भयभीत मूवीस explanation l Bhaybheet Movie Explained In Hindi l

 भयभीत मूवीस की स्टोरी 2023

भयभीत मूवीस explanation l Bhaybheet Movie Explained In Hindi

दोस्तों  मैंने काफी मराठी movies को analyze किया. लेकिन कई दिनों तक मुझे कोई अच्छी suspense thriller movie देखने को नहीं मिली. पर तभी मुझे पता चला एक ऐसी मराठी movie के बारे में जिसमें horror भी है और suspense भी और एक अच्छी कहानी भी. इसलिए चलिए दोस्तों, बिना देरी किए शुरू करते हैं आज के explanation जिसका नाम है भयभीत यानी डरा हुआ l 

movie की शुरुआत होती है शेखर नाम के आदमी से जिसकी नींद अचानक आधी रात को खुल जाती है उठते ही वो अपनी बीवी रश्मि को अपने पास नहीं पाता इसलिए पहले कमरे में ही इधर उधर देखने लगता है जब वो उसे नहीं मिलती तो वो बाकी घर में उसे ढूंढते हुए आवाज़ देने लगता है बाहर काफी बारिश हो रही थी इसलिए वो main gate को एक बार खोल कर check करता है जहां उसे बाहर बारिश में अपनी बीवी की लाश मिलती है.

अब यहीं से कहानी जाती है flashback में जहां हमको शेखर उसकी बीवी रश्मि और उसकी बेटी श्रेया दिखाई जाती है.

एक दिन वो तीनों बैठकर breakfast कर रहे थे. तभी अचानक रश्मि के sandwich में प्याज़ का टुकड़ा आ जाता है उस शेखर से कहती है कि मैंने तुमको बताया है कि मुझे प्याज़ से energy है फिर भी तुम इस बात का ख्याल नहीं रखते शेखर उसको sorry बोलता है और कहता है कि मैंने ध्यान नहीं दिया काम के pressure की वजह से मैं भूल गया और गलती से मैंने प्याज़ डाल दिया ये सुनकर रश्मि over react करती है।

और श्रेया के सामने ही शेखर को उल्टा सीधा बोलने लगतीहै वो कहती है कि तुम्हें वैसे भी हमारी कोई फ़िक्र नहीं है इसलिए ये सब दिखावा करने की कोई ज़रूरत नहीं है. बेचारा शेखर अपनी बेटी के बारे में सोचते हुए चुप हो जाता है और रश्मि को कोई जवाब नहीं देता. हम देखते हैं कि रश्मि रोज़ रात श्रेया को piano बजाकर सुनाती थी, और उससे कहती थी कि मैं तुम्हारे papa जैसी नहीं हूं. मैं तुम्हारा पूरा ख्याल रखूंगी और कभी तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊंगी.

श्रेया भी रोज़ अपने साथ एक doll को लेकर सोती थी जिसका नाम उसने कैटी रखा हुआ था. उधर शेखर को अपने room से काले जादू की किताबे मिलती हैं जिनको देखकर उसे रश्मि पर शक होता है कि कहीं वो किसी तरह का काला जादू तो नहीं करती हम देखते हैं उसी रात बारिश में रश्मि अपने terrace पर खड़े होकर भीगते हुए coffee पी रही होती है और तभी अचानक वो terrace से नीचे गिर जाती है. और उसकी मौत हो जाती हैं.

अब सीन shift होता है रश्मि की मौत के छह महीने बाद, जहां हम देखते हैं श्रेया को, जो अपनी मां की यादों में हमेशा खोई खोई रहती है. और किसी से ज़्यादा बात नहीं करती. शेखर उसकी इस हालत को लेकर बेहद परेशान होता हैl

इसलिए वो अपनी दोस्त काव्या की help मांगता है जो पेशे से एक psychiatrist होती है काव्या श्रेया की पूरी help करती है और उसकी daily counselling करती है ताकि वो अपनी माँ की यादों से जल्दी बाहर आ पाए.

