सिर्फ एक बंदा काफी है मूवीस फूल स्टोरी 2023 l Sirf ak Banda kafi hai(2023) movie

सिर्फ एक बंदा काफी है मूवीस 2023

आज हम जिस movie के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वो कोई साधारण movie नहीं है बल्कि अपने आप में एक संदेश ज्ञान, हिम्मत और साक्षात नमूना है। मैं ज़्यादा कुछ नहीं कहूंगा लेकिन इस movie के dialogues जिनको मनोज वाजपेई जी ने बड़े ही खतरनाक अंदाज़ में सभी के सामने पेश किया है। जिससे उन्होंने पूरी तरह से मेरा दिल जीत लिया है। जैसे यह समय दुपट्टे के पीछे अपना चेहरा छुपाने का नहीं बल्कि इसे अपनी कमर के चारों ओर मजबूती से बाँधकर महाकाली की तरह लड़ने का है और यही नहीं इसके जैसे पता नहीं कितने ही दिलचस्प dialogues और कहानियां इसमें बताई गई है।वैसे एक कहानी हमने भी इसमें काफी अच्छे से explain करने की कोशिश की है।

अब चलते हैं movie की तरफ जिसका नाम है “सिर्फ एक ही बंदा काफी है।”movie की शुरुआत होती है एक songs से जिसमें हमें सब के चहेते मनोज बाजपेई जी को दिखाया है। इस movie में उनका नाम PC सोलंकी है जो पेशे से एक वकील है और अपने काम के प्रति बहुत ही निष्ठावान और ईमानदार भी हैं।

अब कहानी यहां से जाती है New Delhi दो हज़ार तेरह में जहां हम एक लड़की को देखते हैं जिसकी उम्र सिर्फ सोलह साल है जो police को अपना बयान दे रही होती है दरअसल इस लड़की का नाम नूसिंह है जो अपने माता पिता के साथ वहां आई हुई थी। यहां वो अपने साथ हुए शारीरिक उत्पीड़न के बारे में police को सब कुछ बताती है। जिसकी बातें सुनकर police समझ जाती है कि यह एक high profile case है। इसलिए police उस लड़की पर POCSO act लगाकर उसे check up के लिए भेज देती है और आरोपी के खिलाफ case भी दर्ज कर लेती है।

अब यहां मैं आपको बता दूं कि POCSO एक ऐसी धारा है जो अट्ठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के यौन अपराधों के प्रति उनको संरक्षण प्रदान करती है और इसके सभी मामलों की सुनवाई एक विशेष अदालत में की जाती है।साथ ही पीड़ित बच्चों को माता पिता के साथ ही रखा जाता है और सभी संबंधित कार्यवाही को कैमरे में record भी किया जाता है।

अब आते हैं movie की तरफ जहां सोलह साल की नाबालिक बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में police बाबा जी के आश्रम जाकर उन्हें गिरफ्तार कर लेती क्योंकि आरोपी कोई और नहीं बल्कि एक बहुत ही famous बाबा होता है जिसके लाखों करोड़ों भक्त होते हैं।गिरफ़्तारी होते ही यह खबर पूरी media में आग की तरह फ़ैल जाती है। और ये खबर सुनते ही बाबा जी के भक्त भी अब आग बबूला हो उठते हैं।

अब movie में हम देखते हैं मनोज वाजपेयी यानी PC सोलंकी को जो अपने बेटे के साथ पूजा कर रहा होता है और अपने बेटे को भगवान की कहानी सुना रहा होता है। उधर बाबा जी को court में लाया जाता है जहां पहला session शुरू होता है।यहां बाबा जी के ऊपर काफी सारे इलज़ाम लगाए जाते हैं लेकिन बाबा का वकील court से कहता है कि police ने बिना जांच किए ही बाबा जी को arrest कर लिया है।मैं अनुरोध करूंगा कि इसे re investigate किया जाए लेकिन नूका वकील अपने सभी सबूतों को पेश करता है और पंद्रह दिन की police remand पर बाबा जी को भेजने के लिए judge साहब को मना ही लेता है और यहीं से बाबा जी को पंद्रह दिन की police remand पर भेज दिया जाता है। जिसके बाद बाबा का बेटा बाबा के वकील यानी शर्मा को phone करता है कि आपने तो पहले हीsession में हार मान ली और पंद्रह दिन की remand तक आप नहीं रोक पाए इस पर वकील समझाता है और कहता है कि ये एक high profile case है थोड़ा सब्र रखो। मैं bell दिलवा दूंगा।

