी ने उस घेरे को तो नहीं तोड़ा है। उधर सुधा के माता पिता अपनी बेटी को लेकर परेशान थे। लेकिन जब सभी लोग एक दूसरे के घर जाकर लोगों के बारे में पता कर रहे थे तो एक गांव वाले ने उनसे सुधा के बारे में पूछा तो उसकी मां ने कहा कि वो घर पर है नहा रही है। जिसे सुन गांव के लोग वहां से चले जाते है। पार्वती के अंतिम संस्कार के लिए लोग गांव से बाहर नहीं जा सकते थे इसलिए पुजारी सभी को एक पुराने घर के पेड़ के नीचे अंतिम संस्कार करने को बोलते है। वही सूर्या की नजर पार्वती की कान में पड़ती है। उसको याद आता है कि पार्वती दीदी की दुसरे कान में दिक्कत था लेकिन जिस कान में उन्होंने सुई डाली वो उनका दूसरा कान था। इसलिए सूर्या समझ जाता है कि यह कोई suicide नहीं है। वही गांव के बाहर एक अघौरी बाबा मरे हुए कौवे को देखता उसकी आंख में देख कर पता चलता हैं की समाने वाले गांव में कोई साया है। इसलिए वो गांव की ओर चला आता है। वो सबसे आकार कहता है की तुम्हरा ये घेरा किसी काम का नही क्युकी किसी ने इसे तोड़ा है। अब तुम लोग सुरक्षित नहीं हो अब मुझे तुम लोग की मदद करने दो लेकीन पुजारी उसके मदद लेने से मना कर देता है। है और पूजारी कहता है गांव में सभी लोग हैं और कोई भी गांव से बाहर नहीं गया है। एसलिए हम इस मामले को खुद ही देख लेगे। इसके बाद सूर्या और doctor खुद की छानबीन करने लगते हैं। कि आखिर लोग सुसाईड क्यों कर रहे हैं। और तभी रास्ते में उन्हे अजीब सी स्मेल आती है। और उसे पता करने पर उन्हें सुधा की लाश मिलती है। जिसे देखते दोनो की रोगटे खड़े हो जाते है। तभी सूर्या सुधा की बैग की तलाशी लेता है जिसमे उसे train का ticket मिलता है। तभी वो देख के समझ जाता है की सुधा कुमार के साथ भागने वाली थी।तभी सूर्या रेलवे स्टेशन में बात कर उसके ट्रेबल हिस्ट्री के बारे में पूछता है। और उसे पता चलता है कि कुमार की मौत तो उसी रात हो गई थीं। जिसके बाद सुधा station से पता नहीं कहा चली गईं। अब सूर्य को सारी कड़ियां मिलती हुई नज़र आती है। वो फौरन पुजारी के पास पहुंचता है और उन्हें बताता है। उस घेरे को तोड़कर सुधा कुमार के साथ भागने वाली होती है जब कुमार को train ने कुचला तो सुधा वापस गांव आ गई जब सुधा ने अपने सर मधुमक्खी के छत्ते में डाला तो उसे सूरी ने देखा और सूरी ने अपने गले को काटा पार्वती ने देखा था और पार्वती ने सुसाईड किया उसको जिसने भी पहले देखा होगा अब उसका नंबर है।

तबी सूर्या को पता चलता हैं की पार्वती को मरते हुए नंदिनी ने पहले देखा था तो सूर्या नंदिनी के घर की तरफ़ भागता है। वहा जाकर देखता है कि नंदिनी एक पुराने घर के कुएं के ऊपर अजीब तरीके से खड़ी है। उससे पहले अगर वो कुछ कह पाता नंदिनी उसमे छलांग लगा देती है। अब सूर्या उसे कुएं से निकालता है। लेकिन उसे दौरे पड़ने लगते है। लेकिन डॉक्टर उसकी तबियत को संभाल लेता है। तब पुजारी सभी को बताता है की सुधा के घेरा तोड़ने के कारण उस औरत का श्राप सभी के ऊपर हावी हो रहा है। इसलिए जल्द ही इसका ईलाज करना होगा।