उधर शेखर भी अपनी बेटी को पहले जैसा देखना चाहता था पर उसका घर काव्या के घर से काफी दूर था इसलिए वो अपने घर को खाली करके काव्या के घर के पास ही एक नया घर rent पर ले लेता है ताकि श्रेया जल्दी से ठीक हो सके वो एक ऐसे घर को select करता है जो आस पास के जंगलों से काफी पास था ताकि वो अपनी बेटी के साथ time spend कर सके जैसे उसकी बीवी किया करती थी. वह सोचता है कि अगर शहर में ही रहा तो अपनी बेटी को proper time नहीं दे पाऊंगा और ऐसे में कहीं श्रेया की हालत और खराब ना हो जाए तो इस तरह वो finally श्रेया के साथ उस घर में shift हो जाता है, लेकिन धीरे धीरे काफी समय बीत जाने के बाद वो अपनी बेटी के मन को बदल नहीं पाता अब एक दिन जब वो श्रेया के लिए noodles बनाता है, तो वो फ़ौरन उसको मुंह से निकाल देती है, वो कहती है कि papa मुझे प्याज़ बिल्कुल पसंद नहीं है, फिर भी आपने इसमें प्याज़ क्यों डाला?

ये देखकर शेखर काफी हैरान हो जाता है क्योंकि श्रेया को प्यास काफी पसंद थी. खैर, अगले दिन, श्रेया खेलते खेलते अचानक

जंगलों की ओर निकल जाती है. आगे जाकर उसे महसूस होता है कि कोई उसके पीछे हैं इसलिएजैसे ही वह पीछे मुड़कर देखती है तो अजीब सा react करकेअपनी doll को वहीं छोड़कर वापस घर भाग आती है.

उधर शेखर श्रेया को पूरे घर में ढूंढ रहा होता है. उसके आते ही वो पूछता है कि आखिर तुम कहां गई थी? श्रेया कुछ भी नहीं बोलती और चुपचाप घर के अंदर चली जाती है.

श्रेया के अंदर जाने के बाद शेखर देखता है कि श्रेया के पैरों के निशान के साथ साथ वहां किसी और के पैरों के निशान भी होते हैं.

शेखर ये देखकर घबरा जाता है क्योंकि अभी उसके सामने सिर्फ श्रेया ही घर के अंदर गई थी वो उसको ignore करता है और अगले दिन श्रेया के admission के लिए school पहुंचता है school में उसकी मुलाकात एक teacher से होती है जिसका नाम जाह्नवी था. वो जाह्नवी को श्रेया के अतीत के बारे में सब कुछ बताता है जिसके बाद जाह्नवी उसको श्रेया को ठीक करने का promise करती वो कहती है कि school में और बच्चों के साथ श्रेया अपनेअतीत को भूल जाएगी और बहुत जल्दी ही normal हो जाएगी.

यहां हम देखते हैं कि जब भी शेकर और जाह्नवी आपस में एक दूसरे से बात करते तो श्रेया को बहुत ही बुरा लगता और वो दोनों को अजीब तरीके से घूरती थी.

अब उसी रात शेखर जब श्रेया को सुला रहा था तो वो देखता है कि उसके पास उसकी doll नहीं है. वो पूछता है कि तुम्हारी doll कहां है? श्रेया कहती है कि papa जंगल में मुझे आज एक नया friend मिला था. जिसका नाम राघव है जब मैं उससे मिली थी तो मेरी गुड़िया वहीं रह गई शेखर हैरानी से पूछता है कौन राघव और कहां रहता है तुम्हारा दोस्त? श्रेया कहती है कि वो इसी घर में रहता है papa यह सुनकर अब शेखर के होश उड़ जाते हैं क्योंकि वो धीरे धीरे जिन चीज़ों को ignore किए जा रहा था वो चीज़ें उतनी ही बढ़ती जा रही थी.

अब रात को अचानक एक डरावने ख्वाब की वजह से शेखर की नींद खुल जाती है, पानी पीने के लिए वो बाहर आता है, तो देखता है कि श्रेया की doll को किसी ने उल्टा लटकाया हुआ है, इतने में वहाँ श्रेया भी आ जाती हैं.