फिर अगले दिन में हम नू के वकील को देखते हैं जो उसके parents के साथ एक room में होता है।पहले वह बाबा के jail जाने की खुशी में उन्हें बधाई देता है और कहता है कि बड़ी ही मुश्किल से अपनी जान को हथेली पर रखकर मैं इस case को लड़ रहा हूं इसलिए इस case से जुड़ी कोई भी जानकारी मेरे अलावा किसी को भी पता नहीं चलनी चाहिए तभी नूके father उस वकील से चार sheet की copy मांगते हैं तो वो वकील कहता है कि वो मेरे पास है और safe है अब चिंता मत करो हम जल्दी इस case को जीत जाएंगे।अब ऐसा बोल कर वो वहां से निकल जाता है।

तभी वो वकील नीचे आकर बाबा के लोगों से phone पर बातें करने लगता है, जहां उसे इस case को रफा दफा करने के लिए करोड़ों रुपए मिलते हैं। वह तुरंत इसके लिए हां कर देता है लेकिन तभी यह सारी बातें नू का पिता पीछे से sun लेता है और समझ जाता है कि यह भी उनके साथ मिला हुआ है।अब वह police station जाकर यह सारी बातें lady police officer को बताता है जिसका नाम चेतना होता है।चेतना कहती है कि मैं एक वकील को जानती हूँ।जो आपकी इस case में मदद कर सकते हैं। फिर नू और उसकी family P. C. सोलंकी से मिलती है वैसे तो सोलंकी को news के जरिए इस case के बारे में खबर मिल चुकी थी लेकिन detail में जानने के लिए वो एक एक करके तीनों को अपने cabin में बुलाकर सवालात करने लगता है।कि क्या हुआ, कैसे हुआ?

यहां हमें पता चलता है कि नू किसी hostel में पढ़ा करती थी लेकिन एक रात जब अचानक से उसके पेट में दर्द हुआ तो उसने इसकी खबर hostel के warden को दी।अब warden ने उससे कहा कि यह कोई भूत प्रेत का चक्कर लगता है।बेहतर होगा कि तुम बाबा जी के आश्रम में जाकर उनसे मिलो जिससे तुम जल्दी ठीक हो जाओगी। साथ ही यह सारी बातें warden नू के माता पिता को भी बताती हैं।

अब यहां नू के parents पूरी श्रद्धा के साथ अपनी बच्ची को लेकर बाबा जी के दिल्ली आश्रम जाते हैं जहां उन्हें पता चलता है कि बाबा जी जोधपुर में है फिर वो अपनी बेटी को लेकर जोधपुर आश्रम जाते हैं जहां बाबा देखते ही कहता है कि बिटिया पर कोई काला साया है। इसलिए हमें शुद्ध करानी होगी इसलिए वो नू की family को आश्रम में ही रुकने के लिए बोलता है।और फिर वो नू को एक कमरे में अपने साथ लेकर जाता है और कहता है कि पढ़ाई में कुछ नहीं रखा तुम मेरी भक्त बन जाओ बड़े बड़े लोग मुझसे आशीर्वाद लेने आते हैं और ऐसे ही बातों बातों में उस कमरे का gate बंद करके उसके साथ जबरदस्ती करना शुरू कर देता है।नू चिल्लाती है लेकिन बाबा उसके मुंह पर हाथ रख देता है ताकि आवाज़ बाहर ना जा सके और उसके साथ बलात्कार करने लगता है।