उसके बाद सूर्या डॉक्टर से पूछने लगता हैं की ये किस औरत की बात कर रहा है फिर वो बताता हैं की 12 साल पहले इस गांव में एक महामारी फैल गई थी। जिसकी वजह से धीरे धीरे सभी बच्चों की मौत हो रही थी लेकिन कोई भीं उस महामारी को रोक नहीं पा रहा था। उसी बीच वेगटा नाम का आदमी गांव में रहने आया था। थोड़े दिनो बाद अपने हवेली में एक मरी हुई बच्ची को लेकर तंत्र विद्या कर रहा था। जिसको देखकर गांव वालो ने अंदाजा लगा लिया की उसके काले जादू के वजह से ही  गांव से वो महामारी नही जा रहीं थी। इसलिए गांव वालो ने उसको और उसकी बीवी को जिंदा जला दिया और उसके बेटे को अनाथ आश्रम में डाल दिया। मरते वक्त उस औरत ने जो श्राप दिया था पुजारी उसकी बात कर रहे थे। उस घटना के बाद हवेली से कई दिनो तक आवाजे आती रही। जिसके बाद पुजारी ने गांव वालो के साथ मिलकर पूजा किया और हवेली के दरवाजे को मंत्रो से बंद कर दिया जिससे आवाजे आना भी बंद हों गया।

ये सब बाते सुनकर सूर्या डॉक्टर के साथ उस हवेली में आ जाता है। क्योंकि उसे लगता है जहां से इन सब कि शुरुवात हुआ है वहा से हल भी मिलेगा। अन्दर जाकर उन्हें पता चलता है की कुछ देर पहले यहां कोई आया था क्योंकि चीजे अस्त व्यस्त थी।

लेकीन वहां धूल नही थी इसका मतलब वहा कोई साफ सफाई कर रहा था। सूर्या को वहा वेगटा और उसकी फैमिली की फोटो दिखती है। सूर्या को वहा एक डायरी मिलती है। जिसमे वेगटा ने काफ़ी रिसर्च करके लिखा होता है। उसने ये साबित कर लिया होता है।अगर सही मंत्र और विधि का प्रयोग किया जाए तो मरे हुए व्यक्ति की आत्मा को एक निश्चित समय के अंदर उसके शरीर में बुलाया जा सकता है। वही दूसरी तरफ पूजारी अपनी ग्रन्थ में श्राप से लड़ने का रास्ता ढूढने लगता है। और वह कहता है की नंदिनी को एक बड़ी सी लकड़ी की पेटी में बंद करके इस तरह से उसे जिंदा जलाना होगा जिससे उसकी मौत को कोई न देख पाए। और उस औरत की आत्मा मुक्त हो जाए।

ऐसा करने के लिए जैसे ही गांव वाले नंदिनी को लेकर आते है। वैसे ही सूर्या वहा पहुंचकर सभी से लड़ने लगता है। वो कहता है मेरे होते हुए नंदिनी को कोई हाथ नहीं लगा सकता। सूर्या गांव वालों से कहता है की आप मुझे 8 घंटे दीजिए। मैं गांव को इस श्राप से मुक्त करने का रास्ता ढूंढ लूंगा।और वहां से जाने लगता है।सूर्या डॉक्टर से कहता है की इन सब के पीछे वेगटा के बेटे का हाथ हो सकता है तो उसे पता करने के लिए मैं अनाथ आश्रम जा रहा हुं। गांव के बाहर उन्हे दूसरे गांव के लोग रोक लेते है वो नही चाहते की उनके गांव का श्राप उनके गांव में आ जाए ।लेकीन सूर्या अपनी गाड़ी लेकर तेजी से वहा से निकल जाता है।और अनाथ आश्रम में पहुंचता है। वहा उसे पता चलाता है की वह अनाथ आश्रम तो काफी पहले ही बंद हो गया था।सूर्या को  वहां के मालिक बताते है की वेगटा के बेटे का नाम भैरवा था वो किसी से बात नही करता था और हर वक्त किसी न किसी मंत्र को गुनगुनाता था। और सिर्फ ओ कौओं से बात किया करता था। इसलिए सभी उसके अजीब हरकतों से परेशान थे।