शेखर पूछता है कि ये तुमने अपनी doll के साथ क्या किया? श्रेया कहती हैं कि papa ये मैंने नहीं, राघव ने किया है. अब शेखर कुछ नहीं समझ पाता एक के बाद एक इतनी अजीब चीज़ों से वो परेशान हो जाता है और उस रात ठीक से सो भी नहीं पाता.

अगले दिन वो ये सब काव्या को बताता है जो उसको कहती है कि ये सब श्रेया का खुद का ख्याल है. अक्सर बचपन में बच्चे अपने मन में एक imaginary friend को अपना दोस्त बना लेते हैं और अपने मन की सारी बातें उसके साथ share करते हैं. ये सब normal है और जैसे जैसे श्रेया बड़ी होती जाएगी उसको ये ख्याल आने भी बंद हो जाएंगे इसलिए तुम फ़िक्र मत करो इसके बाद शेखर थोड़ा relief महसूस करता है और घर चला जाता है.

उसी रात जब वो सोने की तैयारी करता है तो उसे जंगल की तरफ से कुछ आवाज़ें आने लगती हैं. जिसको सुनकर वो जंगल की तरफ निकल पड़ता आगे जाने पर उसे एक जगह पर आग जलती हुई दिखाई देती हैं और करीब जाने पर उसे पता चलता है कि उस आग में एक छोटी सी बच्ची की लाश जल रही है ये देखकर वो बेहद दुखी होता है और फ़ौरन police को inform करता है.

भयभीत मूवीस explanation l Bhaybheet Movie Explained In Hindi

अब police वहां पहुंचती है और उससे पूछताछ करने लगती है कि आखिर ये सब कैसे हुआ?

जिस पर वो police को सब कुछ सच सच बता देता है. अगले दिन शेखर देखता है कि उसके garden में श्रेया एक अनजान आदमी के साथ खेल रही है. वह फ़ौरन उस आदमी के पास जाता है और पूछता है भाई तुम कौन हो? और यहां क्या कर रहे हो?

वह आदमी अपना नाम किशोर बताता है और कहता है कि मैं आपका पड़ोसी हूं. वो कहता है कि मेरे परिवार में मैं और मेरी पोती रुचि रहते हैं. कुछ दिनों से रुचि की तबियत ठीक नहीं

है, इसलिए doctors उसकी देखभाल कर रहे हैं. जब वो ठीक हो जाएगी तो आपकी श्रेया के साथ खेला करेगी और आज जब मैंने आपकी बेटी को अकेले खेलते हुए देखा तो मुझे अपनी पोती की याद आ गई. और मैं यहां आ गया.

शेखर अब उससे थोड़ी देर बात करता है और फिर श्रेया को लेकर वापस घर के अंदर चला जाता है. इधर हम देखते हैं कि किशोर ने चुपके से श्रेया के कुछ बालों को तोड़ लिया होता है उसी शाम को श्रेया piano के पास बैठकर ज़ोर ज़ोर से हंस रही होती है तो शेखर उसकी आवाज़ सुनकर वहां आ जाता है वह पूछता है कि आखिर piano कौन बजा रहा था और तुम हंस क्यों रही हो?

वह कहती है कि papa राघव अभी piano बजा रहा था और मुझे हंसा रहा था.

यह सुनकर शेखर का दिमाग अब फिर से खराब हो जाता है इसलिए वह अपने घर पर काव्या को बुलाता है ताकि वह श्रेया का ख्याल रख सके और holiday पर थोड़ा time भी उसके साथ spend कर सके इत्तेफ़ाक़ से उसी शाम जाह्नवी भी श्रेया के लिए एक parrot का pair लेकर वहां आ जाती है ताकि श्रेया को अच्छा feel हो और इस तरह उस रात का dinner सभी साथ साथ करते हैं.