अब वापस आकर नू अपनी आपबीती अपने पिता को बताती है। जिसके बाद नू के पिता बाबा के आश्रम जाते जहां उसके पिता को आश्रम के gate से ही बाहर निकाल दिया जाता है। जिसके बाद वो सीधा police station आकर FIR दर्ज कराते हैं।

अब सोलंकी, नू कि ये सारी बातें सुनकर इतना ही emotional हो जाता है कि लिखते लिखते रुक जाता है फिर वह नू का हौसला बढ़ाते हुए कहता है कि तुम और तुम्हारे मां बाप ने बहुत बड़ा कदम उठाया है तुम फ़िक्र मत करो हम इस जंग को ज़रूर जीतेंगे।अब यहां जब नू के parents सोलंकी से उनकी fees के बारे में पूछते हैं तो वो कहता है कि बिटिया की प्यारी सी मुस्कान ही मेरी fees है।

अब अगले दिन court में फिर से कार्यवाही शुरू होती है जहां हम देखते हैं कि बाबा के ऊपर IPC के बहुत सारी धाराएं और POCSO act लगा होता है। यहां बाबा का वकील शर्मा court में कुछ documents share करता है और judge को बताता है कि नू नाबालिक नहीं बल्कि बालिक है और इन सब का कोई फ़र्जी सबूत judge को दिखाने लगता है।दरअसल शर्मा नहीं चाहता था कि बाबा के case की सुनवाई POCSO act के तहत हो, क्योंकि POCSO act में bail मिलना एक तरह से नामुमकिन होता है।

इस पर सोलंकी POCSO act के rule बताने लगता है और कहता है कि ये सब मान्य नहीं है और judge को नू के दसवीं के certificate दिखाता है जिसमें उसकी date of birth उन्नीस सौ छियानवे होती है जिससे साबित होता है कि ये एक नाबालिक है।

दरअसल सोलंकी नहीं चाहता कि बाबा को bail मिले क्योंकि अगर बाबा को bail मिल गई तो ये भी बाकी बाबाओं की तरह देश छोड़कर फरार हो जाएगा और सोलंकी के इस सबूत को देखने के बाद judge साहब बाबा को bail नहीं देते है।अब बाबा यह सुनकर और ज़्यादा आग बबूला हो जाता है।

इधर सोलंकी नु के पिता को phone करता है और बोलता है कि जिस जिस को तुमने इस case के बारे में बताया था हो सकता है कि उन सभी को कोर्ट में आकर गवाही देनी पड़े तो नू के school जाकर सारे documents collect करना शुरू करो और नू के पिता ऐसा ही करते हैं। वही सोलंकी को अगले दिन news paper से पता चलता है कि एक बहुत ही मशहूर वकील रामचंदवानी उस बाबा का case लड़ने वाले हैं।यहाँ सोलंकी खुद रामचंदवानी का बहुत बड़ा fan होता है।

अब कहानी जोधपुर court से शुरू होती है। जहां चंदवानी बोलता है कि दिल्ली police ने जो भी process follow किया है वो सारा का सारा गलत है।पहले medical check up किया है और फिर FIR दर्ज किया है जबकि पहले FIR दर्ज होती है उसके बाद medical checkup और फिर एक छोटी सी बच्ची के कहने पर बाबा जी के ऊपर FIR दर्ज कर दिया और medical test से भी पता चला है कि sex तो हुआ ही नहीं है इसलिए मैं court से appeal करता हूं कि मेरे client बाबाजी को छोड़ दिया जाए।

लेकिन इस पर सोलंकी बोलता है कि शायद मेरे senior वकील साहब ये नहीं जानते कि POCSO act में ये ज़रूरी नहीं है कि किसी नाबालिक का rape हुआ हो अगर आप उसके private parts को touch भी करते हैं तब भी इसको POCSO act के तहत समझा जाएगा और इसी act के तहत पहले victim का medical test होता है और बाद में FIR दर्ज होती है।

अब इन सब दलीलों को सुनने के बाद judge फिर से बाबा को बेल देने से मना कर देता है।इसके बाद बाबा के कुछ लोग सोलंकी के घर आकर सोलंकी को बीस करोड़ रुपए घूस देने की बात करते हैं लेकिन सोलंकी उनको police का डर दिखा कर वहां से भगा देता हैं।