वो बार बार अपनी कमरों से चल जाता और रात को अपने कमरे में आ जाता। एक दिन मेरे पति ने ऐसा करने का उसको कारण पूछ तो उसने मेरे पति पर ही जादू कर दिया और उनको आज तक पैरालिसिस है। उस दिन के बाद भैरवा कभी वापस नही आया।और हमने भी कभी उसकी तलाश नहीं की ये सुनकर सूर्या जंगल के तरफ उसकी तलाश में निकल जाता है। जहां एक जगह उसे बहुत से अघोरी दिखते है। जहां वो कोई विशेष पुजा कर रहें होते है। तभी सब सूर्या को मंत्रो से पास आने से रोकते है लेकिन कोई भी मंत्र सूर्या पे काम नही करता जिसके बाद सभी अघोरी सूर्या के साथ हाथापाई करने लगते है। तभी अघोरी का सरदार सूर्या को छोड़ने के लिए कहता है। ये वही अघोरी होता है जो गांव में आया था सूर्या उन्हे सभी बात बताता है तो वो हैरान रह जाता है। वो कहता है की कलयुग में इस सिद्धि को पाने के लिए कठोर मेहनत और जिगर चाहिए। अगर सच में कोई ये कर रहा है तो वो सच में काफी शक्तिशाली है।

अघोरी सूर्या से कहता है की आईसी सिद्धि को पाने के लिए आदमी को किसी गुप्त जगह की जरुरत हुई होगी जहां एक परिंदा भी न आ सके।

अघोरी सूर्या को एक गुफा में लेकर जाता है। वहा जो होता है उसे देखकर अघोरी के होश उड़ जाते है। सूर्या को वही निशान वहा दिखते है जो वेगटा के रिसर्च बुक में थे। इसका मतलब यही था की भैरव ही वहा आकर अपनी सिद्धि हासिल कर रहा था। अब उसके पास आईसी सिद्धि थी जिसमे आंखो के जरिए वो लोगो के प्राण ले सकता था। इसी बीच सूर्या को एक ग्रन्थ मिलता है जिसको देखकर और भी परेशान हो जाता है। उसको पता चलता है की ये ग्रंथ गांव का असली ग्रन्थ है। जो वहा पूजारी के पास है वो एक नकली ग्रन्थ है। इसका मतलब गांव में कोई ऐसा आदमी मौजूद है जो भैरवा का साथ दे रहा था। उसने ये सब करने में उसकी मदद की थी।तभी एक बैग दिखाई देता है जिसमें एक लड़के की आईडी और फोटो दिखाई देता है ये लड़का कोई और नहीं कुमार होता है। यहां कुमार का पुरा नाम पता चलता है जो होता है भैरव कुमार धीरे धीरे अघोरी और सूर्या को सब कुछ समझ आने लगता है अघोरी कहता है। कुमार ही भैरव है जिसने सुधा को अपने प्यार की जाल में फसाया और जान बूझकर आत्म हत्या की और एक एक करके सभी के शरीर में जाकर उन्हें मार रहा है। उसने ये सिद्धि हासिल कर लिए है। तभी अघोरी कहता है गांव में उस आदमी को ढूढना पड़ेगा जो भैरव की मदद कर रहा है। अगर उसका पता चल गया तो यह लोगो के करने का चैन टूट जाएगा।ये सिद्धि अकेले एक आत्मा पूरी नहीं कर सकती। जरूर कोई ऐसा है उस गांव में जो मंत्रो से इस सिद्धि को गांव में फैला रहा है।

उधर गांव में देर होते ही नंदिनी को लकड़ी की पेटी में डालने लगते है। उसका पिता हरीश चाहते हुए भी लोगो को नही रोक पता। वही सूर्या अपनी गाड़ी में अघोरी को लेकर गांव आ रहा होता है।तभी अघोरी उससे पुछता है की एक बात मेरे समझ में नही आई की मेरे लोग जब तुम्हारे ऊपर मंत्र पढ़ रहे थे तो तुम्हे ऊपर असर क्यों नही कर रहे थे।