Dinner के वक्त हम देखते हैं कि श्रेया एक बार फिर जाह्नवी की तरफ देखकर घूर रही है और तभी वो शेखर से कहती है कि papa मुझे यह teacher बिल्कुल पसंद नहीं है क्या आप इनसे शादी करना चाहते हों और मेरी mummy की जगह दिलवाना चाहते हों? शेखर और बाकी सब ये सुनकर हैरान रह जाते हैं कि आखिर इतनी छोटी सी बच्ची से कैसे सोच सकती है? शेखर फ़ौरन श्रेया को डाटता है कि आखिर ये सब तुमसे किसने कहा? तो श्रेया कहती है कि ये सब उसको राघव ने बताया वो कहता है कि तुम्हारे papa को जाह्नवी madam पसंद है और वो उनको तुम्हारी mummy बनाना चाहते हैं. शेखर कहता है कि बेटा तुम्हारा दोस्त झूठ बोल रहा है, ऐसा कुछ नहीं है. मैं ऐसा कुछ भी नहीं करने वाला ये सुनकर श्रेया वहां से चली जाती है और काव्या उसको मनाने उसके पीछे चल देती है ये सब सुनकर जाह्नवी शौक हो जाती है इसलिए वो पूछती है कि आखिर ये राघव कौन है जिसने श्रेया को ये सब बोला किस तरह श्रेया ने एक imaginary friend बना रखा है, जिसको वो हमेशा अपने पास ही महसूस करती है और उससे बातें करती है.

अब उसी रात शेखर देखता है कि जो parrot जाह्नवी लाई थी, उनको किसी ने मारकर pot में रख दिया है और उसके चारों तरफ candle जला रखे हैं.

वो सोचता है कि ये सभी श्रेया नहीं किया होगा. और ऐसा उसने अपने दोस्त राघव के कहने पर किया होगा इसलिए वो फ़ौरन श्रेया के room में जाता है जो उस रात काव्या  के साथ सो रही थी वहां उसको श्रेया नहीं मिलती और फिर शेखर और काव्या मिलकर उसे ढूंढने लगते हैं अब उसे अपनी बीवी रश्मि के रूप में श्रेया मिलती है जो अपनी माँ की तरह ही dress पहनकर सज सवर रही होती है ।

शेखर उस रात उससे कुछ नहीं कहता और उसे सोने के लिए बोलता है वो अगले दिन श्रेया के room में जाता है और उसको एक drawing बनाते हुए देखता है श्रेय उसे कहती है कि drawing में एक वह है एक उसकी मां है और एक राघव है यह सुनकर अब शेखर भड़क जाता है और उससे कहता है कि आखिर तुम हम लोगों के beach में राघव को क्यों लाती हो?

इतने में वो एक और drawing देखता है जिसमें श्रेया ने जाह्नवी को मारा हुआ दिखाया होता है ये देखकर अब शेखर का mood upset होजाता है और वो ठान लेता है कि अब वो पता करके ही रहेगा कि आखिर ये राघव सच में है भी या नहीं क्योंकि एक छोटी सी बच्ची इतना सब कुछ नहीं कर सकती.

अगले दिन से वो हर छोटी छोटी चीज़ों को notice करने लगता है जिसमें वो देखता है कि किशोर हर वक्त उसके घर की तरफ ही नज़र रखे रहता है इसलिए वो मौका पाते ही किशोर के घर की तरफ जाता है जहां उसे एक room में एक बच्ची मिलती है देखकर वो समझ जाता है कि ये कोई और नहीं बल्कि किशोर की पोथी रुचि ही है जिसकी मौत हो चुकी है. पास आकर सामान को देखकर वो समझ जाता है कि किशोर किसी तरह का काला जादू कर रहा है जिससे उसकी पोती ज़िंदा हो जाए और हो ना हो.वह जंगल में मरने वाली बच्ची का कातिल भी यही किशोर ही होगा.

उधर हम देखते हैं कि hospital में काव्या को एक doctor वाडवाई के बारे में बता रहा होता है जिसको अभी अभी police ने गिरफ्तार किया है वो बताता है कि अभी कुछ दिनों पहले इसी ward boy ने पैसे लेकर एक बच्ची को hospital से बेच दिया था जिसकी लाश जंगल में जली हुई मिली थी.

उधर जाह्नवी शेखर के घर पहुंचती है और श्रेया के साथ खेलने लगती है. श्रेया उससे छुपा छुपाई खेलने के लिए कहती है तो जान भी अपनी आंखों में पट्टी बांधकर उसे ढूंढने लगती है.