फिर हमें जोधपुर court का scene फिर से दिखाया जाता हैं जहा एक राजसज्जन नाम का आदमी जो बाबा को भगवान मानता था वो भी बाबा के खिलाफ बयान देता है कि बाबा को मैंने कई बार लड़कियों के साथ गलत करते हुए देखा है, लेकिन कभी बाबा के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं जुट पाया।फिर नू के पिता अपना बयान देते हैं कि मैं बाबा को बहुत मानता था।मैं बाबा को हमेशा अपनी कमाई का कुछ हिस्सा चढ़ाया करता था ताकि मेरे शहर में भी बाबा का आश्रम बन सके।फिर नू को कटघरे में बुलाया जाता है। शर्मा उससे पूछता है कि आप बाबा को कब से जानती हो? इस पर नू बोलती है कि बचपन से मेरे papa मुझे बाबा के प्रवचन सुनाने ले जाया करते थे।शर्मा और भी बहुत सारे सवाल पूछता है ताकि वो नू को भटका सके लेकिन नू भी सारे सवालों का जवाब पूरी हिम्मत के साथ देती और यहाँ शर्मा के हाथों कुछ नहीं लगता।

वहीं दूसरी ओर, नू के हौसले को देखकर काफी लोग बाबा के बेटे के ऊपर भी अब FIR दर्ज करा देते हैं।कि इसने भी कई लड़कियों के साथ बलात्कार किया है।

फिर अगले scene में जब एक witness रास्ते से जा रहा था,तभी बाबा के कुछ लोग उसके face पर acid डाल देते हैं।जब अगली सुबह सोलंकी news paper में यह खबर पड़ता है तो वो भी काफी डर जाता है।और जब वो court जाने के लिए अपने घर से निकलता है तो अपने scooter के शीशे में देखता है कि दो लोग उसका पीछा कर रहे हैं। सोलंकी तुरंत police को देखकर उन्हें आवाज़ लगाता है और उन आदमियों से बच निकलता है। वहीं finally police की दो महीने की कड़ी मेहनत के बाद बाबा के बेटे को भी गिरफ्तार कर लिया जाता है.अब कुछ महीनों बाद court में फिर से सुनवाई शुरू होती है.तो सोलंकी सबसे पहले महिला प्रिंसिपल को कटघरे में बुलाया जाता है। ये वही principle होती है जिससे शर्मा ने कुछ fake documents बनवाए थे जो movie के starting में शर्मा ने court को नू के birth certificate के तौर पर दिखाए थे।

 यहाँ सोलंकी कुछ documents पेश करता है और काफी लंबी बहस के बाद वो court में ये साबित कर ही देता है कि नूसिंह ने कभी school में पढ़ाई ही नहीं की जहा का शर्मा ने certificate दिखाया था। और फिर शर्मा एक और बंदे को कटघरे में बयान देने के लिए बुलाता है।वो बोलता है कि पहले मैं बहुत डरा हुआ था लेकिन एक छोटी सी बच्ची का हौसला देखकर मुझ में हिम्मत आई और उसी वजह से मैं यहां हूं।वो बताता है कि बाबा के आश्रम से काफी लोग मेरी दुकान पर जड़ी बूटी लेने आते थे और वो जड़ी बूटी आदमी की ताकत को बढ़ाती है।

अब ये सुनकर शर्मा जी भी परेशान होने लगते हैं।अब जब court से बाहर आते हैं तो एक आदमी उसी आदमी के पेट में चाकू मार देता है जिसने अभी court में बयान दिया था और अब ये सब देखकर सोलंकी भी बहुत डर जाता हैं जिसके बाद एक police वाला जो सोलंकी को जानता था वो सोलंकी को phone करके सोलंकी को safe रहने की हिदायत देता हैं और उसको उसकी family के लिए warn भी करता है और साथ ही police station भी बुलाता है।अब यहां उसे पता चलता है कि इस case से जुड़े जितने भी witness हैं वो धीरे धीरे गायब हो रहे हैं तब वहां का SP, सोलंकी से बोलता है कि जितने भी witness हैं उनकी एक list बनाओ और उन सभी को police protection देने के लिए बोलता है और फिर सोलंकी और नू के family को police protection मिल जाता है।