जब तक सूर्या उसका जवाब देता तब तक दोनो का एक्सिडेंट हो जाता है। इधर गांव वाले अपना पूजा शुरू कर देते है। सभी एक एक करके अपना रक्त दान करने लगते है। जिससे सभी श्राप से मुक्त हो जाए। सूर्या अकेले ही गांव के तरफ भागता है लेकिन फिर से रास्ते में दुसरे गांव वाले उन्हे रोक लेते है। लेकिन किसी भी तरह से झगड़ कर वो अपने गांव में पहुंच जाता है।

गांव पहुंच कर पुजारी को असली ग्रंथ दिखाता है।और बोलते है इसे देखकर हमे असली उपाय देखना होगा। लेकिन जब तक देर हो चुका होता है सभी लोग भैरव के बस में हो जाते है क्यों की नकली ग्रन्थ के जरिए ऐसी विधि पूर्ण करवा लेता है जिससे लोगो को बस में कर लिया जाए। इतने देर में अघोरी वहा आता है और घेरे में जाकर नंदिनी को घेरे से बाहर निकालने का कोशिश करता है। पर वह घेरे को तोड़ नही पता क्युकी भैरव की आत्मा काफी ताकतवर थी। अघोरी सूर्या को कहता हैं की मैं नंदिनी को यहां से बाहर निकालने का कोशिश करता हूं लेकिन जब तक तुम उस आदमी को ढूढो जो भैरवा की मदद कर रहा है। सूर्या सभी गांव वालो को ध्यान से देखता है। जिसने गांव का सरपंच हरीश दिखाई नही देता जिसे ढूढने उसके घर जाता है जहां उसे एक तैखाना दिखाई देता है। नीचे जाने पर मरी हुई मुर्गियां और पूजा का सामान दिखता है। इसका मतलब वहा कोई तंत्र विद्या की गई थी। सूर्या को वहा एक तस्वीर दिखती है जिसके बारे में अब हरीश खुलाश करता है। और दोस्तो वो जो बताता है उसे सुनकर आप के रोगटे खड़े हो जाएंगे।

जब वेंगटा के घर को बंद किया गया था तो उसके घर से आवाज आती थी। तब एक दिन जब मैं अकेले वहा गया तो मुझे पता चला वेंगटा की एक बेटी थी जैसे सूर्या को उस तस्वीर में दिख रही थीं। हरीश कहता है की उस अकेली लड़की को मै वहा नही छोड़ पाया उसे मैं अपने साथ ले आया और मैने उसका नाम नंदिनी रखा और उसे पाल पोसकर बड़ा किया। यह सब सुनकर सूर्या अंदाजा लगा लेता है की भैरव की मदद करने वाला और कोई नही नंदिनी ही थी।

 यह वजह थी जिस कारण से वो गांव को छोड़कर नही जाना चाहती थी। क्योंकि उसे इस गांव से बदला लेना था।यह सब समझकर सूर्या नंदिनी के तरफ भागता है। वही अघोरी अपनी शक्ति से दोनो भाई बहनों को काबू करने की कोशिश करता है लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाता। दोनों भाई बहन मिलकर मंत्रो से समाने के पेड़ को आग लगा देता है। और सभी गांव वालों को उस पेड़ के तरफ जाने का इशारा करते है।

ऐसा करते ही सभी लोग उस पेड़ की तरफ बड़ने लगते है। इसी बीच सूर्या नंदिनी के सामने आ जाता है।और कहने लगता है की तुम दोनो मिलकर मासूम गांव वालों को मार रही हो जबकि गलती तुम्हारे पिता की है जो काला जादू कर रहे थे जिसके वजह से गांव से महामारी नही जा रहीं थीं।उसके बाद भैरव और नंदिनी जोर से चिल्लाते है तुम्हे कुछ नही पता ये सच नहीं है।