इसी beach जाह्नवी को एहसास होता है कि कोई और भी उसके कमरे में मौजूद है और जैसे ही वो अपनी पट्टी हटा कर देखती है तो वो shocked रह जाती है और सीढ़ियों से गिर जाती है जिससे उसकी वही मौत हो जाती है अब उधर शेखर भी घर में मौजूद था जो कि नींद में था उसे अचानक श्रेया के रोने की आवाज़ आती है तो वो फ़ौरन उसके पास पहुंचता है और उसे रोने की वजह पूछता है. श्रेया उससे कहती है कि papa आप ठीक कह रहे थे राघव अच्छा आदमी नहीं है वो पूछता है कि ऐसा क्यों कह रही हो बेटा? श्रेया कहती है क्योंकि papa मेरे मना करने पर भी उसने जाह्नवी madam को सीढ़ियों से गिराकर मार डाला ये सुनकर शेखर फोरन सीढ़ियों के पास पहुंचता है और उसे वहां कोई नहीं मिलता लेकिन तभी उसकी नज़र खून के कुछ निशानों पर जाती है और उनको follow करते करते वो अपने घर के फ्रिज तक पहुंच जाता है. फ्रिज को open करते ही उसके होश उड़ जाते हैं क्योंकि उसमें उसे जाह्नवी की लाश मिलती है ये देखकर शेखर के पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है और उसे डर लगने लगता है कि अगर किसी को इसके बारे में पता चल गया तो सभी सोचेंगे कि उसी ने जाह्नवी को मारा है इसलिए वो उसकी लाश को ठिकाने लगाने का बंदोबस्त करता है और उसकी लाश को एक bag में डालकर घर से निकलने लगता है.

लेकिन इसी beach घर की power cut हो जाती है. और शेखर एक torch लेने अपने घर में चला जाता है. Room में वापस आकर वो जैसे ही torch को on करता है तो देखता है कि किशोर ने श्रेया को अपने कब्जे में ले रखा है. वो शेखर से कहता है कि श्रेया अब मेरे साथ रहेगी उसको तुम्हारे साथ रहना पसंद नहीं है अगले ही पर शेखर ये अंदाज़ा लगा लेता है कि श्रेया का वो दोस्त कहीं ये किशोर ही तो नहीं है वो किशोर को वहां से चले जाने के लिए कहता है जिस पर किशोर उल्टा उसी पर हमला कर देता है।

ये देखकर शेखर भी चुप नहीं बैठता और अपनी बेटी को बचाने के लिए किशोर से हाथापाई करने लगता है और उसको अपने घर से बाहर धकेल देता है. यह देखकर श्रेया शेखर से कहती है कि papa आज के बाद में राघव से कोई बात नहीं करूंगी आप सही कहते हो वह अच्छा नहीं है।

भयभीत मूवीस explanation l Bhaybheet Movie Explained In Hindi

और दोस्तों यही आता है movie का climax श्रेया की ये शब्द सुनकर शेखर की पूरी body language अचानक से बदल जाती है. हाथ में चाकू लिए वो श्रेया की तरफ बढ़ता है और कहता है कि बस यही तुम्हारी दोस्ती थी. मुझे लगा तुम मेरी सच्ची friend हो लेकिन तुम तो अपने papa के कहने पर मुझे छोड़ने के लिए तैयार हो गई मुझे ही भला बुरा कहने लगी जबकि मैंने तुमको आज तक कुछ नहीं किया. लेकिन अब वक्त आ गया है तुम्हें भी तुम्हारी मां के पास भेजने का. यह कहकर शेखर चाकू लेकर श्रेया की तरफ बढ़ता है और तभी वहां किशोर beach में आ जाता है.

और उसे श्रेया पर हमला करने से रोकने लगता है. वो कहता है कि मैं मेरी पोती को बचाने के लिए किस हद तक गलत काम कर रहा था मुझे खुद नहीं पता. मैंने काले जादू तक का सहारा ले लिया ताकि अपनी पोती को वापस पा सको. लेकिन अपनी पोती को ज़िंदा नहीं कर सका और तुम हो की अपनी फ़ूल सी मासूम बच्ची को मारने चले हो. मैं तुम्हें ऐसा हरगिज नहीं करने दूंगा.