फिर एक रात नू सोलंकी के पास आती है और पूछती है कि क्या मैंने कोई गलती की अब यहाँ नू परेशान और टूटते हुए दिखती है।

सोलंकी कहता है ये समय दुपट्टे के पीछे चेहरा छुपाने का नहीं बल्कि इसे अपनी कमर के चारों ओर मजबूती से बांध कर मां काली की तरह लड़ने का है।वो बहुत अच्छे से नू को motivate करने की कोशिश करता है अब फिर से हमें कोट का scene दिखाया जाता है।

और यहां शर्मा फिर से नू से वही statement कहने को बोलता है। कि starting से end तक आखिर क्या हुआ था और फिर उसका बयान सुनने के बाद वह पूछता है।अच्छा बताओ कमरे का नक्शा कैसा था?वहां की दीवारों का रंग कैसा था?यहां तक कि bed sheet का रंग क्या था?मतलब वो उससे उलटे सीधे सवाल करने लगता है अब नू को भी जितना भी याद था वो बता देती है।

 लेकिन इसका फ़ायदा उठाकर शर्मा जज साहब को बोलता है कि देखा आपने इसने कैसे अपना बयान change कर दिया जबकि इसने police complaint में कुछ और बताया है और अब कुछ और बता रही है।तभी सोलंकी खड़े होकर बोलता है कि judge साहब यह सब इस छोटी बच्ची पर बीत रहा था वो एक shock में थी.कोई कैसे इतना बड़ा हादसा होने के बाद ये सब याद रख सकता है और ये तो एक छोटी बच्ची है।इसको इस सदमे से निकलने में अभी समय लगेगा।तभी नू भी बोलती है कि मैं बाबा को अपना भगवान मानती थी।मुझे अभी तक यकीन नहीं हो रहा है कि बाबा ने मेरे साथ ये सब किया है।

और फिर अगले दिन में हम देखते हैं कि बाबा के आदमियों ने एक और weatness को गोली मार दी है और इसकी खबर मिलते ही सोलंकी अपने assistant को बोलता है कि तुम्हारी अभी कुछ दिन की छुट्टी है तुम अपने गांव चले जाओ ताकि वो safe रह सके। और फिर अगले दिन court की सुनवाई में हम देखते हैं कि वैंकटेश्वर स्वामी नाम का एक बहुत बड़ा वकील बाबा की तरह से case लड़ने के लिए court में आता है। लेकिन यहाँ सोलंकी judge साहब से बोलता है कि बाबा ने नए वकील के बारे में कोई भी जानकारी court में पहले से नहीं दी है।इस पर वैंकटेश्वर स्वामी बोलता है, कि वो अपने मन से आया है और उसके पास कुछ सबूत भी है लेकिन सब कुछ देखने के बाद भी जज साहब बाबा को बेल देने से मना कर देता है।

जिसके बाद बाबा का case supreme court में जाता जहाँ बाबा का वकील judge को बोलता है कि बाबा को एक दिमागी बीमारी है जिसका इलाज India से बाहर ही हो सकता है तो इसके लिए बाबा की bail को मंजूर किया जाए।तभी सोलंकी बोलता है कि ऐसी ही same बीमारी एक celebrity को भी थी लेकिन उसका इलाज india में ही हो गया था तो बाबा का इलाज भी india में हो सकता है और वैसे भी बाबा के जो medical documents हैं वो चार साल पुराने हैं ।

जिसके बाद judge अपना फ़ैसला सुनाते हुए बोलता है कि बाबा का फिर से एक medical checkup कराया जाए वही आगे बाबा का medical checkup होता है और उसकी report से पता चलता है कि बाबा को तो ऐसी कोई बीमारी है ही नहीं जिसके चलते एक बार फिर से बाबा की bail को reject कर दिया जाता है।