इसके बाद वो सच्चाई बताती है नंदिनी कहती है की उसके मां को पैरालाइसिस था उसको ठीक करने के लिए हमारे पिता आयुर्वेद का हर इलाज अपना लेते है। लेकिन उससे कोई फ़ायदा नहीं हुआ।और मेडिकल साइंस से हार मानकर वो और रिसर्च करने लगते है। जिनसे अथर्व वेद से एक सिद्धि का पता चलता है। जिसकी मदद से मरे हुए व्यक्ती के शरीर की शक्ति को दुसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंचाया जा सकता था।लेकिन जब उन्होंने इस विद्या में महारथ हासिल किया तो एक दिन एक मरी हुई लड़की की बॉडी को लेकर घर आए जिससे उसके अलग अलग अंगो की ऊर्जा को उसके पिता अपनी पत्नी के अंगो तक पहुंचा सके और ठीक हो सके। लेकिन जब तक वो इस काम में सफल होते गांव वाले वहा पहुंच गए और इस काम को काला जादू समझ कर मेरे पिता और मां को आग में जिंदा जला दिए।

इसके बाद हवेली का दरवाजा भी बंद कर दिया लेकिन कुछ दिनो बाद हरिश अंकल आए जिन्होंने मुझे गोद लिया और मेरे परवरिश की इस बीच मैं बड़ी होकर हवेली में आती जाती रही और उस किताबो को पड़ती रही इस बीच एक दिन मुझे मेरा भाई दिखा जो मेरे तरह हीं बदले की भावना रखता था।हम दोनों ने मिलकर गांव की विनाश करने की पूरी प्लानिंग की और गांव की ग्रंथ को एक फेक ग्रन्थ में बदल दिया जिसके बाद ये लोग हमारे बस में होगे।

सूर्या नंदिनी को समझाता है की इन लोगो ने ये गलती जान बूझकर नही किया है। लेकिन तुम तो इनको जान बूझकर मार रहे हो। इसमें कई गांव वालो की कोई गलती नही है।

अगर फिर भी इनको मारना हैं तो सबसे पहले तुम्हे मारना होगा लेकिन तुम आईसा नही करोगी क्योंकि तुम मुझसे प्यार करती हो।

नंदिनी कहती है की मैं तुमसे प्यार नहीं करता इस बीच भैरवा की आत्मा सूर्या पर हमला करती है लेकिन उसका कुछ नही बिगाड़ पाती ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नंदिनी ने जो सूर्या को लॉकेट दिया था उसको उसके पिता ने उसकी मां की रक्षा के लिए मंत्रो से बनाया था जिसे कोई तोड़ नही सकता था।यही कारण थी की अघोरियो के मंत्रो का सूर्या पे असर नहीं हुआ था।

इसके बाद सूर्या खुद ही अपने पेट में चाकू मार लेता है ये सब देख कर नंदिनी घेरा तोड़कर उसके पास आती है। उसे आईसा करने से रोकती है सूर्या को गले से लगाकर कहती है तुम मुझे तो रोक पाओगे लेकिन मेरे अंदर बदले की आग को कैसे रोक पाओगे। फिर सूर्या एक डिसीजन लेता है रोते रोते नंदिनी के पीठ में चाकू गोभ देती है।और नंदिनी मरते मरते सूर्या को किस करती है और कहती है सूर्या तुमको जीना होगा। ऐसा करते ही नंदिनी मर जाती है और भैरव की आत्मा भी आजाद हो जाता है।

 इस बीच गांव वाले भी बेहोश होकर गिर जाते है। मूवी के फाइनल सीन में हम देखते है की सूर्या की आंखो में एक चमक है इसके बाद हो जाता है फिल्म का the end. आखिरी सीन से ये आभास होता हैं क्या पता इसका नेक्स्ट पार्ट और आ जाए जिसमे सूर्या बदला ले गांव वालों से क्योंकि नंदिनी ने मरते समय बोला था सूर्या तुम्हे जीना होगा। देखते है आगे क्या होता है।

 यह मूवी कैसा लगा कॉमेंट करके जरुर बताए।

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