कालभैरव का मंदिर, क्षिप्रा नदी के किनारे, भैरवगढ़ क्षेत्र में स्थित है।

मंदिर में भगवान कालभैरव की प्रतिमा को शराब का भोग लगता है, जो रोजाना गायब हो जाता है।

शराब का भोग लगते समय भावना में शुद्धि और भगवान की समर्पणा का महत्व

स्कंदपुराण में भैरव मंदिर का वर्णन और इसके पुराने इतिहास की चर्चा

मंदिर की इमारत का जीर्णोद्धार प्राचीन सामग्रियों से किया गया, जो कुछ हजार साल पहले बनाई गई थी।

मंदिर के अंदर तलघर और पातालभैरवी के स्थान का विवरण

क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित विक्रांत भैरव मंदिर का विशेषता और तंत्रिक सिद्धियां होती है।

विक्रांत भैरव मंदिर के समीप स्थित श्मशान और तंत्रिक सिद्धियों का रहस्य

भगवान की प्रतिमा में सिंधिया पगड़ी का महत्व

मंदिर के मुख्य द्वार से अंदर और भैरवगढ़ के द्वारों का विवरण

यह मंदिर न केवल एक आध्यात्मिक स्थल है, बल्कि इसमें समाहित रहस्यों का अध्ययन भी करता है।