खैर इतनी सारी जद्दोजहद के बाद अब आता है scene सीधा पांच साल बाद का,2018 यानी final judgement का जहां judge दोनों वकीलों को अपना final statement देने को बोलते हैं।

बाबा का वकील शर्मा बोलता है कि बाबा ने बहुत सारी संस्थाएं बनाई हुई हैं।जैसे schools, colleges, hospitals,अनाथालय वगैरह और अगर बाबा को jail में डाल दिया गया तो ये सारी संस्थाएं बंद हो जाएंगी और गरीबों के सर पर से बाबा का साया उठ जाएगा।वो सब कहां जाएंगे?मैं चाहता हूं judge साहब आप जो भी फ़ैसला दें उसमें इन सब बातों का ज़रूर ध्यान रखा जाए.।

अब बारी आती है हमारे सोलंकी जी की.वो कहते हैं कि judge साहब हम सभी ने देखा है कि कितने बड़े बड़े lawyers इस case से जुड़े हुए हैं POCSO act को हटवाने के लिए कैसे fake documents तैयार किए गए कैसे एकएक करके इतने सारे witness को मार दिया गया और कुछ तो आज तक missing है जिनका कुछ अता पता नहीं।ये case लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है जहा एक बाबा ने बेचारे भोले भाले लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है और ये अपने आप को एक धर्म गुरु कहते हैं। यहां मैं आपको रामायण से जुड़ी एक कहानी सुनाता हूं कि रावण की जब आखिरी सांसे चल रही थी तब भी वो भगवान शिव का नाम ले रहा था। लेकिन शिव जी का नाम लेने बावजूद उसे मोक्ष नहीं मिल सका वो शिव का बहुत बड़ा भक्त था उसने शिव से माफी भी मांगी लेकिन उन्होंने रावण को माफी नहीं दी जब माता पार्वती ने इसका कारण शिवजी से पुछा तो उन्होंने बताया कि पाप तीन प्रकार के होते हैं .पहला होता है पाप जो जाने अनजाने में लोगों से हो जाता है जिसकी माफी मिल सकती है।वहीं दूसरा होता है अतिपाप जिसमें हत्या करने से लेकर लोभ लालच जिसे और भी जघन्य अपराध लोगों से हो जाते है लेकिन इसकी भी माफी मिल सकती है।वहीं तीसरा होता है महापाप जिसकी कभी कोई माफी नहीं होती जैसे अगर रावण ने अपने ही भेष में माता सीता का अपहरण किया होता तो इसकी माफी उसको मिल सकती थी लेकिन उसने उनका अपहरण एक साधु के भेष में किया और  रावण की इस हरकत की वजह से सारे साधुओं पर उंगली उठाई गई और आज उसी रावण का काम इस बाबा ने भी किया है।

अब सारे सबूतों को देखते हुए जज साहब बाबा को उम्र कैद कि सजा सुना देते हैं इसी के साथ नूसिंह और उसके माता पिता को इंसाफ मिल ही जाता है।और इसी के साथ होता है इस movie का the end.

दोस्तों इस movie में मनोज वाजपेयी का role बहुत ही दिलचस्प दिखाया गया है।उनके कोर्ट में जो भी dialogues हैं वो काबिले तारीफ हैं।मेरी सलाह है कि आप इस movie को एक बार ज़रूर देखें।खैर, अब मैं उन बाबा जी का नाम तो नहीं लूँगा,लेकिन ये बात हकीकत है कि आज के युग यानी कलयुग में बहुत ही कम ऐसे साधु महात्मा बचे हैं।जो सच्चे दिल से बिना निस्वार्थ के ईश्वर की बातें करते हैं लेकिन एक सच यह भी है कि जीवन में एक गुरु का होना अति आवश्यक है।अब चाहे आप अपने मां बाप को वो गुरु माने या किसी गुरु जी को ये मैं आप पर छोड़ता हूं बाकी आपको ये movie कैसी लगी हमें comment करके ज़रूर बताएं।

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