ऐसा कहकर दोनों में एक बार फिर से हाथापाई शुरू हो जाती है और इसलिए beach वहां काव्या पहुंच जाती है. किशोर को शेखर के ऊपर हमला करते देख उसे लगता है किशोर ही राघव है और वो शेखर को मारना चाहता है इसलिए वो पीछे से किशोर के ऊपर हमला करती है. और उसे बेहोश कर देती है.

इसके बाद वो foreign श्रेया के पास आती है और कहती है कि तुम्हें अब घबराने की ज़रूरत नहीं है. मैंने तुम्हारे दोस्त राघव यानी किशोर को बेहोश कर दिया है. और शेखर भी अब ठीक है.

श्रेया उससे कहती है कि किशोर राघव नहीं है दीदी और इतने में शेखर पीछे से आकर काव्या  पर भी हमला करके उसे बेहोश कर देता है.

और तभी कहानी जाती है flashback में. जहा हमें इस movie का बेहद emotional climax दिखाया गया है और सच मानो तो आपको मैंने ये movie इसी climate के लिए explain करके दिखाई है तो story जाती है flash back में जहां हमें पता चलता है कि शेखर अपनी बीवी रश्मि से बहुत ही ज़्यादा प्यार करता था लेकिन उसकी बीवी रश्मि का कहीं और affair चल रहा था. शेखर को अपने प्यार पर भरोसा था इसलिए उसने रश्मि को कुछ नहीं कहा और अपने प्यार पर भरोसा रखते हुए उस दिन का wait करने लगा जब रश्मि फिर से पूरी तरह से उसकी हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ बल्कि धीरे धीरे रश्मि हर बात में शेखर की बेइज्जती करने लगी जिससे शेखर अंदर ही अंदर टूटने लगा और depression का शिकार बन गया और इसी depression की वजह सेउसे multiple personality disorder की बीमारी हो गई.

जिसमें एक patient के अंदर एक से ज़्यादा characters develop हो जाते हैं और वह अपनी life में वैसे ही react भी करने लगता है. इसी depression में शेखर के अंदर एक character वन गया था. खुद को अकेला महसूस कर रहा शेखर अब अपनी नई personality को जीने लगा था जिसका नाम था राघव. दरअसल उस रात को शेखर यानी राघव ने ही रश्मि को  टैरेश से धक्का दिया और जंगल में भी वही था जो श्रेया से मिलने आया. श्रेया इतनी छोटी थी कि उसे अपने पिता के अंदर इस disorder का पता ही नहीं चला. वो मासूम जब अपने पिता को अलग तरीके से react करते देखती तो उसे राघव समझ लेती और वो भी उसे राघव बनकर ही बात करता. और थोड़ी देर बाद जब वो अपने आप normal हो जाता तो श्रेया भी उसे papa कहकर बात करती. इसका मतलब शेखर को खुद नहीं पता था.

कि वो इस बीमारी का शिकार है और राघव कोई और नहीं बल्कि वो खुद है. खैर इस बीज शेखर अपनी बेटी को मारने के लिए आगे बढ़ता है.

और इतने में काव्या को होश आ जाता है जो शेखर पर जानलेवा हमला करके उसे मार देती है और श्रेया को उससे बचा लेती है.इसके बाद श्रेया की पूरी ज़िम्मेदारी काव्या उठाती और यही होता है movie का the end.

दोस्तों इस movie में एक पिता का अपने परिवार के प्रति संघर्ष ही उसका श्राप बन गया और वो श्राप भी ऐसा जिसको वो खुद ही नहीं समझ पाया. मरते मरते भी उसको नहीं पता चला कि उसके साथ ये सब क्या हो रहा है? और क्यों हो रहा है?और इसके लिए हमें director और writer को thank you बोलना चाहिए.जिन्होंने इस तरह इस शानदार movie को हमारे सामने रखा और हम इसको एक अलग perspective से देख पाए.आपको यह movie कैसी लगी? हमें comment करके ज़रूर बताएं.

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